Pitru Paksha 2025 : जानें श्राद्ध और तर्पण की सभी तिथियां
India News Live,Digital Desk : सनातन धर्म में पितृ पक्ष का समय पूर्वजों को स्मरण करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का सबसे पवित्र अवसर माना जाता है। यह अवधि हर साल भाद्रपद मास की पूर्णिमा से शुरू होकर आश्विन मास की अमावस्या तक रहती है। इस दौरान श्रद्धा और नियमों के साथ पितरों के नाम पर श्राद्ध, तर्पण और दान करने की परंपरा है।
मान्यता है कि पितृ पक्ष के इन 16 दिनों में हमारे पूर्वज पृथ्वी पर आते हैं और वंशजों से अपनी आत्मा की शांति और मुक्ति की कामना करते हैं। कहा जाता है कि श्रद्धा से किए गए इन कर्मों से पूर्वज प्रसन्न होते हैं, परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है और घर में सुख-समृद्धि आती है।
ज्योतिषाचार्य पंडित रमेश भोजराज द्विवेदी का कहना है कि पितरों की पूजा और तर्पण करने से वंशजों को न केवल पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है, बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी होता है।
2025 में पितृ पक्ष की तिथियां
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष पितृ पक्ष रविवार, 7 सितंबर 2025 से शुरू होकर रविवार, 21 सितंबर 2025 को सर्वपितृ अमावस्या पर समाप्त होगा।
श्राद्ध की पूरी तिथियों की सूची इस प्रकार है:
| श्राद्ध तिथि | तारीख | दिन |
|---|---|---|
| पूर्णिमा श्राद्ध | 7 सितंबर 2025 | रविवार |
| प्रतिपदा श्राद्ध | 8 सितंबर 2025 | सोमवार |
| द्वितीया श्राद्ध | 9 सितंबर 2025 | मंगलवार |
| तृतीया और चतुर्थी श्राद्ध | 10 सितंबर 2025 | बुधवार |
| पंचमी श्राद्ध | 11 सितंबर 2025 | गुरुवार |
| षष्ठी श्राद्ध | 12 सितंबर 2025 | शुक्रवार |
| सप्तमी श्राद्ध | 13 सितंबर 2025 | शनिवार |
| अष्टमी श्राद्ध | 14 सितंबर 2025 | रविवार |
| नवमी श्राद्ध | 15 सितंबर 2025 | सोमवार |
| दशमी श्राद्ध | 16 सितंबर 2025 | मंगलवार |
| एकादशी श्राद्ध | 17 सितंबर 2025 | बुधवार |
| द्वादशी श्राद्ध | 18 सितंबर 2025 | गुरुवार |
| त्रयोदशी श्राद्ध | 19 सितंबर 2025 | शुक्रवार |
| चतुर्दशी श्राद्ध | 20 सितंबर 2025 | शनिवार |
| सर्वपितृ अमावस्या श्राद्ध | 21 सितंबर 2025 | रविवार |
पितृ पक्ष का महत्व
पितृ पक्ष के हर दिन को अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है।
श्राद्ध का अर्थ: यह शब्द ‘श्रद्धा’ से बना है, यानी श्रद्धा और नियमों के साथ किए गए कर्म।
आध्यात्मिक लाभ: मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक किए गए श्राद्ध, तर्पण और दान से न केवल पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है, बल्कि जीवन में सुख-समृद्धि भी आती है।
पारंपरिक महत्व: दक्षिण दिशा को पितरों की दिशा माना गया है। इसलिए इस समय घर की दक्षिण दिशा में दीपक जलाना शुभ माना जाता है।
दान का महत्व: पितृ पक्ष में भोजन और वस्त्र का दान करने से पूर्वज प्रसन्न होते हैं और वंश में खुशहाली आती है।
अभिजीत मुहूर्त: इस काल में अभिजीत मुहूर्त में किया गया श्राद्ध विशेष फलदायी माना जाता है।