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September 17 2026 05:45 pm

'भारत की सैन्य क्षमताओं का सम्मान करते हैं', पाकिस्तानी सेना ने माना भारतीय ताकत का लोहा

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पारंपरिक युद्धों से लेकर परमाणु प्रतिरोध तक हमेशा भारत के साथ खुद को बराबरी पर दिखाने की कोशिश करने वाले पाकिस्तान के सुर अब बदले-बदले नजर आ रहे हैं। भारतीय सेना के आधुनिकीकरण, स्वदेशी मिसाइल प्रणालियों और मजबूत एयर डिफेंस नेटवर्क के बढ़ते प्रभाव के बीच पाकिस्तानी सेना ने सार्वजनिक रूप से भारत की सैन्य ताकत का लोहा माना है। पाकिस्तानी सेना के शीर्ष प्रवक्ता और इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (DG ISPR) के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया साक्षात्कार में खुलकर स्वीकार किया कि पाकिस्तान भारत की बढ़ती सैन्य क्षमताओं का सम्मान करता है। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट शब्दों में यह भी कहा कि पाकिस्तान नई दिल्ली के साथ किसी भी तरह की 'हथियारों की अंधी दौड़' (Arms Race) में शामिल होने की स्थिति या मंशा में नहीं है। सैन्य विशेषज्ञों के मुताबिक, दशकों से आक्रामक बयानबाजी करने वाले रावलपिंडी के जनरलों की ओर से आया यह बयान एक तरह से भारत के भारी रक्षा बजट और तकनीकी बढ़त के सामने जमीनी हकीकत का स्वीकार है।

अल-अरबिया के सवाल पर डीजी आईएसपीआर ने क्या कहा?

अंतरराष्ट्रीय मीडिया नेटवर्क 'अल-अरबिया' (Al Arabiya) को दिए एक विस्तृत इंटरव्यू के दौरान पत्रकार ने लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी से सीधा और तीखा सवाल पूछा था कि क्या पाकिस्तान भारत द्वारा तेजी से विकसित की जा रही मिसाइल, एयर डिफेंस और पारंपरिक स्ट्राइक क्षमताओं को लेकर चिंतित है?

इस सवाल के जवाब में पाकिस्तानी सैन्य प्रवक्ता ने कहा, "हम भारत की सैन्य क्षमताओं का सम्मान करते हैं। हम अपने सैन्य भंडार और क्षमताओं को बढ़ाने के लिए बहुत सारा पैसा और भारी संसाधन खर्च करने की उनकी इच्छा को अच्छी तरह समझते हैं। हालांकि, इसका मतलब यह कतई नहीं है कि हम भारतीयों के साथ किसी तरह की हथियारों की दौड़ में शामिल होना चाहते हैं।"

उन्होंने आगे सफाई देते हुए अपनी स्थिति को रक्षात्मक सांचे में ढालने की कोशिश की और कहा, "हमारी क्षमताएं केवल रक्षात्मक (Defensive) हैं। दुनिया के किसी भी देश के खिलाफ हमारा कोई आक्रामक इरादा नहीं है। हमें अपनी रक्षात्मक क्षमता पर पूरा भरोसा है।"

भारत के विशाल रक्षा बजट और 'आत्मनिर्भर भारत' की हकीकत

पाकिस्तानी सेना के इस बदले रुख के पीछे भारत और पाकिस्तान के बीच रक्षा बजट और तकनीकी क्षमता का लगातार बढ़ता विशाल अंतर है:

बजट का भारी अंतर: भारत का वार्षिक रक्षा बजट 6 लाख करोड़ रुपये (करीब 75 अरब डॉलर से अधिक) को पार कर चुका है, जबकि पाकिस्तान की खस्ताहाल अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के कर्जों पर निर्भरता के चलते उसका रक्षा बजट 8-9 अरब डॉलर के आसपास ही सिमट कर रह गया है।

स्वदेशी एयर डिफेंस और मिसाइल नेटवर्क: भारत ने अपने आकाश (Akash), आकाश-एनजी (Akash-NG), क्यूआरएसएएम (QRSAM) और वीएसएचओआरएडीएस (VSHORADS) जैसे स्वदेशी सिस्टम्स को सेना में शामिल किया है। इसके साथ ही भारत ने रूस के साथ मिलकर ब्रह्मोस (Brahmos) और इजरायल के साथ एमआरएसएएम (MRSAM) का मजबूत कवच तैयार किया है।

प्रोजेक्ट 'कुशा' और लॉन्ग रेंज इंटरसेप्शन: डीआरडीओ (DRDO) द्वारा 400 किलोमीटर तक मार करने वाले स्वदेशी लॉन्ग-रेंज एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम 'प्रोजेक्ट कुशा' (Project Kusha) के सफल परीक्षणों और पांचवीं पीढ़ी के एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) पर हो रहे काम ने दोनों देशों के बीच पारंपरिक सैन्य संतुलन को पूरी तरह भारत के पक्ष में झुका दिया है।

मजबूरी से निकला 'डिफेंसिव' होने का तर्क

रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान का यह कहना कि 'हम रेस में नहीं हैं', दरअसल उसकी अपनी आर्थिक और सामरिक लाचारी को छिपाने की एक कूटनीतिक कोशिश है। 1990 और 2000 के दशक में पाकिस्तान हमेशा भारत के हर मिसाइल परीक्षण का जवाब अपने परीक्षण से देने और संख्यात्मक संतुलन बनाने का दावा करता था।

लेकिन आज जब पाकिस्तान गंभीर महंगाई, विदेशी मुद्रा भंडार के संकट और आंतरिक राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा है, तो वह भारत के आधुनिक हार्डवेयर और सैटेलाइट आधारित सटीक युद्धक क्षमताओं का मुकाबला करने में असमर्थ है। यही वजह है कि पाकिस्तानी सेना अब खुलकर आक्रामकता दिखाने के बजाय अपनी सीमाओं की रक्षा और आंतरिक सुरक्षा का हवाला देकर पल्ला झाड़ रही है।

मक्का पैक्ट से लेकर भारत तक: रावलपिंडी की कूटनीतिक हिचक

यह बयान ऐसे समय में आया है जब हाल ही में सऊदी अरब के साथ हुए 'मक्का डिफेंस पैक्ट' पर भी पाकिस्तान ने हूतियों के खिलाफ सेना भेजने से इनकार करते हुए इसे 'केवल रक्षात्मक' करार दिया था। वहीं अरब सागर में भारतीय और पाकिस्तानी जहाजों की हालिया टक्कर के बाद उपजे तनाव के बीच भी पाकिस्तानी सेना ने भारत के खिलाफ किसी बड़े आक्रामक युद्धाभ्यास के बजाय संयम बरतने वाले बयान दिए हैं।

कुल मिलाकर, रावलपिंडी का यह खुला बयान इस बात की तस्दीक करता है कि एशिया के सामरिक पटल पर भारत की बढ़ती आर्थिक और सैन्य ताकत ने पाकिस्तान को यह स्वीकार करने पर मजबूर कर दिया है कि अब भारत से सीधी सैन्य होड़ लगाना उसके बस की बात नहीं रही।