कराची में ईद पर भी पानी के लिए हाहाकार, क्या सिंधु जल संधि का निलंबन है इस संकट की जड़?

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India News Live,Digital Desk : पाकिस्तान का आर्थिक केंद्र और करोड़ों की आबादी वाला शहर कराची इस समय भीषण जल संकट से जूझ रहा है। भीषण गर्मी के बीच ईद के त्योहार पर भी शहर के प्रमुख इलाकों में नलों में पानी नहीं है। लियारी, ओरंगी, कोरंगी, मलीर और गुलशन-ए-इकबाल जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं।

पानी का संकट और सिंधु जल संधि (IWT)

विशेषज्ञों के अनुसार, कराची के इस बदतर हालातों को भारत द्वारा सिंधु जल समझौते (IWT) के निलंबन से जोड़कर देखा जा रहा है। अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने इस समझौते को निलंबित कर दिया था, जिसके बाद से पाकिस्तान की पानी और खाद्य सुरक्षा पर दबाव बढ़ गया है। पाकिस्तान की 80 प्रतिशत से अधिक सिंचाई और बिजली उत्पादन प्रणाली इन्हीं नदियों पर आधारित है। खबरों के मुताबिक, संधि के निलंबन और भारतीय बांधों (बगलियार और किशनगंगा) से पानी के प्रवाह के नियंत्रण के कारण पाकिस्तान में पानी की उपलब्धता में उल्लेखनीय कमी देखी गई है।

कराची का जल संकट: बदतर होते हालात

कराची में पानी की किल्लत केवल मौसमी नहीं, बल्कि एक लंबे समय से चली आ रही प्रणालीगत विफलता है:

सप्लाई का गणित: शहर की रोजाना पानी की मांग 1200 मिलियन गैलन से अधिक है, जबकि आपूर्ति केवल 650 MGD के आसपास सिमट कर रह गई है।

टैंकर माफिया का राज: पाइपलाइनें सूखने के कारण निवासी महंगे निजी वॉटर टैंकरों पर निर्भर हैं, जिनके दाम त्यौहारों के दौरान दोगुने कर दिए गए हैं।

स्वास्थ्य पर असर: दूषित पानी के कारण डायरिया और हेपेटाइटिस जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों में।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप

जल संकट को लेकर पाकिस्तान के भीतर भी राजनीतिक घमासान जारी है। जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख हाफिज नईम उर रहमान ने सत्ताधारी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) पर कुप्रबंधन के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि 18 वर्षों तक सत्ता में रहने के बावजूद सिंध सरकार शहर की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में विफल रही है। उन्होंने मेयर के उन दावों को भी खारिज किया है जिनमें पानी की पर्याप्त सप्लाई की बात कही गई थी।

सफाई व्यवस्था का भी बुरा हाल

पानी के अलावा, शहर में सफाई व्यवस्था भी बदहाल है। हाफिज नईम ने सिंध सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट बोर्ड को निशाने पर लेते हुए कहा कि 43 अरब रुपये का भारी-भरकम बजट मिलने के बाद भी शहर कूड़े के ढेर में तब्दील हो गया है। कुर्बानी के जानवरों के अपशिष्ट का निस्तारण न होने से शहर में संक्रामक बीमारियों का खतरा और बढ़ गया है।

कराची की यह स्थिति पाकिस्तान के आर्थिक और बुनियादी ढांचागत पतन की एक तस्वीर पेश करती है, जहां न केवल अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक दबाव, बल्कि स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक लापरवाही ने आम नागरिकों का जीवन दूभर कर दिया है।