ईरान का अमेरिकी सैन्य बेस पर घातक हमला: कई सैनिक घायल, 3 करोड़ डॉलर वाले 'रीपर ड्रोन' तबाह; युद्धविराम पर छाया संकट

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India News Live,Digital Desk : अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष में स्थिति एक बार फिर बेहद गंभीर हो गई है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कुवैत स्थित 'अली अल सलेम एयर बेस' पर एक बड़ा हमला किया है, जिसमें कई अमेरिकी सैनिकों के घायल होने की पुष्टि हुई है। इस हमले ने न केवल सुरक्षा समीकरणों को बदल दिया है, बल्कि दोनों देशों के बीच हुए नाजुक युद्धविराम (Ceasefire) को भी खतरे में डाल दिया है।

हमले की पूरी घटना

ईरानी बलों ने गुरुवार सुबह कुवैत के 'अली अल सलेम एयर बेस' को निशाना बनाते हुए 'फतेह-110' बैलिस्टिक मिसाइल दागी। हालांकि, कुवैत के एयर डिफेंस सिस्टम ने मिसाइल को हवा में ही रोक दिया, लेकिन उसका मलबा एयर बेस के भीतर गिरने से कई अमेरिकी सैनिक घायल हो गए। ईरान का दावा है कि यह हमला उनके दक्षिणी हिस्से, विशेषकर बंदर अब्बास क्षेत्र में हुए अमेरिकी हमलों के जवाब में किया गया है।

अमेरिकी सेना को भारी नुकसान

इस हमले में अमेरिका के 'MQ-9 रीपर' (MQ-9 Reaper) स्ट्राइक ड्रोन्स को भारी क्षति पहुँची है:

क्षति: एक रीपर ड्रोन पूरी तरह नष्ट हो गया है, जबकि एक अन्य बुरी तरह क्षतिग्रस्त है।

रणनीतिक नुकसान: एक रीपर ड्रोन की कीमत लगभग 3 करोड़ डॉलर होती है। ये ड्रोन्स अमेरिकी सेना के लिए 'खुफिया निगरानी' और 'अचूक हवाई हमलों' के मुख्य आधार हैं। इनका नुकसान अमेरिकी रक्षा प्रणाली के लिए एक बड़ा रणनीतिक झटका माना जा रहा है।

शांति समझौते की उम्मीदों को धक्का

यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ युद्धविराम की अवधि बढ़ाने और परमाणु समझौते पर गहन विचार कर रहे थे। शुक्रवार को वाइट हाउस में ट्रंप की अपने सलाहकारों के साथ हुई 'सीक्रेट रूम मीटिंग' बिना किसी नतीजे के समाप्त हुई। हालांकि शुरुआती खबरों में 60 दिनों के युद्धविराम की उम्मीद जताई गई थी, लेकिन ताजा सैन्य टकराव ने इस समझौते की राह में नई अड़चनें पैदा कर दी हैं।

ईरान का आक्रामक रुख

ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी सैन्य क्षमताओं के बल पर रियायतें हासिल करने में विश्वास रखता है। वहीं, ट्रंप प्रशासन का रुख अब भी सख्त है; राष्ट्रपति ट्रंप केवल उन्हीं शर्तों को स्वीकार करेंगे जो ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर पूरी तरह अंकुश लगा सकें।

आगे क्या?

एक तरफ अमेरिका अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहता है, तो दूसरी तरफ ईरान अपनी संप्रभुता और प्रतिरोध क्षमता का प्रदर्शन कर रहा है। यूएई पर ईरान के हालिया हमलों और अब अमेरिकी बेस पर इस स्ट्राइक ने पूरे खाड़ी क्षेत्र को एक बड़े युद्ध की मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस नाजुक स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।