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July 03 2026 05:26 am

एक त्याग की मिसाल, दूसरा आस्था पर प्रहार: तीन दशक पहले शुजागंज के सपूत ने राम मंदिर के लिए दी थी जान

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अयोध्या का रुदौली तहसील के अंतर्गत आने वाला शुजागंज क्षेत्र इन दिनों राम मंदिर से जुड़ी दो बिल्कुल विपरीत घटनाओं को लेकर सुर्खियों में है। यह कहानी केवल दो व्यक्तियों की नहीं, बल्कि दो अलग-अलग दौर की सोच का आईना है। एक तरफ तीन दशक पुराना वो गौरवशाली इतिहास है जब इसी मिट्टी के लाल ने राम मंदिर आंदोलन के लिए हंसते-हंसते अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे। वहीं दूसरी तरफ, वर्तमान की एक ऐसी शर्मनाक घटना है जिसमें पड़ोसी गांव के एक युवक पर रामलला के चरणों में अर्पित चढ़ावे को चुराने का गंभीर आरोप लगा है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है।

कारसेवक राम अचल गुप्ता का वो सर्वोच्च बलिदान

बात 2 नवंबर 1990 की है, जब अयोध्या में कारसेवा के दौरान हुई पुलिस फायरिंग में शुजागंज के रहने वाले कारसेवक राम अचल गुप्ता शहीद हो गए थे। उनके इस सर्वोच्च बलिदान के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था, लेकिन उनकी पत्नी राजकुमारी ने बेहद कठिन परिस्थितियों में भी बच्चों को पाला और परिवार में राम मंदिर आंदोलन की आस्था की विरासत को जीवित रखा।

शहीद कारसेवक के बेटे संजय गुप्ता आज भी गर्व से कहते हैं, > "जब मैं आज अयोध्या में प्रभु श्री राम का भव्य और दिव्य मंदिर देखता हूं, तो मुझे महसूस होता है कि मेरे पूज्य पिता जी का अधूरा सपना आज पूरा हो गया है। यही हमारे पूरे परिवार के लिए सबसे बड़ा सम्मान और जीवन का संतोष है।"

जब पड़ोसी लवकुश मिश्रा की करतूत से आहत हुई जनभावनाएं

जहां एक ओर पूरा क्षेत्र कारसेवक राम अचल गुप्ता की शहादत पर गर्व से सीना चौड़ा करता है, वहीं पड़ोसी गांव फगोली ठकुरान के लवकुश मिश्रा का नाम राम मंदिर चढ़ावा चोरी कांड में आने से हर कोई स्तब्ध है। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र रामलला के दानपात्र से चोरी के इस मामले ने स्थानीय लोगों को भीतर तक आहत किया है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस पावन धरती ने मंदिर के लिए अपना सपूत खोया, वहीं का एक युवक इस तरह के महापाप में संलिप्त पाया जाए, इससे बड़ा दुर्भाग्य और कुछ नहीं हो सकता।

चौराहों से लेकर बाजारों तक आस्था और नैतिकता पर छिड़ी बहस

विशेष जांच दल (SIT) की टीम जब सबूतों की तलाश में आरोपी लवकुश मिश्रा के पैतृक आवास पर पहुंची, तो गांव से लेकर बाजारों और चौराहों तक केवल इसी मुद्दे पर बहस छिड़ गई है। स्थानीय लोगों का मानना है कि राम मंदिर सिर्फ एक ढांचा या धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि यह करोड़ों सनातनी हिंदुओं के त्याग, तपस्या और बलिदान का साक्षात प्रतीक है। ऐसे में इसकी पवित्रता से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाना चाहिए, ताकि बलिदानियों की विरासत का अपमान न हो।

आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के भाई का दावा: 'साजिशन फंसाया गया'

चढ़ावा चोरी मामले में नामजद किए गए एक अन्य मुख्य आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के बड़े भाई दिनेश यादव ने इस पूरे प्रकरण पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने अपने भाई का बचाव करते हुए मीडिया से कहा कि उनका भाई पिछले 20 वर्षों से विश्व हिंदू परिषद (VHP) में महासचिव चंपत राय और दिवंगत महंत रामचंद्र दास परमहंस जैसे बड़े दिग्गजों के साथ सेवा में लगा हुआ था।

दिनेश यादव ने दावा किया, "मेरे भाई को एक सोची-समझी साजिश के तहत इस मामले में फंसाया जा रहा है। आज तक उनके काम पर कभी कोई उंगली नहीं उठी।" बार एसोसिएशन अयोध्या द्वारा आरोपियों का केस न लड़ने के फैसले पर दुख जताते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें देश की सरकार और अदालत की न्याय प्रणाली पर पूरा भरोसा है और भगवान सब देख रहे हैं, देर-सवेर सच सबके सामने जरूर आएगा।