'संवैधानिक काउबॉय' बनाम 'फर्जी दस्तावेज': पवन खेड़ा की जमानत पर SC में तीखी नोकझोंक, डॉ. अंबेडकर का भी हुआ जिक्र
India News Live,Digital Desk : सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान कानूनी दलीलों के साथ-साथ तीखे कटाक्षों का दौर भी चला। असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा की पत्नी द्वारा दर्ज कराए गए जालसाजी और मानहानि के मामले में खेड़ा की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने मोर्चा संभाला, तो असम सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कड़ा विरोध दर्ज कराया।
'अंबेडकर देखते तो दुखी होते': सिंघवी का प्रहार
पवन खेड़ा का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने असम के मुख्यमंत्री की कार्यशैली पर कड़े प्रहार किए। उन्होंने बहस के दौरान कुछ प्रमुख बिंदु रखे:
'संवैधानिक काउबॉय': सिंघवी ने मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा को "संवैधानिक काउबॉय" और "संवैधानिक रेम्बो" करार देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के सार्वजनिक बयानों से ऐसा लगता है कि वे कानून से ऊपर हैं।
डॉ. अंबेडकर का हवाला: सिंघवी ने कहा, "अगर डॉ. बी.आर. अंबेडकर आज किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को इस तरह 'काउबॉय' की तरह व्यवहार करते देखते, तो उन्हें बहुत दुख होता।"
आतंकवादी जैसी घेराबंदी: उन्होंने कोर्ट को बताया कि दिल्ली में खेड़ा के घर को 50-70 पुलिसकर्मियों ने ऐसे घेर लिया था मानो वे किसी आतंकवादी को पकड़ने आए हों। सिंघवी ने सवाल उठाया कि क्या मानहानि के मामले में इतनी पुलिस फोर्स और हिरासत की वाकई जरूरत है?
'जाली दस्तावेज और साजिश': तुषार मेहता की दलील
असम सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जमानत याचिका का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने मामले की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कहा:
फर्जी पासपोर्ट: मेहता ने कोर्ट को बताया कि खेड़ा ने जिन दस्तावेजों (पासपोर्ट) के आधार पर आरोप लगाए थे, वे पूरी तरह से जाली और फर्जी हैं। किसी भी अथॉरिटी ने ऐसे दस्तावेज जारी नहीं किए हैं।
हिरासत में पूछताछ क्यों?: उन्होंने तर्क दिया कि यह पता लगाना जरूरी है कि ये जाली दस्तावेज किसने तैयार किए और क्या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है। इसके लिए खेड़ा से हिरासत में पूछताछ (Custodial Interrogation) अनिवार्य है।
गंभीर अपराध: मेहता ने कहा कि सरकारी मुहरों और आधिकारिक दस्तावेजों की जालसाजी का मामला केवल मानहानि तक सीमित नहीं रह जाता, यह एक गंभीर अपराध है।
क्या है विवाद की जड़?
यह पूरा मामला पवन खेड़ा द्वारा असम के मुख्यमंत्री की पत्नी रिनीकी भुइयां शर्मा पर लगाए गए आरोपों से जुड़ा है। खेड़ा ने दावा किया था कि उनके पास कई देशों के पासपोर्ट हैं और विदेशों में संदिग्ध वित्तीय लेन-देन हुआ है। इसके बाद असम पुलिस ने खेड़ा के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला दर्ज किया था।
अब आगे क्या?
दोनों पक्षों की लंबी और जोरदार बहस सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब अदालत को यह तय करना है कि क्या पवन खेड़ा को गिरफ्तारी से सुरक्षा दी जाए या उन्हें जांच के लिए असम पुलिस के हवाले किया जाए।