ईरान पर 'पलक झपकते' प्रहार की तैयारी: मिडिल ईस्ट में 'डार्क ईगल' तैनात करेगा अमेरिका
India News Live,Digital Desk : ईरान और अमेरिका के बीच लागू युद्धविराम के बावजूद पर्दे के पीछे महायुद्ध की तैयारियां तेज हो गई हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) अब मिडिल ईस्ट में अपना सबसे घातक और अत्याधुनिक हाइपरसोनिक मिसाइल सिस्टम 'डार्क ईगल' (Dark Eagle) तैनात करने की योजना बना रहा है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इस सिस्टम की मांग की है ताकि ईरान के उन अंदरूनी इलाकों को निशाना बनाया जा सके, जहां उसने अपने बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चरों को छिपा रखा है।
क्यों पड़ी 'डार्क ईगल' की जरूरत?
ईरान ने हाल के हफ्तों में अपनी सैन्य रणनीति बदलते हुए अपने मिसाइल लॉन्चरों को सीमा से 300 मील (लगभग 480 किमी) से अधिक अंदरुनी क्षेत्रों में शिफ्ट कर दिया है।
पारंपरिक हथियारों की सीमा: ये इलाके अमेरिकी सेना के पारंपरिक सटीक मार करने वाले हथियारों (Precision Strikes) की पहुंच से बाहर हो गए हैं।
हवाई खतरा: ईरान का एयर डिफेंस सिस्टम अमेरिकी ड्रोन और विमानों के लिए अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। ऐसे में अमेरिका को एक ऐसे हथियार की जरूरत है जो बिना पकड़े गए और बिना पायलट की जान जोखिम में डाले ईरान के दिल में वार कर सके।
क्या है 'डार्क ईगल' (LRHW) और इसकी खासियत?
डार्क ईगल, जिसे लॉन्ग-रेंज हाइपरसोनिक वेपन (LRHW) भी कहा जाता है, अमेरिकी सेना का सबसे नया और शक्तिशाली अस्त्र है। इसकी प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:
भयंकर रफ्तार: यह मिसाइल ध्वनि की गति से 5 गुना अधिक यानी मैक 5+ (Mach 5+) की रफ्तार से चलती है। इतनी गति के कारण दुश्मन का रडार इसे देख तो सकता है, लेकिन इसे रोकने के लिए प्रतिक्रिया देने का समय नहीं मिलता।
मारक क्षमता: इसकी रेंज 1,725 मील (करीब 2,780 किलोमीटर) से अधिक है। यानी यह सैकड़ों मील दूर बैठे दुश्मन को मिनटों में खाक कर सकती है।
चकमा देने में माहिर: पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों के विपरीत, यह मिसाइल हवा में अपनी दिशा बदल सकती है (Maneuverability), जिससे एयर डिफेंस सिस्टम इसे ट्रैक नहीं कर पाते।
भारी भरकम कीमत: लॉकहीड मार्टिन द्वारा विकसित इस मिसाइल के एक यूनिट की कीमत करीब 1.5 करोड़ डॉलर है। वर्तमान में अमेरिकी सेना के पास ऐसी केवल 8 मिसाइलें ही तैयार हैं।
रूस और चीन को भी बड़ा संदेश
अगर पेंटागन डार्क ईगल की तैनाती को मंजूरी देता है, तो यह इस हथियार की दुनिया में पहली ऑपरेशनल तैनाती होगी। यह न केवल ईरान के लिए चेतावनी है, बल्कि रूस और चीन जैसे देशों को भी संदेश है कि अमेरिका अब उनकी हाइपरसोनिक तकनीक का मुकाबला करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
ईरान जंग में मिसाइलों की भारी खपत
रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अब तक अपनी करीब 1,100 गुप्त JASSM-ER क्रूज मिसाइलें इस्तेमाल कर ली हैं। मिसाइलों के स्टॉक में आई कमी और दर्जनों MQ-9 रीपर ड्रोन के नुकसान ने अमेरिका को इस नई और खतरनाक रणनीति पर विचार करने के लिए मजबूर किया है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जंग दोबारा शुरू होती है, तो यह 'डार्क ईगल' की वजह से कहीं अधिक घातक साबित होगी।