महाराष्ट्र की राजनीति में नया ट्विस्ट: उद्धव ठाकरे की खाली सीट पर कांग्रेस ने ठोका दावा, 'इंडिया' गठबंधन में रार
India News Live,Digital Desk : महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव से पहले विपक्षी 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन के भीतर दरार पड़ती नजर आ रही है। पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे द्वारा इस बार विधान परिषद (MLC) सदस्य न बनने के फैसले ने गठबंधन के साथियों के बीच खींचतान शुरू कर दी है। कांग्रेस ने साफ संकेत दिए हैं कि यदि उद्धव ठाकरे खुद सदन नहीं जाते हैं, तो वह उनकी जगह पर शिवसेना (UBT) के किसी अन्य नेता को समर्थन देने के बजाय अपना खुद का उम्मीदवार मैदान में उतार सकती है।
उद्धव का पैर पीछे खींचना और 'एक अनार सौ बीमार' के हालात
उद्धव ठाकरे शिवसेना के पहले सदस्य थे जो ठाकरे परिवार की परंपरा तोड़कर सदन पहुंचे थे। इस बार उन्होंने बालासाहेब ठाकरे की परंपरा का सम्मान करते हुए सदन न जाने का निर्णय लिया है। उद्धव सेना (UBT) चाहती है कि उनके स्थान पर अंबादास दानवे को विधान परिषद भेजा जाए।
हालांकि, कांग्रेस इस एकतरफा फैसले से नाराज दिख रही है। महाराष्ट्र में विधान परिषद की 9 सीटें खाली हो रही हैं, जिनमें से विपक्षी गठबंधन संख्या बल के आधार पर केवल एक सीट ही जीतने की स्थिति में है। ऐसे में कांग्रेस का मानना है कि जब तक उद्धव खुद उम्मीदवार थे, तब तक कोई विवाद नहीं था, लेकिन अब इस सीट पर उनका हक बनता है।
हर्षवर्धन सकपाल और भाई जगताप के कड़े तेवर
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सकपाल ने हाल ही में उद्धव ठाकरे से मुलाकात कर उन्हें खुद चुनाव लड़ने की सलाह दी थी। बुधवार को दिल्ली में हाईकमान से मुलाकात के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि कांग्रेस अपनी दावेदारी से पीछे नहीं हटेगी।
कांग्रेस की दलील: पार्टी का कहना है कि उद्धव सेना ने सहयोगियों को भरोसे में लिए बिना अंबादास दानवे के नाम का ऐलान कैसे कर दिया?
भाई जगताप का बयान: कांग्रेस नेता भाई जगताप ने तो यहां तक कह दिया कि यदि दानवे के नाम पर अड़े रहे, तो कांग्रेस उनके खिलाफ अपना उम्मीदवार उतार सकती है।
विपक्ष की फूट का फायदा उठा सकती है महायुति
विपक्षी गठबंधन में मचे इस घमासान पर सत्ताधारी महायुति (BJP और एकनाथ शिंदे की शिवसेना) की पैनी नजर है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि कांग्रेस और उद्धव सेना के बीच समझौता नहीं हुआ और वोट बंटते हैं, तो भाजपा एक अतिरिक्त उम्मीदवार उतारकर विपक्ष की इकलौती सीट भी छीनने की कोशिश कर सकती है।
2020 में जब महाविकास अघाड़ी की सरकार थी, तब सत्ता के लिए तीनों दल एकजुट थे, लेकिन अब विपक्ष में रहते हुए एक-एक सीट के लिए 'फ्रेंडली फाइट' के आसार बन रहे हैं। अब देखना होगा कि क्या उद्धव ठाकरे गठबंधन बचाने के लिए अपना फैसला बदलते हैं या कांग्रेस अपनी जिद पर कायम रहती है।