एमपी राज्यसभा चुनाव: कांग्रेस विधायकों का 'बेंगलुरु कूच', क्या बीजेपी की 'तीसरी चाल' बिगाड़ देगी समीकरण?
भोपाल: मध्यप्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों के लिए 18 जून को होने वाले चुनाव ने राज्य की सियासत में जबरदस्त उबाल ला दिया है। क्रॉस वोटिंग और विधायकों की 'खरीद-फरोख्त' (Horse Trading) की आशंका के बीच कांग्रेस ने अपने 35 विधायकों को विशेष विमान से बेंगलुरु भेज दिया है। विपक्षी दल का आरोप है कि सत्ताधारी भाजपा 'नोटों की थैलियों' के दम पर उनके विधायकों को तोड़ने की कोशिश कर रही है। मुकाबला तब पेचीदा हो गया जब बीजेपी ने दो सीटों पर स्पष्ट बहुमत होने के बावजूद तीसरी सीट पर भी अपना उम्मीदवार उतारकर मुकाबले को 'वोटिंग' तक खींच लिया।
बीजेपी का 'मास्टरस्ट्रोक' और दिग्गजों की दावेदारी
भाजपा ने अपनी दो सुरक्षित सीटों पर राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ और राज्य इकाई के सचिव रजनीश अग्रवाल को मैदान में उतारा है। लेकिन असली रोमांच तीसरी सीट को लेकर है, जहाँ बीजेपी ने एमपी मछुआरा कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष महेश केवट पर दांव खेला है।
दूसरी तरफ, कांग्रेस ने पूर्व सांसद और राहुल गांधी की करीबी मानी जाने वाली मीनाक्षी नटराजन को अपना उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस की ओर से दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह ने मोर्चा संभालते हुए कहा कि बीजेपी एक महिला उम्मीदवार के खिलाफ उस व्यक्ति को लड़ा रही है जिसे उन्होंने खुद 2022 में निष्कासित कर दिया था।
क्या कहता है सीटों और वोटों का गणित?
मध्यप्रदेश विधानसभा की मौजूदा स्थिति को देखें तो 230 सदस्यीय सदन में प्रभावी संख्या 229 है (एक सीट रिक्त)। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए प्रथम वरीयता के 58 वोटों की आवश्यकता है।
| पार्टी | विधायक संख्या | राज्यसभा गणित |
|---|---|---|
| भाजपा | 164 | 2 सीटें पक्की (116 वोट), शेष 48 वोट बचे। |
| कांग्रेस | 64 | 1 सीट के लिए 58 वोट चाहिए, 6 वोट अतिरिक्त हैं। |
| अन्य | 01 (BAP) | कमलेश डोडियार (भारत आदिवासी पार्टी) |
तीसरी सीट का पेचीदा समीकरण: बीजेपी को चाहिए 10 और वोट
बीजेपी को अपनी तीसरी सीट (महेश केवट) जिताने के लिए 58 वोट चाहिए, जबकि उनके पास दो सीटें सुरक्षित करने के बाद केवल 48 वोट बचते हैं। यानी जीत के लिए 10 अतिरिक्त मतों की जरूरत है।
निर्मला सप्रे का फैक्टर: कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे ने हाल ही में सीएम मोहन यादव से मुलाकात की है, जिससे उनके भाजपा के पक्ष में वोट करने की प्रबल संभावना है।
कमलेश डोडियार: भारत आदिवासी पार्टी के इकलौते विधायक का रुख भी निर्णायक होगा। अगर ये दोनों वोट बीजेपी को मिलते हैं, तो बीजेपी का आंकड़ा 50 तक पहुँच जाएगा, फिर भी उसे 8 और वोटों की दरकार होगी।
कांग्रेस की चुनौतियां और किलेबंदी
कागजों पर कांग्रेस के पास 64 विधायक हैं, जो जीत के आंकड़े (58) से 6 ज्यादा हैं। लेकिन दतिया विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता रद्द होने और मुकेश मल्होत्रा के मतदान पर हाई कोर्ट की रोक के बाद कांग्रेस का प्रभावी आंकड़ा 62 के करीब है। कांग्रेस को डर है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के 2020 वाले 'ऑपरेशन लोटस' की तरह बीजेपी इस बार भी उनके खेमे में सेंध लगा सकती है। इसी 'हॉर्स ट्रेडिंग' से बचने के लिए नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार विधायकों को लेकर बेंगलुरु रवाना हुए हैं।