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September 30 2026 09:21 pm

यूपी में डेयरी सेक्टर भरेगा नई उड़ान: 22 कंपनियां करेंगी 695 करोड़ का निवेश, 2.5 हजार युवाओं को मिलेगा रोजगार

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उत्तर प्रदेश को देश का प्रमुख औद्योगिक और निवेश हब बनाने की दिशा में राज्य सरकार के प्रयासों को एक और बड़ी कामयाबी मिली है। ग्रेटर नोएडा में आयोजित उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (UPITS) प्रदेश के युवाओं के लिए सुनहरे अवसर लेकर आया है। ट्रेड शो के मंच पर देश और विदेश के उद्यमियों ने राज्य की उद्योग-अनुकूल नीतियों पर भरोसा जताते हुए भारी पूंजी निवेश की सहमति दी है। इसी क्रम में प्रदेश के दुग्धशाला विकास विभाग को निजी व सहकारी क्षेत्र की 22 दिग्गज कंपनियों से कुल 695.18 करोड़ रुपये के ठोस निवेश प्रस्ताव हासिल हुए हैं। इन परियोजनाओं के धरातल पर उतरने से न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था और दुग्ध उत्पादकों की आय में क्रांतिकारी बदलाव आएगा, बल्कि प्रदेश के 2,500 से अधिक युवाओं को सीधे तौर पर रोजगार व नौकरी के नए अवसर उपलब्ध होंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी' के संकल्प को पूरा करने में यह कदम मील का पत्थर साबित होने जा रहा है।

प्राधिकरण और विभागीय अधिकारियों के अनुसार, उत्तर प्रदेश दुग्ध उत्पादन के मामले में पहले से ही देश में अग्रणी स्थान रखता है। अब अत्याधुनिक प्रोसेसिंग प्लांट, आधुनिक चिलिंग सेंटर और कोल्ड चेन नेटवर्क स्थापित होने से दूध की बर्बादी रुकेगी और वैल्यू एडेड उत्पादों के जरिए किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सकेगा।

ऐस इंटरनेशनल और केयरब्रो इनोवेटर्स करेंगी सबसे बड़ा निवेश

ट्रेड शो में मिले कुल प्रस्तावों में सबसे बड़ी हिस्सेदारी ऐस इंटरनेशनल लिमिटेड की ओर से सामने आई है। कंपनी के प्रतिनिधि आदित्य गोयल ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था और पारदर्शी प्रशासनिक तंत्र की सराहना करते हुए 457 करोड़ रुपये के भारी-भरकम निवेश का खाका पेश किया है। यह कंपनी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हाथरस, अलीगढ़ और आगरा जनपदों में अपने आधुनिक मिल्क प्रोसेसिंग और डेयरी प्लांट्स की स्थापना करेगी। अकेले इस परियोजना से 1,500 से अधिक कुशल और अकुशल स्थानीय युवाओं को रोजगार प्राप्त होगा।

वहीं, केयरब्रो इनोवेटर्स प्राइवेट लिमिटेड के अमित सिंह ने अवध, रुहेलखंड और पश्चिमांचल को केंद्र में रखकर 100 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्ताव दुग्धशाला विकास विभाग को सौंपा है। कंपनी अयोध्या, लखनऊ, मेरठ और बरेली जनपदों में अत्याधुनिक डेयरी इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करेगी, जिसके माध्यम से करीब 250 युवाओं को रोजगार से जोड़ा जाएगा। धार्मिक पर्यटन नगरी अयोध्या और राजधानी लखनऊ में इस निवेश से उच्च गुणवत्ता वाले दुग्ध उत्पादों की आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी।

इन 5 प्रमुख कंपनियों के निवेश से बदलेगी जिलों की तस्वीर

दुग्धशाला विकास विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, शीर्ष पांच कंपनियों के निवेश प्रस्ताव विभिन्न जिलों की औद्योगिक तस्वीर बदलने का काम करेंगे। इसमें मुरादाबाद, अमरोहा और रामपुर में अंजुम डेयरी 50 करोड़ रुपये का निवेश कर 40 युवाओं को रोजगार देगी। इसके अलावा, स्पोर्ट्स न्यूट्रिशन और हाई-प्रोटीन उत्पादों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए ग्विन व्हे प्रोटीन एलएलपी द्वारा 27 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। यह कंपनी एटा, फिरोजाबाद और इटावा जनपदों में अपनी यूनिट स्थापित करेगी, जिससे 250 युवाओं को आजीविका मिलेगी।

बुंदेलखंड के विकास को रफ्तार देने के लिए गौरी फूड एंड बेवरेजेज ने झांसी जनपद में 14.65 करोड़ रुपये का निवेश करने का निर्णय लिया है, जिससे 55 लोगों को सीधे रोजगार मिलेगा। शेष 17 छोटी-बड़ी डेयरी कंपनियां भी पूर्वांचल, मध्य यूपी और बुंदेलखंड के जनपदों में अपने चिलिंग प्लांट और कलेक्शन सेंटर शुरू करेंगी।

सिंगल विंडो सिस्टम से निवेशकों को मिली रफ्तार, धरातल पर उतरेंगी योजनाएं

उत्तर प्रदेश की दुग्ध आयुक्त धनलक्ष्मी के. ने बताया कि उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो में मिले 695.18 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों को तेजी से धरातल पर उतारने के लिए विभाग ने विशेष नोडल टीमें गठित कर दी हैं। निवेशकों को भूमि आवंटन, बिजली कनेक्शन और सरकारी सब्सिडी हासिल करने में कोई अड़चन न आए, इसके लिए 'निवेश सारथी' पोर्टल के माध्यम से सिंगल विंडो क्लियरेंस की सुविधा दी जा रही है।

ट्रेड शो के दौरान वित्त नियंत्रक अरविंद कुमार सिंह, मुख्य दुग्धशाला विकास अधिकारी एपी सिंह और दुग्धशाला विकास अधिकारी आईबी सिंह सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने निवेशकों को उत्तर प्रदेश दुग्ध नीति-2022 के तहत मिलने वाले वित्तीय प्रोत्साहनों, ब्याज उपादान (सब्सिडी) और स्टांप ड्यूटी में छूट के प्रावधानों से अवगत कराया। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यह केवल एक शुरुआत है; आने वाले महीनों में ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के माध्यम से इन सभी प्लांट्स का शिलान्यास कराकर निर्माण कार्य तेज गति से शुरू किया जाएगा, जिससे ग्रामीण अंचल में आर्थिक समृद्धि का नया दौर शुरू होगा।