पहले बंद कीं शराब दुकानें, अब खड़ी की ‘महिलाओं की पुलिस फोर्स’! तमिलनाडु में थलपति विजय सरकार का पहला महीना पूरा
तमिलनाडु की राजनीति में इतिहास रचने वाले मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली 'तमिलगा वेत्री कड़गम' (TVK) सरकार ने सत्ता में अपना सफल एक महीना पूरा कर लिया है। इस खास मौके पर सीएम विजय ने अपनी सबसे बड़ी चुनावी घोषणाओं में से एक 'सिंगप्पेन स्पेशल फोर्स' (SSF) को आधिकारिक तौर पर जमीन पर उतार दिया है। सरकार के इस कदम को राज्य में महिलाओं की सुरक्षा और रोजगार के मोर्चे पर एक बहुत बड़ा गेमचेंजर माना जा रहा है।
क्या है सिंगप्पेन स्पेशल फोर्स (SSF) और कैसे करेगी काम?
सिंगप्पेन स्पेशल फोर्स असल में महिलाओं और बच्चों की चौतरफा सुरक्षा के लिए तैयार की गई एक विशेष 'ऑल-विमेन' (पूरी तरह महिला) पुलिस विंग है। इस फोर्स का मुख्य जिम्मा सार्वजनिक जगहों पर महिलाओं को सुरक्षित माहौल देना, अपराधों को रोकना और उनके खिलाफ होने वाली किसी भी अप्रिय घटना पर क्विक एक्शन लेना है।
चेन्नई में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विजय ने बताया कि राज्य सरकार ने इस विशेष बल के लिए ₹354 करोड़ का भारी-भरकम बजट आवंटित किया है।
ड्रोन पेट्रोलिंग और 2,500 नई सरकारी नौकरियां
इस योजना की सबसे खास बात यह है कि इसके तहत केवल महिलाओं की भर्ती की जाएगी, जिससे राज्य में तत्काल 2,500 नई सरकारी नौकरियों के अवसर पैदा हुए हैं। इसके साथ ही, देश में पहली बार महिलाओं की सुरक्षा को हाईटेक बनाते हुए 'ड्रोन पेट्रोलिंग' की शुरुआत की जा रही है, जो इस स्पेशल फोर्स का मुख्य हथियार होगी। सीएम विजय ने साफ कहा कि महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों का सीधा कनेक्शन नशीले पदार्थों (ड्रग्स) से है, इसलिए यह फोर्स अपराधियों के साथ-साथ राज्य से ड्रग्स के नेटवर्क को उखाड़ फेंकने का काम भी करेगी।
शपथ लेते ही 10 मई को लिए थे ऐतिहासिक फैसले
थलपति विजय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही 10 मई को इस महत्वाकांक्षी योजना की फाइल पर हस्ताक्षर कर दिए थे। यह कदम 23 अप्रैल को आए उस ऐतिहासिक विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद उठाया गया था, जिसमें नवगठित TVK ने दशकों से राज कर रही सत्तारूढ़ DMK और मुख्य विपक्षी दल AIADMK को पछाड़कर तमिलनाडु की सत्ता पर कब्जा किया था। करीब 60 साल (छह दशक) के इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब किसी गैर-द्रविड़ दल ने तमिलनाडु में सरकार बनाई है।
"सच्चे धर्मनिरपेक्षता और सामाजिक न्याय का युग हुआ शुरू"
सत्ता संभालने के बाद अपने पहले ही भाषण में सीएम विजय ने घोषणा की थी कि तमिलनाडु में अब "सच्चे धर्मनिरपेक्षता और सामाजिक न्याय" के प्रति समर्पित शासन का नया दौर आ चुका है। उन्होंने अपनी पार्टी के नेताओं को सख्त हिदायत देते हुए कहा था कि सरकार के भीतर कोई दूसरा समानांतर पावर सेंटर नहीं चलेगा और ऐसी सोच रखने वाले उनसे दूर रहें। इसी दौरान उन्होंने दो और बड़े फैसले लागू किए, जिसमें राज्यभर में 717 शराब की दुकानों को बंद करना और आम जनता को 200 यूनिट मुफ्त बिजली देना शामिल था।
गठबंधन के मजबूत आंकड़ों के सहारे टिकी है विजय सरकार
तमिलनाडु की 234 सदस्यीय विधानसभा में थलपति विजय की पार्टी TVK ने अकेले 108 सीटों पर परचम लहराया था, जो बहुमत के जादुई आंकड़े से थोड़ा कम था। इसके बाद विजय ने सूझबूझ दिखाते हुए कांग्रेस, विदुथलाई चिरुथाइगल काची (VCK), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI), माकपा (CPI-M) और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के साथ मिलकर एक मजबूत गठबंधन सरकार बनाई। विधानसभा में फ्लोर टेस्ट के दौरान इस गठबंधन को कुल 144 विधायकों का समर्थन मिला। दिलचस्प बात यह रही कि AIADMK के 25 विधायकों ने भी सरकार के पक्ष में वोट किया, जिससे विपक्षी खेमे में फूट की अटकलें तेज हो गई हैं।
जनता-केंद्रित राजनीति बनाम विपक्ष का तीखा हमला
थलपति विजय लगातार अपनी सरकार को "जनता-केंद्रित और जन-कल्याणकारी" मॉडल के रूप में स्थापित कर रहे हैं। TVK की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, कोई भी राजनीतिक आंदोलन सिर्फ नारेबाज़ी के लिए नहीं बल्कि लोगों के जीवन में वास्तविक और जमीनी बदलाव लाने के लिए होना चाहिए।
दूसरी तरफ, तमिलनाडु की पारंपरिक द्रविड़ सियासत के बड़े दिग्गजों को विजय का यह उभार रास नहीं आ रहा है। बीते 7 जून को DMK प्रमुख एम.के. स्टालिन ने नया विवाद खड़ा करते हुए तंज कसा था कि थलपति विजय की यह सरकार 3 महीने से ज्यादा नहीं टिक पाएगी। हालांकि, चौतरफा घिरने के बाद मंगलवार को DMK ने सफाई देते हुए कहा कि स्टालिन का बयान सरकार गिराने की किसी साजिश की तरफ इशारा नहीं था, बल्कि वह महज एक सामान्य राजनीतिक टिप्पणी थी।