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September 30 2026 10:12 pm

UP Politics: पूर्व IAS दिव्या मित्तल और राजा भैया की तस्वीर पर सियासी घमासान, जानिए वायरल पोस्ट

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उत्तर प्रदेश कैडर की 2013 बैच की पूर्व चर्चित आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल के सक्रिय राजनीति में प्रवेश के ऐलान के बाद सूबे की सियासत में हलचल तेज हो गई है। प्रशासनिक सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेने के बाद जब उन्होंने उत्तर प्रदेश को अपनी राजनीतिक कर्मभूमि बनाने की घोषणा की, तो तमाम राजनीतिक दलों ने उन पर डोरे डालने शुरू कर दिए। जहां एक तरफ समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने उन्हें 'लाल और हरा गमछा' डालने का खुला ऑफर दिया, वहीं दूसरी तरफ कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ 'राजा भैया' की पार्टी जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) की ओर से आए एक सोशल मीडिया पोस्ट ने सियासी पारे को अचानक ऊपर चढ़ा दिया है।

इस पोस्ट में दिव्या मित्तल के 13 साल के प्रशासनिक अनुभव और राजा भैया के जमीनी रसूख को एक साथ जोड़कर 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले नए राजनीतिक समीकरण के संकेत दिए गए हैं।

राजा भैया की पार्टी के नेता ने क्या लिखा अपनी चर्चित पोस्ट में?

जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) के प्रदेश प्रधान महासचिव डॉ. बृजेश सिंह राजावत ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल 'एक्स' पर राजा भैया और दिव्या मित्तल की एक साथ तस्वीर साझा की। इस तस्वीर के साथ उन्होंने एक बेहद दिलचस्प और राजनीतिक संकेत देने वाला कैप्शन लिखा:

"क्या उत्तर प्रदेश में राजनीति का एक नया अध्याय शुरू होगा? जिस तरह पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल जी ने अपनी नई राजनीतिक पारी शुरू करने की घोषणा की है… राजनीति के कुरुक्षेत्र में स्वागत है, दिव्या मित्तल जी! IAS का अनुभव + राजा भैया जी की जमीनी पकड़ = क्या UP में नई दिशा की शुरुआत? इतिहास अवसर देता है, इबारत नेतृत्व लिखता है।"

यह पोस्ट सामने आते ही सोशल मीडिया से लेकर लखनऊ के सत्ता और विपक्षी गलियारों में चर्चाएं तेज हो गईं। राजनीतिक पंडित इस बात का विश्लेषण करने में जुट गए कि क्या राजा भैया की पार्टी दिव्या मित्तल को पूर्वांचल या अवध की किसी प्रमुख सीट से अपने मंच पर लाकर एक बड़ा दांव चलने की तैयारी में है।

दिव्या मित्तल का स्टैंड: 'अकेले चलूंगी, किसी दल का दामन नहीं थामूंगी'

राजा भैया की पार्टी की ओर से मिले इस खुले स्वागत और अखिलेश यादव के ऑफर के बीच, दिव्या मित्तल का रुख अब तक पूरी तरह स्पष्ट और स्वतंत्र नजर आ रहा है। अपने इस्तीफे के बाद जारी किए गए विस्तृत वीडियो संदेश में दिव्या मित्तल ने साफ लफ्जों में कहा था कि वह फिलहाल किसी भी राजनीतिक दल में शामिल नहीं होने जा रही हैं।

उन्होंने राजनीति में उतरने के अपने मकसद को स्पष्ट करते हुए कहा था कि उनका लक्ष्य सिर्फ चुनाव लड़ना या पद पाना नहीं, बल्कि आम जनता की उन समस्याओं की आवाज बनना है जो सरकारी दफ्तरों की फाइलों में दबकर रह जाती हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा, "मैं किसी पार्टी के साथ नहीं जुड़ूंगी, अकेले चलूंगी। मेरा मकसद राजनेता बदलना नहीं, बल्कि पूरी राजनीति की सोच को बदलना है।"

क्या हो सकता है दिव्या मित्तल का अगला कदम?

सियासी जानकारों के मुताबिक, दिव्या मित्तल के सामने वर्तमान में तीन मुख्य राजनीतिक रास्ते दिखाई दे रहे हैं:

पहला विकल्प यह है कि वह अपने घोषित स्टैंड पर कायम रहते हुए किसी राजनीतिक दल की छत्रछाया के बिना स्वतंत्र रूप से सामाजिक-राजनीतिक जनआंदोलन शुरू करें और निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जनता के बीच जाएं। मिर्जापुर, बस्ती और संतकबीरनगर जैसे जिलों में डीएम रहते हुए उनकी जो साफ-सुथरी और जनता से सीधे जुड़ने वाली छवि बनी है, वह उसकी बदौलत पूर्वांचल में एक नया जनाधार तैयार कर सकती हैं।

दूसरा विकल्प चुनावी रणनीति के तहत किसी क्षेत्रीय या समान विचारधारा वाले मंच के साथ रणनीतिक तालमेल का हो सकता है। उत्तर प्रदेश की जातीय और क्षेत्रीय राजनीति में किसी भी स्वतंत्र चेहरे के लिए बिना सांगठनिक ढांचे के चुनाव लड़ना आसान नहीं होता। राजा भैया के जनसत्ता दल का प्रतापगढ़, कौशाम्बी और आसपास के जिलों में मजबूत कैडर और जमीनी नेटवर्क है। यदि भविष्य में कोई औपचारिक बातचीत आगे बढ़ती है, तो प्रशासनिक सूझबूझ और जमीनी बाहुबल का यह मेल काफी प्रभावी साबित हो सकता है।

तीसरा पहलू यह है कि दिव्या मित्तल पहले पूरे उत्तर प्रदेश में जनसंवाद यात्राएं निकालें, बुनियादी मुद्दों (शिक्षा, स्वास्थ्य और राजस्व से जुड़े भूमि विवादों) पर जनता को लामबंद करें और चुनाव नजदीक आने पर अपने पत्ते खोलें। फिलहाल, उनके कदम ने यूपी की राजनीति में एक नया सस्पेंस जरूर पैदा कर दिया है।