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October 09 2026 06:54 pm

केंद्रीय व राज्य कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर, वित्त मंत्रालय ने तय की दरें

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नई दिल्ली। केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए दीपावली और त्योहारी सीजन से ठीक पहले भविष्य निधि (General Provident Fund - GPF) को लेकर वित्त मंत्रालय ने आधिकारिक स्थिति स्पष्ट कर दी है। केंद्रीय वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग (Department of Economic Affairs - DEA) ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 की तीसरी तिमाही यानी 1 अक्टूबर 2026 से 31 दिसंबर 2026 तक के लिए सामान्य भविष्य निधि और उससे जुड़ी अन्य समान भविष्य निधियों पर ब्याज दरों की अधिसूचना जारी कर दी है। सरकार ने इस तिमाही के लिए भी जीपीएफ पर मिलने वाले ब्याज को 7.1 प्रतिशत पर बरकरार रखा है। ब्याज दरों में कोई कटौती न होने से लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स को अपने रिटायरमेंट फंड पर सुरक्षित और स्थिर रिटर्न का भरोसा मिला है।

लगातार 7.1% पर स्थिर हैं ब्याज दरें: क्या कहता है नियम?

वित्त मंत्रालय द्वारा जारी गजट संकल्प के अनुसार, यह ब्याज दर उन सभी अभिदाताओं पर लागू होगी जिनका खाता विभिन्न सरकारी भविष्य निधि योजनाओं के अंतर्गत संचालित होता है।

अपरिवर्तित दरें: सरकार ने पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (PPF) और जीपीएफ की दरों को लंबे समय से एक समान 7.1% के स्तर पर स्थिर बनाए रखा है।

तिमाही समीक्षा प्रणाली: वित्त मंत्रालय हर वित्त वर्ष की प्रत्येक तिमाही के शुरू होने पर लघु बचत योजनाओं (Small Savings Schemes) और जीपीएफ की दरों की समीक्षा करता है। आर्थिक अनिश्चितताओं और मुद्रास्फीति के दबाव के बावजूद सरकार ने कर्मचारियों की सुरक्षित बचत पर रिटर्न में कोई कमी नहीं की है।

किन-किन फंड्स और कर्मियों पर लागू होगा यह फैसला?

यह आदेश केवल केंद्रीय कर्मचारियों के सामान्य जीपीएफ खाते तक ही सीमित नहीं है, बल्कि केंद्र सरकार के अधीन आने वाले कई अन्य विशेष भविष्य निधियों पर भी प्रभावी होगा:

जनरल प्रॉविडेंट फंड (केंद्रीय सेवाएं): सभी पात्र केंद्रीय असैन्य कर्मचारी।

रेलवे भविष्य निधि (State Railway Provident Fund): भारतीय रेलवे के लाखों गैर-एनपीएस कर्मचारी।

रक्षा सेवाएं भविष्य निधि (Defence Services Provident Fund): थलसेना, नौसेना और वायुसेना के संबंधित कार्मिक।

भारतीय आयुध कारखाना कर्मी भविष्य निधि: रक्षा निर्माण इकाइयों के तकनीकी व गैर-तकनीकी कर्मचारी।

अखिल भारतीय सेवा भविष्य निधि (All India Services Provident Fund): आईएएस, आईपीएस और आईएफओएस अधिकारी।

सशस्त्र बल कार्मिक भविष्य निधि: पैरामिलिट्री और सैन्य बलों के गैर-अंशदायी खाते।

राज्य कर्मचारियों को भी मिलेगा सीधा लाभ

केंद्र सरकार द्वारा घोषित जीपीएफ दरें सीधे तौर पर अधिकांश राज्य सरकारों (उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश आदि) के लिए बेंचमार्क का काम करती हैं।

केंद्र के संकल्प पत्र जारी होने के बाद राज्य सरकारों के वित्त विभाग भी इसी आधार पर अपने कर्मचारियों के जीपीएफ खातों के लिए 7.1% ब्याज दर का शासनादेश (GO) जारी करते हैं। इससे देश भर के लाखों राज्य कर्मचारियों और शिक्षकों के भविष्य निधि खातों में जमा पूंजी पर भी समान दर से तिमाही ब्याज की गणना सुनिश्चित होगी।

जीपीएफ कंट्रीब्यूशन और टैक्स से जुड़े अहम नियम

कर्मचारियों के लिए जीपीएफ में योगदान को लेकर कुछ निर्धारित वित्तीय सीमाएं भी प्रभावी हैं:

सालाना 5 लाख की सीमा: नियमों के तहत एक वित्तीय वर्ष में 5 लाख रुपये तक का जीपीएफ अंशदान पूरी तरह कर-मुक्त ब्याज (Tax-Free Interest) अर्जित करता है। यदि किसी कर्मचारी का वार्षिक अंशदान 5 लाख रुपये से अधिक होता है, तो अतिरिक्त राशि पर मिलने वाले ब्याज पर आयकर नियमों के तहत टीडीएस और टैक्स देय होता है।

सुरक्षित रिटायरमेंट प्लानिंग: शेयर बाजार की अस्थिरता से दूर, सॉवरेन गारंटी वाला 7.1% का यह ब्याज कर्मचारियों के लिए लंबी अवधि में एक मजबूत और जोखिम-मुक्त वित्तीय ढाल साबित होता है।