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September 16 2026 02:31 pm

हार्ट अटैक के बाद मानसिक तनाव बढ़ा सकता है दोबारा दौरे का खतरा

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India News Live,Digital Desk : दिल का दौरा पड़ने के बाद अक्सर लोग सिर्फ अपने शारीरिक स्वास्थ्य पर ध्यान देते हैं, लेकिन मानसिक स्वास्थ्य को नज़रअंदाज़ कर देते हैं। एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, हार्ट अटैक के बाद करीब 12 महीने तक रहने वाला मानसिक तनाव आगे चलकर दूसरे हृदय रोगों का खतरा लगभग 1.3 गुना तक बढ़ा सकता है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि जब किसी को दिल का दौरा पड़ता है तो उस समय शरीर ही नहीं, दिमाग भी बड़े बदलावों से गुजरता है। मस्तिष्क में हार्मोन और रसायनों का असंतुलन तनाव और अवसाद को बढ़ा सकता है। यही वजह है कि दिल की बीमारी के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल भी बेहद ज़रूरी हो जाती है।

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन की मानें तो दिल का दौरा झेलने वाले 33 से 50 प्रतिशत लोग किसी न किसी रूप में मनोवैज्ञानिक तनाव का अनुभव करते हैं। इसमें चिंता, अवसाद और कई बार PTSD (पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर) जैसी गंभीर स्थितियां भी देखने को मिलती हैं।

अध्ययन में यह भी सामने आया कि हार्ट अटैक के बाद दिल की मांसपेशियों में सूजन आ सकती है। यह मस्तिष्क पर असर डालकर अवसाद, चिंता और PTSD जैसे लक्षण पैदा कर सकता है। इतना ही नहीं, लंबे समय तक चलने वाला तनाव धमनियों को संकुचित कर देता है, रक्त प्रवाह को कम करता है और हृदय गति को असामान्य बना सकता है।

रिपोर्ट बताती है कि अगर यह तनाव लगातार बना रहे तो दोबारा दिल का दौरा पड़ने का खतरा 60% तक बढ़ सकता है। कई मामलों में मरीजों को अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद भी महीनों तक यह तनाव बना रहता है।

डॉक्टरों का मानना है कि ऐसी स्थिति में कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी, तनाव कम करने की तकनीकें और ज़रूरत पड़ने पर दवाओं का इस्तेमाल मरीजों के लिए मददगार साबित हो सकता है। इससे न सिर्फ मानसिक बोझ कम होता है, बल्कि जीवन की गुणवत्ता भी बेहतर होती है।