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September 12 2026 07:01 pm

अखिलेश के 'नीले रंग' के दांव पर भड़कीं मायावती, कांग्रेस को बताया 'डूबता जहाज'

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उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दलित और पिछड़े मतों को अपने पाले में खींचने की होड़ ने एक नए सियासी संग्राम को जन्म दे दिया है। समाजवादी पार्टी द्वारा पारंपरिक लाल-हरे झंडे और लाल टोपी के साथ अब बहुजन राजनीति के प्रतीक 'नीले रंग' को अपनाने पर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती का गुस्सा फूट पड़ा है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा समाजवादी छात्र सभा के कार्यकर्ताओं के लिए नीली टी-शर्ट, नीली शर्ट-पैंट का नया ड्रेस कोड लागू करने और खुद गले में नीला गमछा डालकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने पर मायावती ने तीखा हमला बोला है।

मायावती ने सपा के इस कदम को राजनीतिक नौटंकी और बहुजन समाज की आंखों में धूल झोंकने वाला चुनावी हथकंडा करार दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर सिलसिलेवार बयान जारी करते हुए कहा कि विरोधी दल दलितों और पिछड़ों के मुद्दों पर गिरगिट की तरह रंग बदलते रहते हैं। वे कहते कुछ हैं और सत्ता में आने पर ठीक इसके विपरीत आचरण करते हैं। मायावती ने दो टूक कहा कि केवल नीले कपड़े पहन लेने से या नीला गमछा डाल लेने से कोई अंबेडकरवादी नहीं बन जाता।

पीडीए का नारा महज छलावा: बहुजन समाज की एकमात्र हितैषी सिर्फ बीएसपी

अखिलेश यादव के चर्चित 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) नारे पर सीधा वार करते हुए बसपा सुप्रीमो ने कहा कि समाजवादी पार्टी का इतिहास हमेशा से दलित विरोधी रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि सपा शासनकाल में पदोन्नति में आरक्षण (Reservation in Promotion) का खुलेआम विरोध किया गया था और संत-महापुरुषों के नाम पर बने जिलों व संस्थानों के नाम बदले गए थे।

मायावती ने कहा कि आज जब चुनाव नजदीक आ रहे हैं, तो सपा मुखिया को अचानक बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर और नीले रंग की याद सताने लगी है। उन्होंने बहुजन समाज के लोगों को आगाह करते हुए कहा कि वे इस बनावटी दिखावे के बहकावे में न आएं। बहुजन समाज के स्वाभिमान, आत्मसम्मान और संवैधानिक अधिकारों की सच्ची लड़ाई केवल और केवल बहुजन समाज पार्टी ही लड़ रही है, जबकि बाकी दल सिर्फ वोटों की खातिर मुखौटा बदलते रहते हैं।

कांग्रेस को बताया 'डूबता जहाज': बसपा से निकाले गए नेताओं को लपकने पर बरसीं

सपा के साथ-साथ मायावती ने कांग्रेस पार्टी को भी जमकर खरी-खोटी सुनाई। दरअसल, हाल ही में बसपा से हटाए गए भतीजे आकाश आनंद और पार्टी से निकाले गए अन्य असंतुष्ट नेताओं को कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं द्वारा पार्टी में शामिल होने के न्योते दिए जा रहे थे। इस पर पलटवार करते हुए मायावती ने कांग्रेस पर करारा तंज कसा और उसे 'डूबता जहाज' करार दिया।

मायावती ने कहा कि कांग्रेस खुद अपने अस्तित्व की अंतिम सांसें गिन रही है और उसका अपना कोई जनाधार नहीं बचा है। ऐसे में कोई भी समझदार व्यक्ति उस डूबते जहाज पर सवार होकर अपना राजनीतिक भविष्य अंधकार में क्यों झोंकेगा? उन्होंने बाबा साहेब अंबेडकर का ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि बाबा साहेब ने अपने जीवनकाल में ही बहुजन समाज को कांग्रेस की दोगली नीतियों से हमेशा सतर्क और दूर रहने की सख्त हिदायत दी थी। आज वही कांग्रेस केवल छल-कपट के जरिए बहुजन आंदोलन को कमजोर करने की साजिश रच रही है।

'गद्दार और अवसरवादी किसी के सगे नहीं': निष्कासित नेताओं पर भी साधा निशाना

मायावती ने पार्टी से निकाले गए उन बागी नेताओं को भी कड़ा संदेश दिया जो निष्कासन के बाद दूसरी पार्टियों की गोद में जाकर बैठ रहे हैं या छोटे-छोटे संगठन खड़े कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बीएसपी से निकाले जाने वाले लोग इतने अवसरवादी होते हैं कि वे अपने निजी स्वार्थ के लिए बार-बार पार्टियां बदलते रहते हैं।

मायावती ने कहा कि ऐसे अवसरवादी चेहरे किसी भी पार्टी के वफादार नहीं हो सकते। विरोधी दल इन निष्कासित नेताओं को मोहरा बनाकर बहुजन समाज के वोटों को बांटने का खेल खेल रहे हैं, लेकिन प्रदेश की जागरूक जनता इन सियासी चालबाजियों को भली-भांति समझ चुकी है। बसपा प्रमुख के इस आक्रामक रुख ने साफ कर दिया है कि 2027 के महासमर से पहले यूपी में दलित वोट बैंक को लेकर सपा, कांग्रेस और बसपा के बीच यह त्रिकोणीय जुबानी जंग और भी भीषण रूप लेने वाली है।