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September 25 2026 10:43 am

'मुसलमान इस देश के बराबर के नागरिक, डरने की जरूरत नहीं': मस्जिदें और मदरसे गिराने पर जमीयत की आपात बैठक में बड़ा ऐलान

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देश भर के विभिन्न हिस्सों में मस्जिदों और मदरसों पर चल रही बुलडोजर कार्रवाई, धार्मिक स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों के कथित हनन के मुद्दों को लेकर प्रमुख मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने मोर्चा खोल दिया है। नई दिल्ली में संगठन के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी की अध्यक्षता में आयोजित राष्ट्रीय कार्यकारिणी की आपात बैठक में देश के मौजूदा हालात पर गहरा मंथन किया गया।

बैठक के बाद मौलाना महमूद मदनी ने दो टूक शब्दों में कहा कि देश के मुसलमानों को किसी भी सूरत में निराश होने या डरने की जरूरत नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत सबका साझा वतन है और मुसलमान इस देश में किसी दूसरे दर्जे के नहीं, बल्कि पूरी तरह से 'बराबर के नागरिक' हैं। जमीयत ने ऐलान किया कि धार्मिक स्थलों के ध्वस्तीकरण, मॉब लिंचिंग और पक्षपातपूर्ण सरकारी कार्रवाइयों के खिलाफ वे हर स्तर पर कानूनी और संवैधानिक लड़ाई लड़ेंगे।

मस्जिदों और मदरसों के ध्वस्तीकरण पर जमीयत का बड़ा ऐलान

जमीयत उलेमा-ए-हिंद की कार्यसमिति में देश के अलग-अलग राज्यों (उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान आदि) में इबादतगाहों, प्राचीन मस्जिदों और मदरसों को निशाना बनाए जाने पर गहरी चिंता और आक्रोश जताया गया। संगठन ने साफ किया कि अतिक्रमण और सुरक्षा के नाम पर एकतरफा कार्रवाई करते हुए ऐतिहासिक व धार्मिक ढांचों को गिराया जा रहा है।

बैठक में यह अहम निर्णय लिया गया कि:

राष्ट्रपति से करेंगे सीधे मुलाकात: जमीयत उलेमा-ए-हिंद का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने के लिए समय मांगेगा। राष्ट्रपति के समक्ष देश भर में हुई पक्षपातपूर्ण कार्रवाइयों, बुलडोजर एक्शन और धार्मिक स्थलों के ध्वस्तीकरण से प्रभावित लोगों के दस्तावेज व तथ्य रखे जाएंगे।

संवैधानिक और कानूनी मंचों पर आर-पार की लड़ाई: संगठन सुप्रीम कोर्ट, संबंधित हाईकोर्ट्स और कानूनी मंचों पर पूरी ताकत से पैरवी करेगा ताकि पूजा स्थल अधिनियम (Places of Worship Act, 1991) और संवैधानिक मर्यादाओं का सख्ती से पालन कराया जा सके।

अंतरराष्ट्रीय मंचों का रुख करने की चेतावनी: मौलाना मदनी ने यह भी कहा कि अगर प्रशासनिक मिलीभगत और न्यायिक प्रणाली की धीमी गति के कारण इंसाफ के सारे दरवाजे बंद नजर आएंगे, तो दुनिया के वैश्विक मंचों (यूएन आदि) तक अपनी आवाज पहुंचाने के विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है।

'प्रशासन का पक्षपाती रवैया देश के लिए खतरनाक' - मौलाना मदनी

प्रेस वार्ता और बैठक को संबोधित करते हुए मौलाना महमूद मदनी ने हुकूमत और प्रशासनिक मशीनरी के कार्यशैली पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से की जा रही एकतरफा कार्रवाइयों और स्थानीय प्रशासन के पक्षपातपूर्ण रवैये के कारण पीड़ित वर्ग के लिए कानूनी राहत पाने के रास्ते सीमित होते जा रहे हैं।

मदनी ने चिंता जताते हुए कहा, "देश के अलग-अलग कोनों से एकतरफा कार्रवाइयों की जो खबरें आ रही हैं, वे बेहद अफसोसजनक हैं। यदि किसी समाज का न्यायिक व्यवस्था से भरोसा डगमगाने लगे और किसी खास समुदाय को यह महसूस होने लगे कि मौजूदा व्यवस्था में उसके लिए कोई प्रभावी व निष्पक्ष रास्ता नहीं बचा है, तो यह स्थिति किसी भी लोकतांत्रिक समाज या देश के हित में कतई ठीक नहीं कही जा सकती।"

'संविधान ने हमें अधिकार दिए हैं, हम पीछे नहीं हटेंगे'

मुस्लिम समुदाय के भीतर पैदा हो रही असुरक्षा की भावना पर मौलाना महमूद मदनी ने कार्यकर्ताओं और अवाम को हौसला देते हुए कहा कि भारत का संविधान सर्वोपरि है और वह हर नागरिक को बराबरी का हक और धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देता है।

उन्होंने कहा कि अपने संवैधानिक अधिकारों की हिफाजत करना हर नागरिक का बुनियादी फर्ज है। जमीयत उन तमाम लोकतांत्रिक और कानूनी रास्तों का इस्तेमाल करेगी जो बाबा साहेब के संविधान ने देशवासियों को दिए हैं। मौलाना मदनी ने अपील की कि किसी भी उकसावे में आए बिना शांति, भाईचारा और कानून के दायरे में रहकर अपने वजूद और अधिकारों की यह लड़ाई लड़ी जाएगी।