यूपी विधानसभा चुनाव का पहला सर्वे; अवध और बुंदेलखंड में भाजपा गठबंधन की बंपर बढ़त, सपा-कांग्रेस अलायंस को झटका
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की औपचारिक तारीखों के ऐलान से पहले ही प्रदेश का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच चुका है। जहां एक तरफ समाजवादी पार्टी पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) यात्राओं के जरिए जमीन नाप रही है, वहीं भारतीय जनता पार्टी संगठन में बड़े फेरबदल कर अपनी किलेबंदी मजबूत करने में जुटी है। इसी बीच उत्तर प्रदेश का पहला व्यापक चुनावी ओपिनियन पोल (सर्वे) सामने आ गया है। इस पहले सर्वे में राज्य के दो सबसे अहम सियासी क्षेत्रों—अवध और बुंदेलखंड—की 130 विधानसभा सीटों के आंकड़े जारी किए गए हैं।
सर्वे के नतीजे यह साफ इशारा कर रहे हैं कि लोकसभा चुनाव 2024 के झटके से उबरते हुए भाजपा गठबंधन ने अवध और बुंदेलखंड में एक बार फिर जोरदार वापसी की है। कुल 130 सीटों में से भाजपा गठबंधन 87 सीटों पर मजबूत बढ़त बनाए हुए है, जबकि अखिलेश यादव और राहुल गांधी का सपा-कांग्रेस अलायंस 42 सीटों पर सिमटता दिख रहा है। वहीं, मायावती की बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के खाते में सिर्फ 1 सीट जाने का अनुमान जताया गया है।
130 सीटों का समग्र आंकड़ा: भाजपा का दबदबा बरकरार
उत्तर प्रदेश की कुल 403 विधानसभा सीटों में से पहले चरण में अवध और बुंदेलखंड क्षेत्र की कुल 130 सीटों पर जनता का मूड टटोला गया है।
| पार्टी / गठबंधन | अनुमानित सीटें |
|---|---|
| भाजपा गठबंधन (NDA) | 87 |
| सपा-कांग्रेस गठबंधन (INDIA) | 42 |
| बहुजन समाज पार्टी (BSP) | 01 |
| अन्य | 00 |
बुंदेलखंड: 19 में से 17 सीटों पर खिल रहा 'कमल'
सूखे, बीहड़ और पलायन की मार से जूझते रहे बुंदेलखंड क्षेत्र में भाजपा का जलवा पूरी तरह बरकरार नजर आ रहा है। बुंदेलखंड की कुल 19 विधानसभा सीटों पर सामने आए रुझानों के मुताबिक:
भाजपा गठबंधन: 17 सीटें
सपा अलायंस: 02 सीटें
बसपा / अन्य: 00 सीटें
सर्वे के अनुसार, झांसी जिले की सभी 4 विधानसभा सीटों पर भाजपा गठबंधन क्लीन स्वीप करता दिख रहा है। जालौन जिले की उरई, कालपी और माधौगढ़ सीटों पर भी भगवा दल आगे है। वहीं भगवान राम की तपोभूमि चित्रकूट की 2 सीटों में से 1 सीट भाजपा और 1 सीट सपा गठबंधन के खाते में जाती दिख रही है।
अवध क्षेत्र: राजधानी लखनऊ में सपा का खाता नहीं, हरदोई-उन्नाव में भगवा परचम
राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण अवध क्षेत्र की 111 सीटों पर भी भाजपा गठबंधन ने सपा अलायंस को काफी पीछे छोड़ दिया है। जिलेवार आंकड़ों पर नजर डालें तो:
राजधानी लखनऊ (9 सीटें): लखनऊ की सभी 9 विधानसभा सीटों पर भाजपा गठबंधन एकतरफा जीत दर्ज करता दिख रहा है। सर्वे के अनुसार, राजधानी में सपा का खाता भी नहीं खुलेगा।
हरदोई (8 सीटें): हरदोई जिले की सभी 8 सीटों पर भाजपा गठबंधन जीत हासिल कर सकता है।
उन्नाव (6 सीटें): उन्नाव की सभी 6 विधानसभा सीटों पर भाजपा अपनी बढ़त बनाए हुए है।
सीतापुर: सीतापुर की कुल सीटों में से 6 सीटें भाजपा गठबंधन और 3 सीटें सपा अलायंस के पाले में जा सकती हैं।
लखीमपुर खीरी: लखीमपुर में 6 सीटों पर भाजपा गठबंधन और 2 सीटों पर सपा गठबंधन के जीतने का अनुमान है।
बहराइच: तराई के बहराइच में भाजपा को 5 और सपा गठबंधन को 2 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है।
गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली में सपा गठबंधन का पलटवार
सर्वे में सपा और कांग्रेस अलायंस के लिए सबसे बड़ी राहत कांग्रेस के पारंपरिक गढ़ और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली से आई है।
रायबरेली जिले की 6 विधानसभा सीटों में से सपा गठबंधन 5 सीटों पर प्रचंड जीत हासिल करता दिख रहा है, जबकि यहां भाजपा को महज 1 सीट से ही संतोष करना पड़ सकता है। यह आंकड़ा साबित करता है कि गांधी परिवार और अखिलेश यादव का संयुक्त प्रभाव रायबरेली और उसके आसपास के ग्रामीण इलाकों में आज भी काफी मजबूत है।
क्या कहते हैं सियासी समीकरण?
इस पहले चुनावी सर्वे के नतीजों से साफ है कि भाजपा की 'डबल इंजन' सरकार की कानून-व्यवस्था, एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी और लाभार्थी योजनाओं का असर अवध और बुंदेलखंड के मतदाताओं पर बना हुआ है। हालांकि, रायबरेली और सीतापुर-लखीमपुर के कुछ ग्रामीण पॉकेट्स में सपा-कांग्रेस का पीडीए समीकरण भाजपा को कड़ी टक्कर दे रहा है।
वहीं, बहुजन समाज पार्टी का 130 सीटों में सिर्फ 1 सीट पर सिमटना मायावती की पार्टी के घटते जनाधार की ओर बड़ा संकेत करता है। आने वाले दिनों में पूर्वांचल और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के आंकड़े सामने आने के बाद ही सूबे की पूरी चुनावी तस्वीर साफ हो सकेगी।