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September 26 2026 08:01 am

180 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ी नई वंदे भारत, नागदा-कोटा रूट पर सफल हुआ स्पीड ट्रायल

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भारतीय रेलवे ने सेमी-हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के विस्तार की दिशा में एक और ऐतिहासिक मील का पत्थर हासिल किया है। मेक इन इंडिया पहल के तहत आधुनिक तकनीक से लैस नई 'वंदे भारत चेयर कार' ट्रेन ने 180 किलोमीटर प्रति घंटे की तूफानी रफ्तार से दौड़कर अपनी तकनीकी क्षमता का लोहा मनवाया है।

पश्चिम मध्य रेलवे (WCR) के अंतर्गत आने वाले नागदा-कोटा-सवाई माधोपुर रेलखंड पर अनुसंधान डिजाइन एवं मानक संगठन (RDSO) की देखरेख में आयोजित इस हाई-स्पीड ट्रायल के दौरान ट्रेन ने पूरी स्थिरता के साथ 180 किमी/घंटा की गति सीमा को छुआ। रायबरेली स्थित मॉडर्न कोच फैक्ट्री (MCF) में निर्मित इस नए रेक ने लोडेड स्थिति में अपने ऑसिलेशन टेस्ट को सफलतापूर्वक पास कर लिया है।

लोडेड कंडीशन में हुआ सफल परीक्षण, स्थिरता ने चौंकाया

रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, यह परीक्षण पूरी तरह वैज्ञानिक और तकनीकी मानकों पर आधारित था:

लोडेड ऑसिलेशन ट्रायल: ट्रेन के कोचों में निर्धारित वजन (यात्रियों के भार के बराबर) रखकर और एयर स्प्रिंग्स को सक्रिय रखकर यह ट्रायल किया गया।

राइडिंग क्वालिटी व स्टेबिलिटी: 180 किमी/घंटे की रफ्तार पर भी ट्रेन के अंदर कोई अस्वाभाविक कंपन (Vibration) महसूस नहीं हुआ, जिससे ट्रेन की उत्कृष्ट राइडिंग क्वालिटी और ट्रैक पर मजबूत पकड़ प्रमाणित हुई है।

सीमेंस प्रोपल्शन सिस्टम: इस नए रेक में सीमेंस (Siemens) का आधुनिक प्रोपल्शन सिस्टम और नॉर-ब्रेम्से (Knorr-Bremse) का एडवांस ब्रेकिंग सिस्टम लगाया गया है, जो हाई-स्पीड संचालन के दौरान बिजली की बचत और त्वरित नियंत्रण सुनिश्चित करता है।

आम यात्रियों के लिए दौड़ने से पहले अभी पास करने होंगे ये 3 बड़े टेस्ट

180 किमी/घंटे की गति का ट्रायल पूरा होना प्रक्रिया का एक चरण है। ट्रेन को नियमित कॉमर्शियल परिचालन के लिए आरडीएसओ (RDSO) से फाइनल स्पीड सर्टिफिकेट मिलने से पहले अभी निम्नलिखित परीक्षणों से गुजरना होगा:

खाली स्थिति में ऑसिलेशन ट्रायल (Empty-condition trial): बिना किसी अतिरिक्त भार के कोचों की स्थिरता और गति का आकलन।

कपलर फोर्स टेस्ट (Coupler Force Trial): अचानक तेजी पकड़ने (एक्सीलरेशन) या ब्रेक लगाने पर डिब्बों को जोड़ने वाले कपलर्स पर पड़ने वाले खिंचाव और दबाव की सघन जांच।

इमरजेंसी ब्रेकिंग ट्रायल: 160 किमी प्रति घंटे की अधिकतम परिचालन गति पर इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेन के रुकने की दूरी (Stopping Distance) और ब्रेकिंग रिस्पॉन्स को मापना।

इन सभी परीक्षणों से जुटाए गए डेटा का विश्लेषण करने के बाद ही आरडीएसओ अंतिम परिचालन प्रमाणपत्र जारी करेगा।

'कवच' और अत्याधुनिक तकनीक से लैस है नया रेक

यात्रियों की सुरक्षा और आधुनिक यात्रा अनुभव के लिए इस नए रेक में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं:

स्वदेशी कवच प्रणाली: ट्रेन में भारत का ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम 'कवच' (Kavach) इनबिल्ट है, जो सिग्नल जंपिंग या सामने से आ रही अन्य ट्रेन से आमने-सामने की टक्कर को खुद रोक लेता है।

रीजेनरेटिव ब्रेकिंग: ब्रेक लगाने के दौरान उत्पन्न होने वाली ऊर्जा वापस ग्रिड/इलेक्ट्रिकल सिस्टम में पहुंचती है, जिससे बिजली की भारी बचत होती है।

यात्री सुविधाएं: पूरे रेक में 360-डिग्री सीसीटीवी निगरानी, चालक दल से बातचीत के लिए टॉक-बैक यूनिट, आग का पता लगाने व स्वतः बुझाने वाले सिस्टम, सेंट्रली कंट्रोल्ड ऑटोमैटिक प्लग डोर और एग्जीक्यूटिव क्लास में रोटेटिंग सीटें शामिल हैं।

भारतीय रेलवे के इस सफल परीक्षण से यह स्पष्ट हो गया है कि आने वाले समय में देश के प्रमुख रूट्स पर यात्रा के समय में भारी कटौती होने जा रही है।