केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की लग सकती है लॉटरी! OROP और 5% इंक्रीमेंट समेत इन 5 बड़ी मांगों पर आया नया अपडेट

Post

नई दिल्ली : देशभर के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर बड़ी खबर सामने आ रही है। आयोग के गठन की सुगबुगाहट के बीच विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने अपनी मांगों की फेहरिस्त सरकार को सौंपनी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में रेलवे सीनियर सिटीजंस वेलफेयर सोसाइटी (RSCWS) ने कई ऐसे प्रस्ताव रखे हैं, जो अगर मंजूर हुए तो कर्मचारियों की सैलरी और पेंशनर्स की पेंशन में बंपर इजाफा देखने को मिल सकता है।

पेंशनर्स संगठन का कहना है कि मौजूदा आर्थिक हालातों और बेतहाशा बढ़ती महंगाई को देखते हुए अब पुराने फॉर्मूले में बदलाव का वक्त आ गया है।

नागरिक पेंशनर्स के लिए भी 'वन रैंक, वन पेंशन' (OROP) की मांग

रेलवे पेंशनर्स संगठन की सबसे प्रमुख और बड़ी मांग "वन रैंक, वन पेंशन" (OROP) व्यवस्था को लेकर है। अभी यह व्यवस्था मुख्य रूप से सशस्त्र बलों के लिए है, लेकिन RSCWS का तर्क है कि इसे नागरिक पेंशनर्स (Civilian Pensioners) पर भी लागू किया जाना चाहिए। इसका मतलब यह है कि समान पद और समान सेवा अवधि के बाद रिटायर होने वाले सभी कर्मचारियों को एक जैसी पेंशन मिलनी चाहिए, चाहे वे कभी भी रिटायर हुए हों। इससे पुराने और नए पेंशनर्स के बीच की आर्थिक खाई को पाटा जा सकेगा।

वार्षिक इंक्रीमेंट 3% से बढ़कर होगा 5%?

संगठन ने 8वें वेतन आयोग से सिफारिश की है कि वार्षिक वेतन वृद्धि (Annual Increment) की दर में बदलाव किया जाए। वर्तमान में यह दर 3% है, जिसे बढ़ाकर 5% करने का सुझाव दिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मूल वेतन (Basic Pay) में 5% की सालाना बढ़ोतरी होती है, तो इसका सीधा असर कर्मचारियों की ग्रेच्युटी, पेंशन और अन्य रिटायरमेंट लाभों पर पड़ेगा, जिससे उन्हें भविष्य में बड़ी वित्तीय सुरक्षा मिलेगी।

न्यूनतम वेतन और पेंशन में संशोधन का प्रस्ताव

महंगाई के मोर्चे पर राहत देने के लिए संगठन ने मांग की है कि न्यूनतम वेतन और पेंशन की समीक्षा 1 जनवरी 2026 की महंगाई दर के आधार पर की जाए। संगठन के मुताबिक, बढ़ती कीमतों ने कर्मचारियों और पेंशनर्स की 'परचेसिंग पावर' को कम कर दिया है। इसके अलावा, पेंशन कम्यूटेशन (Pension Commutation) की बहाली अवधि को मौजूदा 15 साल से घटाकर 10 से 12 साल करने की भी पुरजोर वकालत की गई है।

स्वास्थ्य सुविधाओं और कैशलेस इलाज पर जोर

केवल आर्थिक लाभ ही नहीं, बल्कि पेंशनर्स ने स्वास्थ्य सेवाओं में भी बड़े सुधार की मांग की है।

कैशलेस सुविधा: CGHS के तहत अधिक प्रतिष्ठित निजी अस्पतालों को जोड़ने और कैशलेस इलाज का विस्तार करने की मांग।

दवाओं की उपलब्धता: सरकारी अस्पतालों और डिस्पेंसरियों में आधुनिक दवाओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना।

सरल प्रक्रिया: मेडिकल बिल रिइम्बर्समेंट (Medical Bill Reimbursement) की प्रक्रिया को पेपरलेस और तेज बनाना।

ग्रेच्युटी और LTC नियमों में बदलाव की उम्मीद

संगठन ने लीव एनकैशमेंट (Leave Encashment) की सीमा बढ़ाने और ग्रेच्युटी (DCRG) की अधिकतम सीमा को महंगाई के अनुपात में समय-समय पर संशोधित करने का सुझाव दिया है। साथ ही, LTC नियमों को सरल बनाने और GPF पर बाजार के मुकाबले प्रतिस्पर्धी ब्याज दर देने की भी सिफारिश की गई है।

अब सबकी नजरें केंद्र सरकार के रुख पर हैं। यदि 8वां वेतन आयोग इन सिफारिशों को अपने ड्राफ्ट में शामिल करता है, तो यह 2026 के बाद केंद्रीय कर्मचारियों के लिए अब तक का सबसे बड़ा तोहफा साबित हो सकता है।