लद्दाख आंदोलन से भड़की लेह हिंसा, सोनम वांगचुक पर गंभीर आरोप
India News Live,Digital Desk : लद्दाख में हाल ही में भड़की हिंसा के बाद सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक मुश्किलों में घिरते नज़र आ रहे हैं। सरकार ने उनके संगठन स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख (SECMOL) का विदेशी फंडिंग (FCRA) लाइसेंस रद्द कर दिया है। आरोप है कि संगठन के खातों में कई वित्तीय अनियमितताएँ पाई गईं।
इसके अलावा, सीबीआई उनके दूसरे संगठन हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स लद्दाख (HIAL) के फंडिंग मामलों की भी जांच कर रही है।
लेह हिंसा में चार मौतें, दर्जनों घायल
लेह में हुए इस टकराव में चार लोगों की जान चली गई और करीब 89 लोग घायल हुए। केंद्र सरकार का कहना है कि हिंसा के पीछे वांगचुक के भड़काऊ भाषणों की बड़ी भूमिका रही। वहीं, दबाव बढ़ने पर वांगचुक ने चेतावनी दी कि अगर उन्हें गिरफ्तार किया गया तो हालात और बिगड़ सकते हैं।
विदेशी फंडिंग पर गंभीर आरोप
गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार:
संगठन के FCRA खाते में 3.5 लाख रुपये नकद जमा किए गए, जो नियमों का उल्लंघन है।
3.35 लाख रुपये विदेशी फंड से मिले, लेकिन खाते में दर्ज नहीं हुए।
4.93 लाख रुपये का दान स्वीडन से आया, जिसे जागरूकता अभियान में खर्च दिखाया गया, लेकिन मंत्रालय ने इसे संदिग्ध माना।
इन्हीं गड़बड़ियों को आधार बनाकर मंत्रालय ने SECMOL का लाइसेंस रद्द कर दिया।
आंदोलन और भूख हड़ताल से उपजा विवाद
लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग लंबे समय से उठ रही है। इसी को लेकर वांगचुक ने लेह में भूख हड़ताल शुरू की थी। लेकिन 10 सितंबर को यह आंदोलन हिंसक हो गया, जिसके बाद उन्होंने हड़ताल खत्म कर दी और गाँव लौट गए।
सरकार का कहना है कि हिंसा के पीछे सोनम वांगचुक की भूमिका रही, जबकि वांगचुक इसे सिरे से खारिज करते हैं। उनका आरोप है कि सरकार आंदोलन को दबाने के लिए उन्हें निशाना बना रही है।
वांगचुक का पलटवार
वांगचुक ने कहा कि सरकार उन्हें पब्लिक सेफ्टी एक्ट (PSA) के तहत जेल भेजना चाहती है। लेकिन उनका दावा है कि जेल में भी वे सरकार के लिए परेशानी खड़ी कर सकते हैं। उन्होंने साफ कहा कि उन्होंने किसी को हिंसा के लिए नहीं उकसाया और सरकार असल मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए उन पर आरोप लगा रही है।