करुणा के बिना कानून अत्याचार बनता है, कानून के बिना करुणा लाती है अराजकता : प्रधान न्यायाधीश
- by Priyanka Tiwari
- 2026-01-26 02:09:00
India News Live,Digital Desk : प्रधान न्यायाधीश डीवाई सूर्यकांत ने कहा कि करुणा के बिना कानून अत्याचार बन जाता है, वहीं कानून के बिना करुणा अराजकता पैदा करती है। उन्होंने यह विचार गोवा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के 30 दिन के विशेष जागरूकता अभियान के समापन समारोह में व्यक्त किए।
नशीले पदार्थ केवल आपराधिक समस्या नहीं
सीजेआई सूर्यकांत ने मादक पदार्थों के दुरुपयोग को केवल अपराध नहीं बल्कि सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और चिकित्सकीय समस्या बताया। उनका कहना था कि इसके समाधान के लिए प्रतिशोध नहीं बल्कि परामर्श और जागरूकता जरूरी है। उन्होंने अभियान की सफलता की सराहना की और कहा कि नशीले पदार्थ चुपचाप हमारे घरों, स्कूलों और समाज में प्रवेश कर भविष्य को प्रभावित करते हैं।
न्याय में निरंतरता और परिवर्तन का संतुलन
प्रधान न्यायाधीश ने न्याय प्रणाली को जीवंत संस्था बताते हुए कहा कि इसे निरंतरता और परिवर्तन के बीच संतुलन बनाए रखना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि कानून को न तो बदलाव का विरोध करना चाहिए और न ही हर नए परिवर्तन को बिना सोचे-समझे अपनाना चाहिए।
न्याय और नैतिकता का महत्व
सूर्यकांत ने कहा कि प्रत्येक विधि प्रणाली सदियों की संघर्ष और नैतिक साहस का परिणाम है। उन्होंने न्याय के मूल सिद्धांतों पर कायम रहने की चुनौती को उजागर किया और कहा कि न्याय केवल सामूहिक अनुशासन और सेवा के जरिए समय की कसौटी पर खरा उतर सकता है।