Kashi Vishwanath Temple: चंद्रग्रहण के चलते 3 मार्च को बंद रहेंगे कपाट; जानें बाबा के दर्शन की नई टाइमिंग और सूतक नियम
India News Live,Digital Desk : फाल्गुन पूर्णिमा (3 मार्च, मंगलवार) को लगने वाले खंड चंद्रग्रहण का असर धर्म नगरी काशी के मंदिरों पर भी देखने को मिलेगा। शास्त्रों के अनुसार ग्रहण काल में देव विग्रहों (मूर्तियों) का स्पर्श वर्जित होता है, जिसके चलते विश्व प्रसिद्ध श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर सहित वाराणसी के तमाम प्रमुख शिवालयों के गर्भगृह के कपाट ग्रहण से पूर्व ही बंद कर दिए जाएंगे।
श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर: दर्शन का नया शेड्यूल
श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) विश्व भूषण मिश्र ने बताया कि इस बार चंद्रग्रहण 'ग्रस्तोदित' होगा (चंद्रमा उदय के समय से ही ग्रहण युक्त रहेगा)। मंदिर की परंपरा के अनुसार, ग्रहण के डेढ़ घंटे पूर्व ही कपाट बंद कर दिए जाते हैं।
कपाट बंद होने का समय: शाम 4:30 बजे
ग्रहण मोक्ष (समाप्ति): शाम 6:48 बजे
साफ-सफाई और शुद्धिकरण: शाम 6:48 से 7:15 बजे तक
श्रद्धालुओं के लिए पुनः खुलने का समय: शाम 7:15 बजे
मार्कंडेय महादेव और अन्य मंदिर
कैथी स्थित प्रसिद्ध मार्कंडेय महादेव मंदिर के पुजारी संतोष गिरी ने बताया कि वहां व्यवस्था और भी पहले लागू होगी:
कपाट बंद: दोपहर 2:00 बजे से ही
पुनः खुलेंगे: शाम 7:00 बजे (सूतक समाप्ति और शुद्धिकरण के बाद)
श्रद्धालुओं के लिए विशेष निर्देश (सूतक काल)
ज्योतिषीय और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण के दौरान मंदिर परिसर में कुछ विशेष नियमों का पालन करना अनिवार्य है:
मानसिक जप: मंदिर के कपाट बंद रहने के दौरान श्रद्धालु परिसर में बैठकर भगवान शिव के पंचाक्षरी मंत्र या अन्य मंत्रों का मानसिक जप कर सकते हैं।
स्पर्श वर्जित: ग्रहण काल में मूर्तियों को छूना या पूजा करना वर्जित है।
शुद्धिकरण: ग्रहण समाप्त होने के बाद पूरे मंदिर और गर्भगृह को गंगाजल से धोया जाएगा और बाबा का विशेष स्नान-श्रृंगार होगा, जिसके बाद ही आम जनता को प्रवेश मिलेगा।
ग्रहण का समय (काशी में)
वैसे तो खगोलीय दृष्टि से ग्रहण दोपहर 3:20 बजे शुरू हो जाएगा, लेकिन काशी में चंद्रमा का उदय शाम 5:58 बजे होगा, इसलिए धार्मिक अनुष्ठान चंद्रोदय के समय के अनुसार ही निर्धारित किए गए हैं।