'मिसकैरिज ऑफ जस्टिस' हो जाएगा... केजरीवाल की दलील पर भड़कीं जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा, सुरक्षित फैसले का समय बदला
India News Live,Digital Desk : दिल्ली के कथित शराब घोटाला मामले में सोमवार को दिल्ली हाई कोर्ट में उस वक्त माहौल गरमा गया, जब पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत में खुद पैरवी करते हुए 'न्याय की विफलता' (Miscarriage of Justice) का हवाला दिया। केजरीवाल की दलीलों और सीबीआई के कड़े रुख के बीच, जस्टिस शर्मा ने नियमों की याद दिलाते हुए केजरीवाल के जवाब को रिकॉर्ड पर तो ले लिया, लेकिन तल्ख टिप्पणी भी की। इस नाटकीय घटनाक्रम के कारण कोर्ट को अपना सुरक्षित फैसला दो घंटे के लिए टालना पड़ा।
केजरीवाल की दलील और जज की आपत्ति
सुनवाई के दौरान अरविंद केजरीवाल ने कोर्ट से गुहार लगाई कि सीबीआई के जवाब पर उनका प्रत्युत्तर (Rejoinder) स्वीकार किया जाए। उन्होंने कहा, "मैम, अगर हमारा रिजॉइंडर रिकॉर्ड पर नहीं लिया गया, तो यह 'मिसकैरिज ऑफ जस्टिस' होगा।" इस पर जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कड़ी आपत्ति जताते हुए उन्हें टोक दिया। जज ने कहा, "आपको बार-बार यह नहीं कहना चाहिए कि न्याय की विफलता हो जाएगी। अदालत ने पहले ही प्रक्रिया से बाहर जाकर आपका हलफनामा स्वीकार किया है। आपको रजिस्ट्री के नियमों का पालन करना होगा।"
विशेष छूट के साथ बदला फैसले का वक्त
जस्टिस शर्मा ने स्पष्ट किया कि रजिस्ट्री ने केजरीवाल की याचिका इसलिए स्वीकार नहीं की क्योंकि वह स्वयं अपनी पैरवी कर रहे हैं और इसके लिए पहले कोर्ट से मंजूरी लेना आवश्यक है। जज ने कहा, "यह कोई असाधारण केस नहीं है, लेकिन चूंकि आप पक्षपात का आरोप लगा रहे हैं, इसलिए मैं आपके जवाब को लिखित दलीलों के रूप में रिकॉर्ड पर ले रही हूं।" इस नए घटनाक्रम के कारण, जो फैसला दोपहर 2:30 बजे सुनाया जाना था, उसे अब शाम 4:30 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया है।
पक्षपात के आरोपों पर सीबीआई को घेरा
केजरीवाल ने अपने रिजॉइंडर में सीबीआई पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच एजेंसी डर का माहौल पैदा करने और अपमानजनक आरोप लगाने का सहारा ले रही है। केजरीवाल ने सवाल उठाया कि सीबीआई ने जस्टिस शर्मा के बच्चों के सरकारी पैनल में होने के चलते संभावित पक्षपात के दावों पर चुप्पी क्यों साधी है? उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सीबीआई इस मामले को केवल एक विशेष जज से ही सुलझवाना चाहती है, जो न्यायपालिका की छवि के लिए ठीक नहीं है।
न्यायपालिका को घसीटने की कोशिश?
पूर्व मुख्यमंत्री ने सीबीआई के उस तर्क का भी खंडन किया जिसमें कहा गया था कि यदि केजरीवाल की दलीलों को मान लिया जाए, तो देश के सभी जज अयोग्य हो जाएंगे। केजरीवाल ने इसे विवाद को अनावश्यक रूप से बढ़ाने और पूरी न्यायपालिका को मामले में घसीटने की कोशिश करार दिया। उन्होंने साफ किया कि सीबीआई ने खुद माना है कि जस्टिस शर्मा के परिवार और केंद्र सरकार की कानूनी व्यवस्था के बीच सक्रिय व्यावसायिक संबंध हैं, जो उनके मामले की निष्पक्ष सुनवाई पर सवाल खड़े करते हैं।