'घुसपैठियों को लात मारकर भगाऊंगा, किसी से डरता नहीं': हिमंत बिस्वा सरमा के बिगड़े बोल, ममता पर बरसे असम के CM
India News Live,Digital Desk : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के रण में जुबानी जंग अब अपने चरम पर पहुंच गई है। असम के मुख्यमंत्री और भाजपा के फायरब्रांड नेता हिमंत बिस्वा सरमा ने बंगाल की धरती से एक ऐसा विवादित बयान दिया है, जिसने सियासी गलियारों में भूचाल ला दिया है। कूचबिहार में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए सरमा ने सीधे तौर पर बांग्लादेशी घुसपैठियों को चेतावनी दी और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का गंभीर आरोप लगाया।
"असम से भगाता हूं, बंगाल से फिर घुस आते हैं"
असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने अपने आक्रामक अंदाज में कहा कि बंगाल की सीमाएं बांग्लादेशी घुसपैठियों के लिए खुली हुई हैं। उन्होंने कहा, "ममता बनर्जी ने सीमाओं को खुला छोड़ रखा है। हर दिन बांग्लादेशी मुसलमान सीमा पार कर रहे हैं। मैं उन्हें असम से लात मारकर भगाता हूं, लेकिन वे फिर से बंगाल के रास्ते घुस आते हैं। मैं साफ कह देना चाहता हूं कि मैं किसी से डरता नहीं हूं और जितने भी बांग्लादेशी मुसलमान हैं, उन्हें लात मारकर बाहर निकालूंगा।" उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर भारत को घुसपैठ मुक्त बनाना है, तो बंगाल में भाजपा की सरकार जरूरी है।
ममता बनर्जी पर बंगाल को 'बर्बाद' करने का आरोप
हिमंत सरमा यहीं नहीं रुके, उन्होंने ममता बनर्जी पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि उनके मुख्यमंत्री रहते बंगाल पूरी तरह बर्बाद हो चुका है। उन्होंने आगाह किया कि यदि ममता को सत्ता से नहीं हटाया गया, तो एक दिन बांग्लादेशी घुसपैठिये बंगाल को मूल निवासियों से छीन लेंगे। उन्होंने उत्तर बंगाल के विकास की उपेक्षा का मुद्दा भी उठाया और वादा किया कि भाजपा की सरकार आते ही इस क्षेत्र से सभी अवैध प्रवासियों को बाहर कर दिया जाएगा। साथ ही, उन्होंने गोरखालैंड मुद्दे के 'संवैधानिक समाधान' का भी आश्वासन दिया।
भड़की टीएमसी पहुंची चुनाव आयोग, दर्ज कराई शिकायत
हिमंत बिस्वा सरमा के इन बयानों पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने कड़ी आपत्ति जताई है। टीएमसी ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पत्र लिखकर सरमा के खिलाफ आचार संहिता (MCC) के उल्लंघन की शिकायत दर्ज कराई है। पार्टी का आरोप है कि भाजपा नेता ने ध्रुवीकरण करने वाले, भड़काऊ और आपराधिक रूप से धमकी भरे बयान दिए हैं। टीएमसी के मुताबिक, यह न केवल मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मानहानि है, बल्कि बंगाल की सांप्रदायिक शांति को भंग करने की एक सोची-समझी साजिश भी है।
क्या सांप्रदायिक तनाव की ओर बढ़ रहा है चुनाव?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हिमंत बिस्वा सरमा के इस बयान से बंगाल चुनाव का रुख पूरी तरह ध्रुवीकरण की ओर मुड़ सकता है। टीएमसी ने अपनी शिकायत में दावा किया है कि इस तरह की टिप्पणियां सुप्रीम कोर्ट के उन निर्देशों का उल्लंघन हैं, जिनमें चुनाव प्रचार के दौरान धर्म और नफरत भरे भाषणों से बचने की सलाह दी गई है। अब गेंद चुनाव आयोग के पाले में है कि वह इस 'हाई-वोल्टेज' विवाद पर क्या कदम उठाता है।