Japan China Tensions: जापान के नए डिफेंस व्हाइट पेपर से भड़का ड्रैगन! चीन को बताया सबसे बड़ा खतरा तो बौखलाया बीजिंग
एशियाई महाद्वीप में दो बड़ी आर्थिक और सामरिक ताकतों—जापान और चीन—के बीच एक बार फिर तनाव गहराता हुआ नजर आ रहा है। जापान के हालिया डिफेंस व्हाइट पेपर (Defense White Paper) में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों को देश के लिए सबसे बड़ी रणनीतिक चुनौती बताए जाने और ताइवान के मुद्दे पर की गई टिप्पणियों के बाद चीन बुरी तरह भड़क गया है। बीजिंग ने टोक्यो के इस कदम की कड़ी निंदा करते हुए इसे अपने आंतरिक मामलों में सीधा दखल करार दिया है, जिससे दोनों पड़ोसी देशों के बीच कूटनीतिक मोर्चे पर एक नई जंग छिड़ गई है।
चीन ने जापान के डिफेंस व्हाइट पेपर को किया पूरी तरह खारिज
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जिंग ने इस मामले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जापान के इस नए रक्षा दस्तावेज में एक बार फिर से बेबुनियाद और झूठे आरोपों के सहारे चीन को निशाना बनाया गया है। उन्होंने कहा कि इसमें बार-बार पुराने और मनगढ़ंत 'चीन के खतरे' (China Threat) वाले राग को दोहराया गया है। इसके अलावा, ताइवान को लेकर की गई टिप्पणियों को चीन के आंतरिक मामलों में भारी हस्तक्षेप बताते हुए बीजिंग ने आधिकारिक तौर पर जापान के सामने अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है और इस नीति को पूरी तरह से खारिज कर दिया है।
ताइवान के मुद्दे पर चीन की दो टूक, कहा- हस्तक्षेप का अधिकार नहीं
अपने ऊपर लग रहे अंतरराष्ट्रीय दबाव और सैन्य गतिविधियों को लेकर सफाई देते हुए चीनी प्रवक्ता लिन जिंग ने ताइवान के आसपास चल रहे अपने सैन्य अभ्यासों का पुरजोर बचाव किया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि ताइवान का मुद्दा पूरी तरह से चीन का अंदरूनी मामला है और इसे किस तरह से सुलझाया जाना चाहिए, यह पूरी तरह से चीन के लोगों का अपना आंतरिक विषय है। चीन ने चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि जापान को इस संवेदनशील मामले में किसी भी तरह की दखलअंदाजी करने का कोई नैतिक या राजनीतिक अधिकार नहीं है।
लगभग 600 पन्नों के दस्तावेज में छिपी है जापान की बड़ी रणनीति
दूसरी ओर, जापान की कैबिनेट द्वारा हाल ही में मंजूर किए गए इस लगभग 600 पन्नों के व्यापक डिफेंस व्हाइट पेपर में इंडो-पैसिफिक (Indo-Pacific) क्षेत्र के तेजी से बदलते और बेहद अस्थिर सुरक्षा माहौल का बारीक आकलन किया गया है। जापानी रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी ने इस दस्तावेज के जरिए देश की जनता को आगाह करते हुए कहा है कि क्षेत्र में चीन की बढ़ती आक्रामक सैन्य गतिविधियां टोक्यो के लिए सबसे बड़ी रणनीतिक चिंता का विषय बन चुकी हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस चुनौती से निपटने के लिए जापान को अपनी समग्र राष्ट्रीय रक्षा ताकत बढ़ाने के साथ-साथ दुनिया के अन्य समान विचारधारा वाले देशों और अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर मजबूत रणनीतिक साझेदारी तैयार करने की सख्त जरूरत है।