इजरायल और UAE का ऐतिहासिक रक्षा समझौता: पहली बार किसी अरब देश की धरती पर तैनात हुए इजरायली सैनिक और 'आयरन बीम'
India News Live,Digital Desk : मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) की राजनीति में एक ऐसा मोड़ आया है जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। ईरान के बढ़ते खतरों के बीच, इजरायल ने अपनी सबसे सुरक्षित और गुप्त सैन्य तकनीक 'आयरन बीम' (Iron Beam) को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की सुरक्षा के लिए तैनात कर दिया है। यह न केवल हथियारों का सौदा है, बल्कि इतिहास में पहली बार है जब इजरायली सैनिक किसी मुस्लिम देश की सुरक्षा के लिए वहां की जमीन पर मौजूद हैं।
UAE के लिए इजरायल का 'त्रिकोणीय' सुरक्षा कवच
ईरान द्वारा दागे गए मिसाइलों और ड्रोन्स से निपटने के लिए इजरायल ने UAE को एक अभूतपूर्व डिफेंस शील्ड प्रदान की है, जिसमें तीन मुख्य प्रणालियाँ शामिल हैं:
आयरन बीम (लेजर डिफेंस): यह दुनिया की पहली हाई-एनर्जी लेजर प्रणाली है। यह रॉकेट और ड्रोन्स को महज 4-5 सेकंड में लेजर बीम से जलाकर राख कर देती है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि एक लेजर फायर की लागत महज कुछ डॉलर होती है, जबकि मिसाइल इंटरसेप्टर करोड़ों के होते हैं।
आयरन डोम (Iron Dome): दुनिया की सबसे सफल शॉर्ट-रेंज मिसाइल डिफेंस प्रणाली, जो रॉकेट हमलों को 90% से ज्यादा सटीकता के साथ हवा में ही नष्ट कर देती है।
स्पेक्ट्रो निगरानी सिस्टम: यह रडार तकनीक विशेष रूप से ईरान के 'शाहेद' जैसे छोटे और घातक ड्रोन्स को 20 किलोमीटर दूर से ही पहचान लेती है।
इजरायली सैनिकों की 'बूट्स ऑन ग्राउंड' तैनाती
इस समझौते की सबसे बड़ी हाईलाइट हथियारों के साथ-साथ इजरायली सैन्य कर्मियों की मौजूदगी है। दर्जनों इजरायली विशेषज्ञ इन प्रणालियों को संचालित करने और स्थानीय सुरक्षा बलों को प्रशिक्षित करने के लिए UAE में तैनात किए गए हैं। इसके अलावा, इजरायल अब ईरान से होने वाले किसी भी मिसाइल लॉन्च की रियल-टाइम खुफिया जानकारी (Intelligence) सीधे UAE के साथ साझा कर रहा है।
क्यों मजबूरी में उठाने पड़े ये कदम?
हाल के महीनों में ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष के दौरान UAE को भारी कीमत चुकानी पड़ी थी। रिपोर्टों के अनुसार:
ईरान ने UAE पर करीब 500 बैलिस्टिक मिसाइलें और 2000 से ज्यादा ड्रोन दागे थे।
हालात इतने आपातकालीन थे कि इजरायल ने अपने वे हथियार (प्रोटोटाइप) भी भेज दिए जिनका अभी परीक्षण ही चल रहा था।
बदलते समीकरण: 'साझा दुश्मन' के खिलाफ एकजुट
यह रक्षा समझौता 2020 के अब्राहम एकॉर्ड्स का सबसे परिपक्व परिणाम माना जा रहा है। इजरायल द्वारा अपनी सबसे संवेदनशील तकनीक एक अरब देश को देना यह दर्शाता है कि अब पुरानी कड़वाहट पीछे छूट चुकी है और दोनों देश ईरान को एक 'साझा दुश्मन' के रूप में देख रहे हैं।
इस तैनाती ने ईरान को कड़ा संदेश दिया है कि खाड़ी क्षेत्र में अब इजरायल की पहुंच केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि सैन्य रूप से भी मजबूत हो चुकी है। यह नया 'रक्षा मोर्चा' भविष्य में मिडिल ईस्ट की सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से बदलने वाला साबित होगा।