कहीं आपकी बर्बादी के पीछे शनि की टेढ़ी नजर तो नहीं? इन संकेतों से पहचानें साढ़े साती का असर और जानें अचूक रामबाण उपाय...
India News Live,Digital Desk : ज्योतिष शास्त्र में शनि देव को न्याय का देवता और कर्मफल दाता माना गया है। जब भी शनि की साढ़े साती (Shani ki Sadesati) का जिक्र आता है, तो अच्छे-अच्छों के मन में डर बैठ जाता है। साढ़े साती का नाम सुनते ही लोग इसे केवल कष्टों और परेशानियों का काल मान लेते हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि शनि देव व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं। यदि आपके जीवन में अचानक से बाधाएं आने लगी हैं और बना-बनाया काम बिगड़ने लगा है, तो सावधान हो जाइए। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, ये लक्षण इस बात का स्पष्ट संकेत हो सकते हैं कि आपके ऊपर शनि की साढ़े साती का प्रभाव शुरू हो चुका है।
कैसे पहचानें कि आप पर है शनि की साढ़े साती का प्रभाव
शनि जब भी किसी राशि में प्रवेश करते हैं, तो उससे पहले ही अपने आगमन के संकेत देने लगते हैं। यदि आपके घर में पालतू जानवर की अचानक मृत्यु हो जाए, घर के मुख्य द्वार पर लोहे की वस्तुएं खराब होने लगें या आपके जूते-चप्पल बार-बार टूटने लगें, तो समझ लें कि शनि का प्रकोप शुरू हो गया है। इसके अलावा, मानसिक तनाव का बढ़ना, अकारण कलह, कार्यक्षेत्र में अपमान और आर्थिक तंगी का सामना करना भी साढ़े साती के प्रमुख लक्षण हैं। यदि आपको रात में डरावने सपने आते हैं या पैरों में लगातार दर्द बना रहता है, तो यह शनि की भारी दशा की ओर इशारा करता है।
साढ़े साती के तीन चरण और उनका असर
शनि की साढ़े साती के कुल तीन चरण होते हैं, जिनमें से प्रत्येक का प्रभाव अलग-अलग होता है। प्रथम चरण में जातक को मानसिक कष्ट और आर्थिक हानि उठानी पड़ती है। दूसरा चरण सबसे कष्टकारी माना जाता है, जिसमें शारीरिक बीमारियां और पारिवारिक कलह चरम पर होती है। वहीं तीसरे चरण में शनि देव जाते-जाते व्यक्ति को उसकी गलतियों का अहसास कराते हैं और संघर्ष के बाद राहत प्रदान करते हैं। ज्योतिषियों का मानना है कि यदि व्यक्ति का आचरण शुद्ध हो और वह गरीबों की मदद करता हो, तो शनि देव उसे दंड देने के बजाय शुभ फल भी प्रदान करते हैं।
शनि के प्रकोप से बचने के रामबाण और अचूक उपाय
अगर आप शनि की साढ़े साती के कष्टों से जूझ रहे हैं, तो कुछ विशेष धार्मिक उपाय आपके लिए सुरक्षा कवच का काम कर सकते हैं। प्रत्येक शनिवार को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना और 'ॐ शं शनैश्चराय नमः' मंत्र का जाप करना सबसे फलदायी माना गया है। इसके साथ ही शनिवार के दिन काली उड़द, काला तिल, लोहा और काले कपड़ों का दान करने से शनि देव की क्रूर दृष्टि कम होती है। हनुमान चालीसा का नियमित पाठ करना भी शनि दोष से मुक्ति का रामबाण उपाय है, क्योंकि शास्त्रों के अनुसार हनुमान जी के भक्तों को शनि देव कभी परेशान नहीं करते। मांस-मदिरा का त्याग और असहाय लोगों की सेवा करने से भी शनि की साढ़े साती का प्रभाव काफी हद तक कम हो जाता है।