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July 16 2026 06:44 am

Iran's fierce counterattack : मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भारी तबाही, सैटेलाइट तस्वीरों ने खोली पोल

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India News Live,Digital Desk : मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग अब बेहद खतरनाक मोड़ पर आ गई है। ईरान ने अपने सर्वोच्च नेता की मौत का बदला लेते हुए अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भीषण जवाबी हमला किया है। प्लैनेट और एयरबस (Planet and Airbus) की ताजा सैटेलाइट तस्वीरों ने खुलासा किया है कि ईरान के मिसाइल हमलों ने खाड़ी देशों में स्थित अमेरिका के अभेद्य माने जाने वाले सैन्य अड्डों को खंडहर में तब्दील कर दिया है। बहरीन से लेकर कुवैत और यूएई तक फैले अमेरिकी बेस इस समय धधक रहे हैं।

बहरीन में फिफ्थ फ्लीट का मुख्यालय तबाह, संचार व्यवस्था ठप

ईरान के निशाने पर सबसे पहले बहरीन की राजधानी मनामा में स्थित अमेरिकी नौसेना का फिफ्थ फ्लीट मुख्यालय रहा। सैटेलाइट इमेजरी से साफ पता चलता है कि यहां स्थित दो बेहद महत्वपूर्ण सैटेलाइट कम्युनिकेशन टर्मिनल पूरी तरह जमींदोज हो गए हैं। यह मुख्यालय पूरे क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना की गतिविधियों का कंट्रोल रूम माना जाता है। इन टर्मिनल्स के नष्ट होने से अमेरिकी सेना का क्षेत्रीय संपर्क और रडार सूचना तंत्र बुरी तरह प्रभावित हुआ है। हमले के बाद पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी गई है।

कुवैत और इराक के एयर बेस पर बरसीं मिसाइलें

ईरानी हमलों का कहर सिर्फ बहरीन तक सीमित नहीं रहा। कुवैत स्थित अली अल सलेम एयर बेस और कैंप आरिफजान में भारी तबाही की खबरें हैं। तस्वीरों में सैन्य साजो-सामान और बड़े ढांचों को मलबे में तब्दील होते देखा जा सकता है। वहीं इराक के एरबिल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर बने अमेरिकी सैन्य हिस्से पर भी सटीक निशाने लगाए गए हैं। कुवैत में हताहतों की संख्या को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन नुकसान का आंकलन अरबों डॉलर में बताया जा रहा है।

यूएई के जेबेल अली बंदरगाह के पास भी धमाके

ईरान की मारक क्षमता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के जेबेल अली बंदरगाह के रणनीतिक क्षेत्रों को भी नुकसान पहुँचा है। इन हमलों ने मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य अभियानों की कमर तोड़ दी है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी सुरक्षा चूक और तकनीकी नुकसान से उबरने में अमेरिका को लंबा समय लग सकता है। पूरे मिडिल ईस्ट में इस समय युद्ध के बादल गहरे छाए हुए हैं और अमेरिकी राजनयिक मिशनों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।