Iran-US war: कभी 20 गुना भीषण हमले की धमकी तो कभी शांति की गुहार, क्या है ट्रंप की रहस्यमयी ‘मैडमैन थ्योरी’
India News Live,Digital Desk : मिडिल-ईस्ट में बारूद की गंध और धमाकों के बीच ईरान-अमेरिका युद्ध को 10 दिन पूरे हो चुके हैं, लेकिन दुनिया के सबसे ताकतवर मुल्क के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इरादे अब भी किसी पहेली से कम नहीं हैं। एक ओर ट्रंप प्रशासन ईरान की तेल सप्लाई रोकने पर '20 गुना घातक' प्रहार की चेतावनी दे रहा है, तो दूसरी तरफ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के जरिए सुलह की मेज सजाने की कोशिशें भी जारी हैं। ट्रंप की इस विरोधाभासी रणनीति ने न केवल अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया को भारी असमंजस (Confusion) में डाल दिया है।
युद्ध के 10 दिन बाद भी लक्ष्य और कारण अस्पष्ट
हैरानी की बात यह है कि भीषण गोलाबारी और मिसाइल हमलों के बावजूद ट्रंप सरकार अब तक दुनिया को यह समझाने में नाकाम रही है कि आखिर इस युद्ध की ठोस शुरुआत क्यों की गई और इसका अंतिम लक्ष्य क्या है। व्हाइट हाउस की ओर से न तो युद्ध शुरू करने का कोई ठोस कारण बताया गया और न ही इसे खत्म करने का कोई स्पष्ट रोडमैप पेश किया गया है। कभी इसे ईरान का परमाणु खतरा बताया जाता है, तो कभी इसे इजरायल की सुरक्षा से जोड़ दिया जाता है। इस अनिश्चितता ने वैश्विक राजनीति में अस्थिरता का नया दौर शुरू कर दिया है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराया मंदी का खतरा
ईरान और अमेरिका की इस जंग ने केवल सीमाओं पर ही नहीं, बल्कि वैश्विक शेयर बाजारों और तेल की कीमतों में भी तबाही मचा रखी है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता इतनी बढ़ गई है कि कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष और लंबा खिंचता है, तो दुनिया को एक बड़ी मंदी का सामना करना पड़ सकता है। इसके साथ ही, खाड़ी देशों पर ईरान के ड्रोन और मिसाइल हमलों ने इस जंग के एक व्यापक क्षेत्रीय युद्ध में तब्दील होने का डर पैदा कर दिया है।
डोनाल्ड ट्रंप पर बढ़ता घरेलू और राजनीतिक दबाव
युद्ध की आग के बीच राष्ट्रपति ट्रंप को अपने ही देश में कड़े राजनीतिक विरोध का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिकी जनता का एक बड़ा हिस्सा किसी भी नए विदेशी युद्ध के पक्ष में नहीं है। महंगाई और आसमान छूती ऊर्जा कीमतों ने ट्रंप प्रशासन के लिए मध्यावधि चुनावों से पहले बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। हालांकि, फ्लोरिडा में ट्रंप ने दावा किया कि यह हमला जरूरी था, वरना ईरान पूरे मिडिल-ईस्ट पर कब्जा कर लेता। लेकिन, इस दावे के पीछे अब तक कोई पुख्ता सबूत पेश नहीं किए गए हैं। ट्रंप ने इसे आर्थिक रूप से लाभदायक बताते हुए दावा किया कि इससे अंततः तेल और गैस की कीमतें कम होंगी।
क्या है ट्रंप की 'मैडमैन थ्योरी' का रहस्य?
राजनीतिक विश्लेषक ट्रंप के इस कन्फ्यूजन को उनकी सोची-समझी 'मैडमैन थ्योरी' (Madman Theory) का हिस्सा मान रहे हैं। इस थ्योरी के तहत कोई नेता जानबूझकर खुद को इतना अनिश्चित और अप्रत्याशित दिखाता है कि दुश्मन डर के मारे दबाव में आ जाए। ट्रंप दुश्मन को यह अहसास कराना चाहते हैं कि वह कभी भी कुछ भी कर सकते हैं—चाहे वह भीषण परमाणु हमला हो या फिर अचानक शांति वार्ता। यह थ्योरी दुश्मन को लगातार तनाव में रखने का एक मनोवैज्ञानिक हथियार है।
सुलह की राह या तबाही का नया मंजर?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ट्रंप इस युद्ध को अपनी मर्जी से खत्म कर पाएंगे? अमेरिका और इजरायल के दावों के मुताबिक, उन्होंने ईरान के मिसाइल प्रोग्राम और परमाणु ठिकानों को भारी चोट पहुंचाई है, लेकिन इसकी स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। जब तक कोई स्पष्ट कूटनीतिक समाधान मेज पर नहीं आता, तब तक यह कहना मुश्किल है कि मिडिल-ईस्ट में शांति लौटेगी या यह जंग किसी बड़ी तबाही की प्रस्तावना साबित होगी।