ईरान ने अमेरिका को भेजा 'सीक्रेट' शांति प्रस्ताव, क्या खुल जाएगा होर्मुज जलडमरूमध्य
India News Live,Digital Desk : पश्चिम एशिया में महीनों से जारी तनाव के बीच एक ऐसी खबर आई है जो वैश्विक बाजार और कूटनीति के गलियारों में हलचल पैदा कर सकती है। ईरान ने युद्ध की आग को ठंडा करने के लिए अमेरिका के सामने दोस्ती का हाथ बढ़ाते हुए एक 'तीन सूत्री शांति प्रस्ताव' (Three-Point Peace Proposal) पेश किया है। खास बात यह है कि यह प्रस्ताव सीधा न भेजकर पाकिस्तान के जरिए व्हाइट हाउस तक पहुंचाया गया है।
पाकिस्तान बना मध्यस्थ, अराघची ने सौंपा शांति का मसौदा
सूत्रों के मुताबिक, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हाल ही में अपनी इस्लामाबाद यात्रा के दौरान पाकिस्तानी अधिकारियों को एक बेहद गोपनीय दस्तावेज सौंपा। इस दस्तावेज में युद्ध विराम और व्यापारिक रास्तों को फिर से बहाल करने की रूपरेखा तैयार की गई है। ईरान का प्राथमिक लक्ष्य उस अमेरिकी नाकेबंदी (Blockade) को खत्म करना है, जिसने उसकी अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है।
ईरान के प्रस्ताव की तीन बड़ी शर्तें
ईरान ने इस समझौते के लिए जो तीन मुख्य बिंदु रखे हैं, वे कूटनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं:
होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलना: ईरान सामरिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज की घेराबंदी खत्म कर इसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए फिर से खोलने को तैयार है, बशर्ते अमेरिका अपनी नाकेबंदी हटा ले।
दीर्घकालिक युद्धविराम: वर्तमान संघर्ष को स्थायी रूप से रोकने और लंबे समय तक सीजफायर पर सहमति बनाना।
परमाणु कार्यक्रम पर 'वेट एंड वॉच': ईरान चाहता है कि परमाणु कार्यक्रम जैसे संवेदनशील मुद्दे पर फिलहाल चर्चा न की जाए। उसका तर्क है कि पहले शांति स्थापित हो, उसके बाद ही परमाणु मसलों पर मेज पर बैठा जाए।
ट्रंप प्रशासन की 'नो कॉम्प्रोमाइज' पॉलिसी और इजरायल का डर
ईरानी प्रस्ताव पर व्हाइट हाउस की चुप्पी बहुत कुछ कह रही है। हालांकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप युद्ध खत्म करने के पक्षधर रहे हैं, लेकिन वे ईरान को किसी भी तरह की ढील देने के मूड में नहीं दिख रहे हैं। अमेरिकी विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन तीसरे बिंदु—यानी परमाणु कार्यक्रम को टालने—पर कभी सहमत नहीं होगा। अमेरिका और इजरायल का स्पष्ट मानना है कि बिना परमाणु नियंत्रण के किसी भी शांति समझौते का मतलब ईरान को फिर से मजबूत होने का मौका देना होगा।
ऊर्जा संकट और वैश्विक दबाव
यह शांति वार्ता ऐसे समय में शुरू हुई है जब पूरी दुनिया तेल की बढ़ती कीमतों और ऊर्जा संकट से जूझ रही है। होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से वैश्विक सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। ईरान जानता है कि अमेरिका लंबे समय तक घेराबंदी जारी रख सकता है, लेकिन तेहरान के लिए यह स्थिति अब 'करो या मरो' वाली हो गई है। फिलहाल, ट्रंप ने अपनी टीम को इस्लामाबाद भेजने से इनकार कर दिया है, जिससे संकेत मिलते हैं कि अमेरिका इस प्रस्ताव को पूरी तरह स्वीकार करने के हक में नहीं है।