'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' में फंसा भारत का ऊर्जा बेड़ा: 13 जहाजों की सुरक्षित वापसी के लिए सरकार का 'सीक्रेट प्लान' सक्रिय

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India News Live,Digital Desk : ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच फरवरी 2026 में शुरू हुए संघर्ष के बाद से 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) दुनिया का सबसे जोखिम भरा समुद्री मार्ग बन गया है। दुनिया के कुल तेल और प्राकृतिक गैस व्यापार का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा यहीं से गुजरता है। इस तनावपूर्ण स्थिति के बीच भारत सरकार अपने जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए एक बेहद सतर्क और रणनीतिक दृष्टिकोण अपना रही है।

वर्तमान स्थिति: क्या है चुनौती?

बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अनुसार, होर्मुज के संकरे मार्ग में अभी भी 13 भारतीय जहाज फंसे हुए हैं, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

5 कच्चे तेल के टैंकर

1 एलपीजी टैंकर

1 केमिकल टैंकर

3 कंटेनर जहाज

2 बल्क कैरियर

1 ड्रेजर

सरकार की समन्वित रणनीति:

मंत्रालय ने इन जहाजों को निकालने के लिए किसी भी सार्वजनिक विवरण को साझा करने से इनकार कर दिया है, जिसे विशेषज्ञ एक 'सीक्रेट प्लान' का हिस्सा मान रहे हैं:

विदेश मंत्रालय (MEA) की मुख्य भूमिका: ईरान के साथ कूटनीतिक समन्वय का पूरा दारोमदार विदेश मंत्रालय के कंधों पर है।

प्राथमिकता का निर्धारण: पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MOPNG) और उर्वरक मंत्रालय मिलकर यह तय कर रहे हैं कि कौन सा जहाज ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण है और उसे पहले सुरक्षित निकालना है।

सफलता के संकेत: सरकार के प्रयासों का असर दिखने लगा है। हाल ही में 'निसोस केरोस' टैंकर 2,70,000 मीट्रिक टन कच्चे तेल के साथ सफलतापूर्वक होर्मुज से बाहर निकला है और जल्द ही विशाखापत्तनम पहुंचेगा। अब तक कुल 14 भारतीय जहाज इस जोखिम भरे रूट को पार कर सुरक्षित भारत पहुंच चुके हैं।

सुरक्षा और डेटा की गोपनीयता:

जब अधिकारियों से 'शिप ट्रैकिंग डेटा' (जो पब्लिक ऐप्स पर दिखता है) के खतरों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि सार्वजनिक डेटा का उपयोग करने वालों की मंशा पर ही सुरक्षा निर्भर करती है। हालांकि, सरकार इस डेटा का उपयोग अपने स्तर पर जहाजों की मॉनिटरिंग के लिए एक सहायक टूल के रूप में कर रही है।

भारत का साहसी रुख:

ईरान द्वारा जहाजों को निशाना बनाने की धमकियों के कारण दुनिया की कई बड़ी शिपिंग कंपनियों ने इस रूट से अपना व्यापार बंद कर दिया है। इसके विपरीत, भारत ने खतरे के बावजूद 'शिवालिक', 'नंदा देवी', 'जग लाडकी' और 'पाइन गैस' जैसे जहाजों के जरिए अपनी ऊर्जा आपूर्ति जारी रखी है। यह न केवल भारत की रणनीतिक आत्मनिर्भरता को दिखाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि कठिन कूटनीतिक संतुलन के जरिए भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने में सक्षम है।