कर्नाटक कांग्रेस का 'सियासी रीसेट': डीके शिवकुमार का मुख्यमंत्री बनना तय, मंत्रिमंडल में 10 मंत्री और 4 डिप्टी सीएम की तैयारी
India News Live,Digital Desk : कर्नाटक की राजनीति में एक बड़े बदलाव की पटकथा लिख दी गई है। निवर्तमान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार का नया मुख्यमंत्री बनना लगभग तय हो गया है। पार्टी नेतृत्व ने कर्नाटक में सत्ता और संगठन के ढांचे को पूरी तरह बदलने के लिए 'रीसेट' बटन दबा दिया है।
शपथ ग्रहण और मंत्रिमंडल का खाका:
3 जून को शपथ: डीके शिवकुमार के 3 जून 2026 को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने की संभावना है।
बड़ी कैबिनेट: इस बार सीएम अकेले शपथ नहीं लेंगे, बल्कि उनके साथ 10 नए मंत्रियों को भी कैबिनेट में शामिल किया जाएगा।
4 डिप्टी सीएम का फॉर्मूला: राज्य में क्षेत्रीय, सामाजिक और जातीय समीकरणों को साधने के लिए सरकार में '4 उप-मुख्यमंत्री' नियुक्त करने की योजना है। यह कर्नाटक में सत्ता के विकेंद्रीकरण की दिशा में एक बड़ा प्रयोग माना जा रहा है।
मंत्रिमंडल विस्तार: पूर्ण मंत्रिमंडल का विस्तार 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव के बाद किया जाएगा।
सियासी रीसेट और बदलाव की रणनीति:
कांग्रेस आलाकमान ने 2028 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए व्यापक रणनीति तैयार की है:
ताजगी और अनुभव: पार्टी लगभग 50% मंत्रियों को नए चेहरे बनाने की योजना पर काम कर रही है। जिन मंत्रियों ने तीन साल का कार्यकाल पूरा कर लिया है, उन्हें कैबिनेट से हटाकर संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं।
संगठन को मजबूती: अनुभवी नेताओं को सरकार से संगठन में लाने का उद्देश्य जमीनी स्तर पर पार्टी को और अधिक मजबूत करना है।
ए. पाटिल का बुलावा: बेंगलुरु में आज शाम 4 बजे विधान सौध में कांग्रेस विधायक दल (CLP) की बैठक हो रही है। इस बैठक में केसी वेणुगोपाल और रणदीप सुरजेवाला बतौर पर्यवेक्षक मौजूद रहेंगे, जहाँ औपचारिक रूप से डीके शिवकुमार को विधायक दल का नेता चुना जाएगा।
वाईएस शर्मिला और राज्यसभा चुनाव:
इस फेरबदल के साथ ही आंध्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष वाईएस शर्मिला का नाम भी सुर्खियों में है। चर्चा है कि उन्हें पार्टी कर्नाटक कोटे से राज्यसभा भेजने की तैयारी कर रही है, जिससे राष्ट्रीय राजनीति में उनका कद और बढ़ेगा।
सिद्धारमैया का अध्याय:
राज्यपाल थावरचंद गहलोत द्वारा सिद्धारमैया का इस्तीफा स्वीकार करने और मंत्रिमंडल भंग होने के बाद अब पूरी निगाहें डीके शिवकुमार के 'नए युग' पर टिकी हैं। यह बदलाव कर्नाटक कांग्रेस के लिए एक नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें डीके शिवकुमार को चुनौती और जिम्मेदारी दोनों ही बड़ी मिली हैं।