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July 16 2026 02:32 pm

"युद्ध जारी रहा तो परिणाम होंगे गंभीर...", राज्यसभा में PM मोदी की दोटूक; मिडिल ईस्ट संकट पर दुनिया को दिया शांति का कड़ा संदेश

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India News Live,Digital Desk : पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी युद्ध के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को राज्यसभा में देश और दुनिया को संबोधित किया। पिछले तीन सप्ताह से अधिक समय से चल रहे इस संघर्ष पर चिंता व्यक्त करते हुए पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि यदि हिंसा नहीं रुकी, तो इसके परिणाम पूरी मानवता के लिए विनाशकारी होंगे। प्रधानमंत्री ने ऊर्जा संकट से लेकर समुद्र में फंसे भारतीय नाविकों की सुरक्षा तक, हर पहलू पर भारत का पक्ष मजबूती से रखा।

पूरी दुनिया पर मंडरा रहा है ऊर्जा संकट

प्रधानमंत्री ने उच्च सदन को संबोधित करते हुए कहा कि इस युद्ध ने विश्व को एक गंभीर ऊर्जा संकट के मुहाने पर खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा, "पश्चिम एशिया के इस संघर्ष का सीधा असर भारत पर भी पड़ रहा है। पेट्रोल, डीजल, गैस और उर्वरकों (Fertilizers) की नियमित आपूर्ति बाधित हुई है। हम इस स्थिति को लेकर पूरी तरह सतर्क हैं और हर निर्णय देशहित को सर्वोपरि रखकर ले रहे हैं।"

होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे भारतीय नाविक: बड़ी चिंता

पीएम मोदी ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की स्थिति पर गहरी चिंता जताई, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक जलमार्गों में से एक है।

फंसे हुए जहाज: युद्ध के कारण इस मार्ग पर बड़ी संख्या में मालवाहक जहाज फंसे हुए हैं।

भारतीय चालक दल: प्रधानमंत्री ने खुलासा किया कि इन फंसे हुए जहाजों में से अधिकांश के चालक दल (Crew) भारतीय हैं।

1 करोड़ भारतीयों की सुरक्षा: पीएम ने याद दिलाया कि खाड़ी देशों में लगभग 1 करोड़ भारतीय रहते और काम करते हैं। उनकी जान-माल की सुरक्षा भारत सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

भारत की 'शांति कूटनीति': सबसे निरंतर संपर्क

भारत इस संकट में मूकदर्शक नहीं बना है। प्रधानमंत्री ने सदन को बताया कि भारत 'डायलॉग और डिप्लोमेसी' के जरिए समाधान निकालने की कोशिश कर रहा है:

तनाव कम करने की अपील: भारत ने ईरान, इज़राइल और अमेरिका के शीर्ष नेतृत्व से संपर्क साधा है।

हमलों का विरोध: भारत ने स्पष्ट रूप से नागरिक बुनियादी ढांचे (Civilian Infrastructure) और ऊर्जा एवं परिवहन नेटवर्क पर हमलों का विरोध किया है।

दो दौर की वार्ता: पीएम ने बताया कि वह पश्चिम एशिया के राष्ट्राध्यक्षों के साथ दो दौर की विस्तृत चर्चा कर चुके हैं ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोला जा सके।

संसद से विश्व को एकजुट संदेश

संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने विपक्षी दलों सहित पूरे सदन से अपील की कि ऐसी कठिन परिस्थिति में भारतीय संसद को एकजुट होकर विश्व भर में शांति और संवाद के लिए आवाज उठानी चाहिए। उन्होंने दोहराया कि युद्ध किसी समस्या का समाधान नहीं है और संवाद ही एकमात्र रास्ता है।