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October 25 2026 12:22 pm

लंदन में CJI सूर्यकांत के कार्यक्रम में जबरदस्त हंगामा: 'असहमति' के सवाल पर छिड़ा विवाद, एक्शन में आया भारतीय उच्चायोग

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ब्रिटेन की छह दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर गए भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत के लंदन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान भारी हंगामा और व्यवधान होने की बड़ी खबर सामने आई है। लंदन की प्रतिष्ठित बर्कबेक यूनिवर्सिटी में जब मुख्य न्यायाधीश कानूनी और तकनीकी विषयों पर व्याख्यान दे रहे थे, तभी वहां मौजूद एक शख्स ने भारत में असहमति के मुद्दे को उठाकर माहौल को गरमा दिया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद यूनाइटेड किंगडम (UK) स्थित भारतीय उच्चायोग बेहद भड़क गया है और उसने शुक्रवार को एक कड़ा बयान जारी कर इस पूरी घटना की तीव्र शब्दों में निंदा की है। उच्चायोग ने इस तरह के बर्ताव को सार्वजनिक संवाद की मर्यादा के बिल्कुल खिलाफ और पूरी तरह से अस्वीकार्य करार दिया है।

जब एआई (AI) के मंच पर गूंजा भारत की 'असहमति' का सवाल

यह पूरा विवाद गुरुवार को उस समय शुरू हुआ जब बर्कबेक यूनिवर्सिटी में 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अंतर्राष्ट्रीय कानून' (AI and International Law) जैसे गंभीर विषय पर मुख्य न्यायाधीश का विशेष कार्यक्रम चल रहा था। इस हाई-प्रोफाइल इवेंट का मुख्य उद्देश्य एआई, कानूनी प्रणालियों और अंतरराष्ट्रीय गवर्नेंस के आपसी संबंधों को टटोलना था। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के संबोधन के बाद जब हॉल में उपस्थित श्रोताओं के साथ सवाल-जवाब (Q&A) का दौर शुरू हुआ, तभी वहां मौजूद एक व्यक्ति ने भारत के आंतरिक मामलों और असहमति के प्रति कथित असहिष्णुता को लेकर तीखा सवाल पूछने का प्रयास किया। देखते ही देखते हॉल में तीखी बहस छिड़ गई और हंगामा शुरू हो गया।

मॉडरेटर ने तुरंत संभाला मोर्चा, भारतीय उच्चायोग ने लगाई लताड़

मंच पर माहौल बिगड़ता देख कार्यक्रम के मॉडरेटर ने बिना देर किए तुरंत हस्तक्षेप किया। उन्होंने उस शख्स के सवाल को बीच में ही रोक दिया और स्पष्ट लहजे में कहा कि यह मंच और आज का विषय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए तय है, इसलिए इस तरह के राजनीतिक और लीक से हटकर किए गए सवालों की यहां कोई जगह नहीं है। घटना के अगले ही दिन भारतीय उच्चायोग ने इस अशिष्ट व्यवहार पर कड़ा रुख अख्तियार किया। उच्चायोग ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक समाज में विचारों की भिन्नता होना बेहद स्वाभाविक है, लेकिन इसे प्रकट करने का तरीका हमेशा सभ्य, मर्यादित और सम्मानजनक होना चाहिए। सार्वजनिक मंचों पर इस तरह का हुड़दंग मचाना कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

तकनीक और संविधान पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के विचार

इस हंगामे से इतर, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने तकनीक और आधुनिक कानून के तालमेल पर बेहद गहराई से अपने विचार साझा किए। उन्होंने वैश्विक मंच से कहा कि तकनीक अपने आप में न तो अच्छी होती है और न ही बुरी। इसका वास्तविक प्रभाव पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि कोई भी समाज इसे किन कानूनी, राजनीतिक और नैतिक पैमानों के साथ अपने जीवन में लागू करता है। उन्होंने न्यायपालिका की भूमिका स्पष्ट करते हुए कहा कि कानून का काम तकनीकी प्रगति का आंख मूंदकर विरोध करना नहीं है और न ही उसके आगे झुकना है, बल्कि कानून यह सुनिश्चित करता है कि तकनीक की असीमित ताकत हमेशा संवैधानिक मूल्यों, लोकतांत्रिक गरिमा और मानवाधिकारों के दायरे में ही काम करे।

भारत-यूके पार्टनरशिप और वर्ल्ड फोरम पर साझा निर्माण की अपील

अपनी यात्रा के अगले पड़ाव में शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश ने भारतीय मध्यस्थता परिषद के एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का भव्य उद्घाटन किया। 'भारत-यूके आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने में वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) की भूमिका' विषय पर बोलते हुए उन्होंने दोनों देशों के व्यापारिक और कानूनी संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाने की बात कही। उन्होंने वैश्विक परिदृश्य पर एक बड़ा संदेश देते हुए कहा कि वर्तमान समय में दुनिया को आपस में तुलना या प्रतिस्पर्धा करने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि सभी देशों को एक साथ मिलकर एक बेहतर भविष्य के निर्माण के लिए सहयोग करने की जरूरत है।