BREAKING:
July 30 2026 12:46 am

गुरु पूर्णिमा पर घर पर कैसे बनाएं 'व्यासपीठ'? जानिए पूजन विधि, 24 रेखाओं का नियम और इसका धार्मिक महत्व

Post

आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि को सनातन धर्म में गुरु पूर्णिमा और व्यास पूर्णिमा के रूप में बेहद श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह पावन दिन चारों वेदों का ज्ञान देने वाले, महाभारत और पुराणों के रचयिता महर्षि वेदव्यास की जयंती का दिन है। महर्षि वेदव्यास को भगवान विष्णु का अंशावतार और जगत का प्रथम गुरु माना जाता है।

गुरु पूर्णिमा के दिन श्रद्धालु गुरु आश्रमों में जाकर अपने गुरुदेव का पूजन करते हैं। जो लोग आश्रम या गुरुदेव के समक्ष उपस्थित नहीं हो सकते, वे अपने घर पर ही व्यासपीठ की स्थापना करके पूरे विधि-विधान से गुरु पूजन का पुण्य प्राप्त कर सकते हैं।

क्या है व्यासपीठ? जानिए सनातन परंपरा में इसका स्थान

सनातन धर्म में 'व्यासपीठ' को सर्वोपरि और सबसे पवित्र पद माना गया है। श्रीमद्भागवत महापुराण, श्रीरामकथा, शिवमहापुराण या हनुमान कथा के दौरान जहां बैठकर कथावाचक कथा का रसपान कराते हैं, उस उच्च स्थान को व्यासपीठ कहा जाता है।

कोई भी कथावाचक या व्यासजी कथा शुरू करने से पहले इस पीठ का नमन और पूजन करते हैं। यह स्थान साक्षात महर्षि वेदव्यास की ज्ञान-परंपरा और उपस्थिति का प्रतीक माना जाता है।

घर पर कैसे बनाएं व्यासपीठ? (24 रेखाओं का नियम)

यदि आप गुरु पूर्णिमा पर घर पर ही गुरु पूजन कर रहे हैं, तो नीचे दी गई शास्त्रीय विधि से व्यासपीठ तैयार कर सकते हैं:

चौकी और श्वेत वस्त्र: एक स्वच्छ लकड़ी की चौकी (बाजोट) लें और उस पर पवित्र सफेद कपड़ा (श्वेत वस्त्र) बिछाएं।

24 रेखाएं खींचें: कपड़े पर रोली या चंदन से पूर्व से पश्चिम की ओर 12 रेखाएं और उत्तर से दक्षिण की ओर 12 रेखाएं (कुल 24 रेखाएं) खींचकर एक पवित्र ग्रिड (पीठ) बनाएं।

दिग्बंधन (रक्षण): रेखाएं खींचने के पश्चात दसों दिशाओं में अक्षत (चावल) का छिड़काव करते हुए 'दिग्बंधन' करें, ताकि आसपास की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त हो जाए।

प्रतिमा/चित्र स्थापना: इसके बाद इस पीठ पर महर्षि वेदव्यास, अपने गुरुदेव या आदिगुरु भगवान शिव/भगवान दत्तात्रेय का चित्र स्थापित करें।

गुरु पूर्णिमा पूजा विधि और मुख्य नियम

पूजन का अंगविवरण व सामग्री
मुख्य देव/गुरुमहर्षि वेदव्यास, भगवान दत्तात्रेय, आदिगुरु शिव, या अपने दीक्षा गुरु
पूजा सामग्रीरोली, चंदन, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, ऋतुफल, मिष्ठान और दक्षिणा
गुरु भेंट (उपहार)गुरुजनों को नवीन वस्त्र, फल, मिष्ठान और यथाशक्ति दक्षिणा अर्पित की जाती है
वैकल्पिक पूजनयदि दीक्षा गुरु न हों तो अपने ईष्टदेव, माता-पिता या शिक्षकों को गुरु मानकर पूजन करें

गुरु मंत्र दीक्षा और सत्यनारायण कथा का महत्व

मंत्र दीक्षा: गुरु पूर्णिमा का दिन नया गुरु बनाने और उनसे 'गुरु मंत्र' प्राप्त करने के लिए सबसे शुभ माना गया है। इस दिन गुरु के चरणों में अपने अवगुणों को सौंपकर सन्मार्ग पर चलने का संकल्प लिया जाता है।

श्री सत्यनारायण व्रत कथा: इस दिन घर में भगवान सत्यनारायण की कथा और पूजन कराने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है और अनिष्टों का निवारण होता है।

गुरु महिमा का संदेश:

“गुरु की प्रसन्नता और उनका आशीर्वाद ही जीवन में समस्त बाधाओं को दूर कर कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है। गुरु पूर्णिमा पर अपने अहंकार का त्याग कर गुरु चरणों में समर्पित होना ही सच्ची पूजा है।”