'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के जोखिम भरे सफर से पेट्रोलियम लेकर भारत कैसे पहुँच रहे जहाज? जानें भारतीय शिपिंग की अनकही कहानी
India News Live,Digital Desk : ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव के कारण दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल गलियारे, 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz), से गुजरना इस समय किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। बावजूद इसके, भारत अपने ऊर्जा लक्ष्यों को पूरा करने के लिए लगातार यहाँ से पेट्रोलियम पदार्थों की खेप लाने में सफल रहा है। इस जोखिम भरे सफर और इसके पीछे की रणनीतिक कुशलता पर शिपिंग मंत्रालय ने विस्तार से जानकारी दी है।
समन्वय और प्राथमिकता का गणित
शिपिंग निदेशक ओपेश कुमार शर्मा के अनुसार, होर्मुज से जहाजों का सुरक्षित निकलना एक बेहद जटिल प्रक्रिया है, जिसे पूरी तरह गोपनीय रखा गया है:
अंतर-मंत्रालयी तालमेल: इस प्रक्रिया में विदेश मंत्रालय, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय और उर्वरक मंत्रालय की भूमिका अहम होती है। कौन सा जहाज पहले निकलेगा, इसका फैसला मंत्रालय स्तर पर आपसी समन्वय से लिया जाता है।
सुरक्षा प्रोटोकॉल: सुरक्षा कारणों से ईरान के साथ किए जा रहे समन्वय के विवरण को सार्वजनिक नहीं किया गया है।
जहाजों की मौजूदगी: वर्तमान में होर्मुज क्षेत्र में भारतीय झंडे वाले करीब 13 जहाज मौजूद हैं, जिनमें 5 कच्चे तेल के टैंकर, 1 एलपीजी टैंकर, 1 केमिकल टैंकर, 3 कंटेनर जहाज, 2 बल्क कैरियर और 1 ड्रेजर शामिल हैं।
भारत का प्रदर्शन और अन्य देशों से तुलना
28 फरवरी, 2026 को संघर्ष शुरू होने के बाद से होर्मुज से जहाजों का निकलना बहुत कठिन हो गया है। हालांकि, भारतीय नौवहन की सतर्कता का ही नतीजा है कि अन्य देशों के मुकाबले भारत के जहाज अधिक संख्या में सुरक्षित सीमा पार करने में सफल रहे हैं। शिवालिक, नंदा देवी, जग लाडकी, पाइन गैस और ग्रीन सान्वी जैसे महत्वपूर्ण जहाजों ने इस खतरनाक रास्ते को सफलतापूर्वक पार किया है।
होर्मुज बंदी का वैश्विक खतरा
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की रिपोर्ट के अनुसार, यदि होर्मुज जलडमरूमध्य लंबे समय तक बंद रहता है, तो यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए 'कोविड-19' जैसे गंभीर आर्थिक संकट को जन्म दे सकता है। इससे ऊर्जा और खाद्य आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह चरमरा सकती है।
भारत को क्या करना होगा?
वित्तीय परामर्श कंपनी 'ईवाई' (EY) की रिपोर्ट ने भारत को अपनी निर्भरता कम करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं:
वैकल्पिक गलियारे: भारत को 'भारत-पश्चिम एशिया-यूरोप आर्थिक गलियारे' (IMEC) पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है।
व्यापार मार्गों में विविधता: मलक्का जलडमरूमध्य के माध्यम से हिंद-प्रशांत मार्ग को मजबूत करना एक आवश्यक कदम है।
भारतीय जहाजों का होर्मुज से गुजरना न केवल एक लॉजिस्टिक चुनौती है, बल्कि यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा के प्रति उसकी दृढ़ता का भी प्रतीक है। हालांकि, वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए वैकल्पिक व्यापार मार्गों का विकास अब समय की मांग बन गया है।