BREAKING:
November 01 2026 11:10 am

सोने-चांदी के दामों में ऐतिहासिक महा-गिरावट: एक ही दिन में ₹15,000 तक टूटे दाम, अमेरिकी डेटा के चक्रव्यूह में फंसा सर्राफा बाजार

Post

सर्राफा बाजार के निवेशकों और आम ग्राहकों के लिए शुक्रवार का कारोबारी सत्र किसी बड़े वित्तीय झटके से कम नहीं रहा। वैश्विक स्तर पर उपजी आर्थिक हलचलों, महंगाई बढ़ने की आशंका, कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों और ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच भारतीय वायदा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में एक ऐसी ऐतिहासिक गिरावट दर्ज (Gold Silver Price Crash) की गई जिसने सबको हैरान कर दिया है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर शुक्रवार रात होते-होते सोने और चांदी के खरीदारों की चांदी हो गई, जबकि ऊंचे दामों पर दांव लगाने वाले निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। दिनभर के उतार-चढ़ाव के बाद चांदी के दाम जहां 15 हजार रुपये से ज्यादा टूट गए, वहीं सोने की कीमतों में भी तगड़ी गिरावट देखी गई।

MCX पर मचा कोहराम, दिन के सबसे निचले स्तर पर पहुंचे दाम

शुक्रवार रात 8 बजे के करीब मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सोने और चांदी के ग्राफ में भारी गिरावट दर्ज हुई। अगस्त डिलीवरी वाला सोना 2.62 फीसदी यानी करीब 4,173 रुपए की बड़ी गिरावट के साथ 1,55,313 रुपए प्रति 10 ग्राम पर आ गया, जो कि इसका दिनभर का सबसे निचला स्तर (Day's Low Level) भी रहा। लेकिन असली कोहराम तो चांदी के बाजार में देखने को मिला। चांदी की कीमतों में 5.88 फीसदी का बड़ा क्रैश आया और यह 15,887 रुपए प्रति किलोग्राम टूटकर सीधे 2,48,909 रुपए के निचले स्तर पर आ गई। बाजार बंद होने तक अगस्त डिलीवरी वाला सोना 2.69 फीसदी की गिरावट के साथ 1,55,250 रुपए पर ट्रेड कर रहा था, जबकि जुलाई डिलीवरी वाली चांदी 5.93 फीसदी फिसलकर 2,49,100 रुपए प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती देखी गई।

आखिर अमेरिका के किस डेटा ने बिगाड़ा सोने-चांदी का पूरा खेल?

अब हर किसी के मन में यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि आखिर अचानक बाजार में ऐसी क्या आफत आ गई कि सोने-चांदी के दाम ताश के पत्तों की तरह ढह गए? दरअसल, इस भारी गिरावट के पीछे अमेरिका से जारी हुआ एक बेहद महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़ा है। शुक्रवार देर शाम अमेरिकी लेबर डिपार्टमेंट (BLS) ने मई महीने के लिए 'नॉन-फार्म पेरोल्स' (NFP) यानी कृषि क्षेत्र को छोड़कर नए रोजगार मिलने के आंकड़े जारी किए। बाजार के विशेषज्ञ अनुमान लगा रहे थे कि मई में केवल 85 हजार नए रोजगार जुड़ेंगे, लेकिन जब असल आंकड़ा सामने आया तो सब दंग रह गए। अमेरिका में मई के दौरान उम्मीद से कहीं ज्यादा यानी 1 लाख 72 हजार नए रोजगार बढ़े। इसके अलावा पिछले महीने यानी अप्रैल के आंकड़े को भी संशोधित करके 1 लाख 15 हजार से बढ़ाकर 1 लाख 79 हजार कर दिया गया। अमेरिकी श्रम बाजार की इस अप्रत्याशित मजबूती ने वैश्विक निवेशकों को चौंका दिया, जिसके चलते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने-चांदी की सुरक्षित निवेश के रूप में मांग अचानक घट गई और कीमतों में भारी गिरावट आ गई।

अमेरिकी अर्थव्यवस्था के इन आंकड़ों ने भी डाला बाजार पर असर

रोजगार के बंपर आंकड़ों के अलावा अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीतियों को प्रभावित करने वाले कुछ अन्य महत्वपूर्ण डेटा भी सामने आए, जिसने सर्राफा बाजार के सेंटिमेंट को बदलने का काम किया:

अमेरिका में बेरोजगारी दर (Unemployment Rate) एक्सपर्ट्स की उम्मीद के बिल्कुल मुताबिक 4.3% पर ही स्थिर बनी रही।

देश का लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट (Labor Force Participation Rate) भी बिना किसी बड़े बदलाव के 61.8% पर टिका रहा।

सबसे राहत की बात यह रही कि औसत घंटे की कमाई (Average Hourly Earnings) में सालाना बढ़ोतरी की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ी है। यह अप्रैल के 3.6% से घटकर मई में 3.4% पर आ गई है, जो एक्सपर्ट्स की उम्मीदों के पूरी तरह अनुकूल है। इन मिले-जुले लेकिन मजबूत आंकड़ों की वजह से डॉलर इंडेक्स को मजबूती मिली, जिसके सीधे असर से भारतीय बाजार में सोने और चांदी के दाम धड़ाम हो गए।