वैश्विक महासंकट के बीच भारत के पड़ोसी देश में मिला तेल-गैस का खजाना, बंद पड़े कुएं से अचानक उबलने लगा ‘काला सोना’

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इस समय पूरी दुनिया पर तीसरे विश्व युद्ध का खतरा मंडरा रहा है। ईरान और अमेरिका (Iran-US War) के बीच जारी भीषण युद्ध की वजह से रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) पूरी तरह से ब्लॉक हो चुका है। इस ब्लॉकेज के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की सप्लाई ठप हो गई है और इसकी कीमतें आसमान छू रही हैं। तेल का आयात न हो पाने के कारण भारत सहित दुनिया के तमाम विकासशील देश ऊर्जा संकट और गैस की भारी किल्लत से जूझ रहे हैं। इसी हाहाकार के बीच भारत के एक पड़ोसी मुल्क से बेहद हैरान करने वाली खबर सामने आई है। इस आर्थिक तंगी से बेहाल पड़ोसी देश में अचानक कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का एक बहुत बड़ा खजाना हाथ लगा है, जिससे उसकी डूबती अर्थव्यवस्था को संजीवनी मिल सकती है।

किस पड़ोसी देश की रातों-रात चमकी किस्मत और कहाँ मिला यह खजाना

कच्चे तेल और गैस का यह विशाल भंडार किसी और देश में नहीं, बल्कि भारत के सबसे करीबी और विवादित पड़ोसी देश पाकिस्तान में मिला है। पाकिस्तान की सरकारी तेल और गैस उत्खनन कंपनी ओजीडीसीएल (OGDCL - ऑयल एंड गैस डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड) को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। कंपनी को यह सफलता पाकिस्तान के सिंध प्रांत के संघार जिले में स्थित 'बॉबी डीप-1' (Bobi Deep-1) नामक कुएं से मिली है। दिलचस्प बात यह है कि यह कुआं लंबे समय से तकनीकी कारणों से बंद पड़ा हुआ था, लेकिन अब जब इससे दोबारा खुदाई शुरू की गई तो वहां से भारी मात्रा में हाइड्रोकार्बन के भंडार पाए गए हैं। पाकिस्तानी सरकार इस अप्रत्याशित खजाने का इस्तेमाल देश में जारी भयंकर ईंधन संकट को दूर करने के लिए करने जा रही है।

हर रोज निकलेगा हजारों बैरल तेल, कंपनी ने बताया इसे ऐतिहासिक खोज

ओजीडीसीएल (OGDCL) द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, बॉबी डीप-1 कुएं के भीतर मौजूद 'लोअर गोरू फॉर्मेशन' की एक बेहद गहरी परत से हर रोज लगभग 2,000 बैरल कच्चे तेल और 11 लाख स्टैंडर्ड क्यूबिक फीट (SCFT) प्राकृतिक गैस का बंपर उत्पादन किया जा सकता है। भूवैज्ञानिकों की जांच और व्यापक रिसर्च के बाद इस बात की पूरी तरह पुष्टि हो चुकी है कि इस पूरे ब्लॉक में हाइड्रोकार्बन का एक बहुत बड़ा और टिकाऊ भंडार मौजूद है। कंपनी ने इसे देश के इतिहास की एक बड़ी और युगांतरकारी उपलब्धि बताया है, क्योंकि बॉबी और धमराकी माइनिंग लीज क्षेत्र के अंतर्गत इस तरह की यह पहली और सबसे बड़ी खोज है।

बंद होने की कगार पर थी परियोजना, वैज्ञानिकों की जिद ने रच दिया इतिहास

इस ऐतिहासिक खोज के पीछे की कहानी भी बेहद दिलचस्प है। इस प्रोजेक्ट के शुरुआती चरण में पाकिस्तानी कंपनी को कई बेहद जटिल तकनीकी, भूगर्भीय और जमीनी चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। हालात इतने खराब हो गए थे कि एक समय पर भारी घाटे के डर से ड्रिलिंग का काम पूरी तरह से रोक दिया गया था और इस कुएं को बंद मान लिया गया था। हालांकि, हार मानने की जगह OGDCL के शीर्ष अधिकारियों ने स्थानीय लोगों और वैज्ञानिकों पर भरोसा जताया। कंपनी के होनहार इंजीनियरों और भूवैज्ञानिकों ने जमशोरो में स्थित 'सिंध विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर प्योर एंड एप्लाइड जियोलॉजी' के विशेषज्ञों के साथ मिलकर इस बेजान पड़े इलाके की दोबारा गहन स्टडी की। वैज्ञानिकों की इसी सटीक रिसर्च का नतीजा है कि आज इस बंद कुएं से 'काला सोना' उबल रहा है।