होर्मुज संकट बना भारत के लिए वरदान: विजिनजम पोर्ट पर 100 जहाजों की कतार, शशि थरूर ने बताया 'ग्लोबल गेम चेंजर'
India News Live,Digital Desk : पश्चिम एशिया में जारी भीषण 'होर्मुज संकट' ने जहां दुनिया भर की सप्लाई चेन को हिलाकर रख दिया है, वहीं भारत का विजिनजम इंटरनेशनल सीपोर्ट (Vizhinjam Port) वैश्विक शिपिंग मानचित्र पर एक चमकते सितारे के रूप में उभरा है। केरल के तिरुवनंतपुरम में स्थित इस पहले डीपवॉटर ट्रांसशिपमेंट हब की सफलता पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने खुशी जाहिर की है। थरूर का कहना है कि जो पोर्ट कभी फाइलों में अटका था, आज वह दुनिया के लिए एक 'वैश्विक आवश्यकता' बन गया है।
100 जहाजों की कतार: विजिनजम ने तोड़े रिकॉर्ड
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय जहाजों ने अब भारत के सुरक्षित समुद्री मार्ग की ओर रुख करना शुरू कर दिया है। शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान में विजिनजम पोर्ट पर करीब 100 जहाज आने के इंतजार में कतारबद्ध हैं। पिछले महीने ही इस पोर्ट ने 61 जहाजों को हैंडल कर एक नया रिकॉर्ड कायम किया है। थरूर के मुताबिक, "होर्मुज संकट ने वैश्विक शिपिंग का ध्यान मेरे निर्वाचन क्षेत्र की ओर मोड़ दिया है, जो भारत की समुद्री शक्ति के लिए एक बड़ा मोड़ है।"
सिंगापुर और कोलंबो को टक्कर देने की तैयारी
विजिनजम पोर्ट को भारत का 'ट्रांसशिपमेंट समाधान' माना जा रहा है। ट्रांसशिपमेंट वह सुविधा है जहां बड़े जहाजों (मदरशिप) से कंटेनर उतारकर छोटे जहाजों में लादे जाते हैं। अब तक भारत इसके लिए कोलंबो या सिंगापुर जैसे विदेशी पोर्ट्स पर निर्भर था। लेकिन रिकॉर्ड समय में 10 लाख TEU (कंटेनर क्षमता) का आंकड़ा पार करने के बाद विजिनजम अब इन वैश्विक दिग्गजों को सीधी टक्कर दे रहा है। थरूर ने कहा कि यह अब केवल एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि एक 'समुद्री दिग्गज' (Maritime Giant) का उदय है।
दूसरे चरण का काम तेज, पोर्ट की क्षमता में होगा इजाफा
अडानी ग्रुप द्वारा संचालित इस पोर्ट की बढ़ती मांग को देखते हुए इसके दूसरे चरण (Phase-2) का काम युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया गया है। विस्तार कार्य पूरा होने के बाद यहां एक साथ 5 बड़े मदरशिप्स को हैंडल किया जा सकेगा। पोर्ट की क्षमता को 10 लाख TEU से बढ़ाकर 50 लाख TEU तक ले जाने का लक्ष्य है। थरूर ने उम्मीद जताई कि यह पोर्ट आने वाले समय में वैश्विक समुद्री व्यापार के नए मानक स्थापित करेगा और भारत को एक ग्लोबल लॉजिस्टिक्स हब बनाएगा।
क्या है होर्मुज संकट जिसने बदला व्यापार का रुख?
दरअसल, ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच चल रहे तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर हमले और रुकावटें बढ़ गई हैं। दुनिया का लगभग 20% तेल इसी रास्ते से गुजरता है। इस अनिश्चितता के कारण ग्लोबल शिपिंग कंपनियां अब विजिनजम जैसे भरोसेमंद और गहरे पानी वाले बंदरगाहों को प्राथमिकता दे रही हैं। विजिनजम की गहराई (करीब 18-20 मीटर) इसे दुनिया के सबसे बड़े जहाजों को रिसीव करने के योग्य बनाती है, जो भारत के लिए एक रणनीतिक बढ़त है।