Guide Movie Songs : इस दर्द भरे गाने के लिए रफी साहब ने लिए थे 47 रीटेक, एसडी बर्मन भी रह गए थे हैरान
India News Live, Digital Desk: भारतीय संगीत जगत के शहंशाह मोहम्मद रफी की आवाज का जादू आज भी बरकरार है। उनकी मखमली आवाज जब कानों में पड़ती है, तो रूह तक सुकून महसूस करती है। 'जेन जी' (Gen Z) के युवा भी आज उनके गानों को उतनी ही शिद्दत से सुनते हैं और अपनी लाइफ से रिलेट करते हैं। रफी साहब की सबसे बड़ी खूबी यह थी कि वे हर गाने को इतनी जीवंतता से गाते थे जैसे वह खुद आपके सामने बैठकर आपके दिल का हाल सुना रहे हों।
आमतौर पर रफी साहब बड़े से बड़ा गाना पहले ही टेक में ओके कर देते थे, लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक ऐसा गाना भी था जिससे वे खुद संतुष्ट नहीं हो रहे थे? उस एक गाने को परफेक्ट बनाने के लिए उन्होंने 47 रीटेक लिए थे। आइए जानते हैं उस अमर गीत की दिलचस्प कहानी।
फिल्म 'गाइड' का वह दर्दभरा नग्मा
हम बात कर रहे हैं सदाबहार फिल्म 'गाइड' के मशहूर गाने 'दिन ढल जाए हाय रात न जाए' की। इस गाने को आज भी विरह और दर्द के सबसे बेहतरीन गानों में गिना जाता है। इस गाने के संगीत निर्देशक महान एसडी बर्मन थे और इसके बोल शैलेंद्र ने लिखे थे। पर्दे पर इस गाने को सदाबहार अभिनेता देव आनंद और वहीदा रहमान पर फिल्माया गया था।
जब एसडी बर्मन ने पहले टेक को कह दिया था 'परफेक्ट'
जब मोहम्मद रफी ने इस गाने की पहली रिकॉर्डिंग की, तो वहां मौजूद हर शख्स मंत्रमुग्ध हो गया। संगीतकार एसडी बर्मन को तो पहला ही टेक इतना पसंद आया कि उन्होंने इसे फाइनल करने का मन बना लिया था। लेकिन रफी साहब को लगा कि इसमें अभी भी कुछ कमी है। उन्हें लग रहा था कि वह जो 'दर्द' इस गाने में फूंकना चाहते हैं, वह पूरी तरह नहीं आया है।
परफेक्शन के लिए लिए 47 रीटेक
रफी साहब अपनी कला को लेकर इतने सजग थे कि उन्होंने 2-4 नहीं, बल्कि एक के बाद एक 47 रीटेक लिए। वह बार-बार गाते और फिर खुद ही कहते कि एक बार फिर कोशिश करते हैं। आखिरकार जब 47वें टेक के बाद उन्हें लगा कि अब गाना 'परफेक्ट' हुआ है, तब उन्होंने हामी भरी। रिकॉर्डिंग के बाद एसडी बर्मन इतने भावुक हो गए कि उन्होंने रफी साहब को गले लगा लिया और कहा, "तुमने हिंदी सिनेमा को एक अमर गीत दे दिया है।"
देर रात तक तैयार हुई थी गाने की धुन
सिर्फ गायकी ही नहीं, इस गाने की धुन तैयार करना भी कोई आसान काम नहीं था। एसडी बर्मन ने अपने बेटे आर.डी. बर्मन और संगीतकार जयदेव के साथ मिलकर रात के 11-11 बजे तक काम किया था, तब जाकर यह कालजयी धुन तैयार हुई थी।
दो भाषाओं में बनी थी फिल्म 'गाइड'
फिल्म 'गाइड' से जुड़े कई और दिलचस्प तथ्य हैं। यह देव आनंद की पहली कलर फिल्म थी। बहुत कम लोग जानते हैं कि यह फिल्म हिंदी और अंग्रेजी, दो भाषाओं में बनी थी। अंग्रेजी वर्जन को देव आनंद के छोटे भाई विजय आनंद ने राइटर पर्ल एस. बक के साथ मिलकर लिखा था और इसका निर्देशन टेज डैनियलवेस्की ने किया था। हालांकि, भारत में अंग्रेजी वर्जन को उतनी पहचान नहीं मिली, लेकिन 2007 में कान फिल्म फेस्टिवल में स्क्रीनिंग के बाद इसे वैश्विक स्तर पर लोकप्रियता मिली।
7000 से ज्यादा गाने और अनगिनत सम्मान
मोहम्मद रफी ने अपने शानदार करियर में 7000 से अधिक गाने गाए, जिसमें 14 भारतीय और 4 विदेशी भाषाएं शामिल थीं। उन्होंने अपनी आवाज से कई अभिनेताओं के करियर को नई ऊंचाइयां दीं। उनकी प्रतिभा के लिए उन्हें 6 फिल्मफेयर अवॉर्ड्स और भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किया गया।