Gold-Silver Price Hike: युद्ध की आहट से दहला सराफा बाजार, सोना ₹1.66 लाख के पार; जानें कीमतों में लगी इस 'आग' के 3 बड़े कारण

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India News Live,Digital Desk : वैश्विक पटल पर गहराते युद्ध के बादलों ने भारतीय आभूषण बाजार में भूकंप ला दिया है। आज, 2 मार्च 2026 को सोने और चांदी की कीमतों ने पिछले सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने निवेशकों के बीच ऐसी खलबली मचाई है कि कीमती धातुओं के दाम आसमान छूने लगे हैं। सुरक्षित निवेश की तलाश में मची इस भगदड़ ने आम आदमी के लिए शादी-ब्याह की खरीदारी को एक बड़ी वित्तीय चुनौती बना दिया है।

एक ही दिन में ₹7,000 की ऐतिहासिक छलांग

इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के ताजा आंकड़ों ने बाजार विशेषज्ञों को भी हैरान कर दिया है। आज 24 कैरेट शुद्ध सोने की कीमत में एक ही दिन में ₹7,000 प्रति 10 ग्राम की अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई। इस भारी उछाल के बाद शुद्ध सोने का भाव ₹1.59 लाख से बढ़कर सीधे ₹1.66 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया है।

चांदी भी नहीं रही पीछे, ₹20,000 प्रति किलो महंगी

सोने की राह पर चलते हुए चांदी ने भी आज रफ्तार पकड़ी है। चांदी की कीमतों में आज ₹20,000 प्रति किलोग्राम की भारी बढ़त देखी गई। अब चांदी ₹2.87 लाख प्रति किलो के स्तर पर कारोबार कर रही है, जो कुछ समय पहले तक ₹2.67 लाख पर स्थिर थी। बाजार के दिग्गज विशेषज्ञ अजय केडिया का अनुमान है कि यदि वैश्विक परिस्थितियां नहीं सुधरीं, तो आने वाले समय में सोना ₹1.90 लाख और चांदी ₹3.50 लाख के जादुई आंकड़े को भी छू सकती है।

क्यों लगी है सोने-चांदी की कीमतों में आग? ये हैं 3 मुख्य कारण

1. अंतरराष्ट्रीय युद्ध की ज्वाला और असुरक्षा: मध्य पूर्व में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच गहराते सैन्य संघर्ष ने दुनिया भर में डर का माहौल पैदा कर दिया है। इसके साथ ही रूस और यूक्रेन के बीच शांति वार्ता विफल होने से वैश्विक बाजार डरा हुआ है। जब भी युद्ध की स्थिति बनती है, निवेशक शेयर बाजार से अपना पैसा निकालकर सोने में निवेश करना सबसे सुरक्षित समझते हैं, जिसे 'सेफ हेवन' माना जाता है।

2. अमेरिकी फेडरल रिजर्व के संकेत: अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों को हवा देने का दूसरा बड़ा कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियां हैं। फेडरल रिजर्व ने संकेत दिए हैं कि इस वर्ष ब्याज दरों में कटौती की जा सकती है। ब्याज दरों में कमी का सीधा मतलब होता है कि डॉलर की तुलना में सोने में निवेश करना अधिक फायदेमंद होगा, जिससे कीमतों में तेजी आती है।

3. बड़े निवेशकों और ज्वैलर्स की भारी खरीदारी: पिछले कुछ दिनों में कीमतों में आई मामूली गिरावट को बड़े निवेशकों और ज्वैलर्स ने एक अवसर के रूप में देखा। बाजार में कम कीमतों पर भारी मात्रा में हुई इस नई खरीदारी (Fresh Buying) ने मांग और आपूर्ति के संतुलन को बिगाड़ दिया, जिससे कीमतों में अचानक यह तीव्र उछाल देखने को मिला है।

आम जनता की जेब पर भारी बोझ

इस वर्ष की शुरुआत से अब तक कीमती धातुओं ने रिटर्न के मामले में नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। पिछले साल के अंत में सोना ₹1.33 लाख पर था, जो अब ₹1.66 लाख हो चुका है। यानी महज कुछ ही महीनों में ₹33,000 की बढ़ोतरी। वहीं चांदी में भी इस साल ₹56,000 से ₹61,000 तक की कुल वृद्धि देखी जा चुकी है। मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए अब जेवर खरीदना किसी बड़े बजट की योजना बनाने जैसा हो गया है।