Iran crisis causes chaos on Dalal Street: सेंसेक्स 1048 अंक टूटा, निवेशकों के 65 लाख करोड़ स्वाहा

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India News Live,Digital Desk : मध्य पूर्व में गहराते युद्ध के बादलों और ईरान संकट की चिंगारी ने भारतीय शेयर बाजार को झुलसा कर रख दिया है। सोमवार, 2 मार्च 2026 को भारतीय शेयर बाजार में 'ब्लैक मंडे' जैसी स्थिति देखने को मिली, जहां ईरान और खाड़ी देशों के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने निवेशकों के बीच दहशत पैदा कर दी। खाड़ी देशों में तेल आपूर्ति पर मंडराते खतरे और ईरान के सर्वोच्च नेता की मृत्यु की खबरों के बीच बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 1,048 अंक लुढ़क गया, जिससे निवेशकों की गाढ़ी कमाई के लगभग 65 लाख करोड़ रुपये एक ही झटके में डूब गए।

बाजार की शुरुआत रही डरावनी, सेंसेक्स और निफ्टी में ऐतिहासिक गिरावट

आज कारोबार की शुरुआत ही भारी बिकवाली के साथ हुई। बाजार खुलते ही सेंसेक्स 2,743 अंकों के भारी भरकम गैप के साथ 78,543.73 के स्तर पर जा गिरा, जिसने निवेशकों के पसीने छुड़ा दिए। हालांकि, दिन के चढ़ने के साथ बाजार ने कुछ रिकवरी की कोशिश की, लेकिन अंततः सेंसेक्स 1,048.34 अंक (1.29%) गिरकर 80,238.85 पर बंद हुआ। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी50 भी 312.95 अंक (1.24%) की गिरावट के साथ 24,865.70 के स्तर पर बंद हुआ। इस सुनामी के बाद BSE में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप घटकर 457 लाख करोड़ रुपये रह गया है।

सेक्टरवार तबाही: तेल और गैस शेयरों में सबसे ज्यादा मार

बाजार में आई इस गिरावट का सबसे भीषण असर ट्रांसपोर्ट, तेल और गैस सेक्टर पर पड़ा है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने एयरलाइन और ऑटो शेयरों की कमर तोड़ दी।

सबसे ज्यादा टूटने वाले शेयर: इंडिगो और एल एंड टी (L&T) के शेयरों में 5% से अधिक की भारी गिरावट दर्ज की गई।

दिग्गज कंपनियों का हाल: रिलायंस, अदानी पोर्ट्स, मारुति सुजुकी, एशियन पेंट्स और बजाज फिनसर्व जैसी दिग्गज कंपनियों के शेयर लाल निशान में बंद हुए।

राहत की किरण: बाजार की इस चौतरफा गिरावट के बीच केवल सन फार्मा और आईटीसी (ITC) जैसे डिफेंसिव शेयरों में मामूली बढ़त देखी गई, जिन्होंने सूचकांक को और नीचे गिरने से रोकने का काम किया।

गिरावट के पीछे के 4 बड़े ट्रिगर

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आज की इस भारी उथल-पुथल के पीछे मुख्य रूप से चार कारण जिम्मेदार रहे:

कच्चे तेल की कीमतों में 10% का उछाल: ईरान द्वारा सऊदी अरब की तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाए जाने की खबरों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम 10% से ज्यादा बढ़ गए हैं। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश तेल आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतों में वृद्धि भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा है।

फियर इंडेक्स (VIX) में भारी उछाल: बाजार में अस्थिरता मापने वाला इंडिया VIX आज 25.01% बढ़कर 17.13 पर पहुंच गया। यह दर्शाता है कि निवेशकों के बीच डर का माहौल चरम पर है।

रुपये में कमजोरी और FII की बिकवाली: तेल महंगा होने से भारतीय रुपये की वैल्यू में गिरावट आई है। वहीं, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने आज बाजार से 7,536 करोड़ रुपये की भारी निकासी की, जिससे गिरावट को और बल मिला।

ईरान में नेतृत्व का संकट: ईरान के सर्वोच्च नेता की मृत्यु और उसके बाद खाड़ी देशों में युद्ध जैसी स्थिति ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को बाधित करने का डर पैदा कर दिया है।

मिडकैप और स्मॉलकैप भी धराशायी

केवल बड़े शेयर ही नहीं, बल्कि छोटे और मध्यम दर्जे के शेयरों में भी जबरदस्त बिकवाली देखी गई। मिडकैप इंडेक्स 1.58% और स्मॉलकैप इंडेक्स 1.75% तक टूट गए, जिससे रिटेल निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है।