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October 18 2026 09:09 pm

Geeta Jayanti 2025 : जानें क्या करें और क्या न करें इस पवित्र दिन

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India News Live,Digital Desk : गीता एक ऐसा ग्रंथ है, जिसमें लिखा हर शब्द स्वयं श्रीकृष्ण के श्रीमुख से निकलता है, इसलिए इस ग्रंथ का इतना महत्व है। हर साल मार्गशीर्ष मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी यानी मोक्षदा एकादशी के दिन गीता जयंती का पर्व मनाया जाता है।

गीता का पाठ करें – श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ करने से पुण्य फल मिलता है।

व्रत रखें – मोक्षदा एकादशी का व्रत इस दिन विशेष रूप से शुभ होता है।

भगवान कृष्ण की पूजा – भगवान की पूजा और मंत्र “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का जप करें।

सात्विक भोजन लें – इस दिन केवल शुद्ध, सात्विक भोजन करना चाहिए।

दान-पुण्य करें – गरीबों को भोजन, वस्त्र या धन का दान करें।

गायों की सेवा – उन्हें हरी घास और रोटी खिलाएं।

गीता के उपदेश अपनाएं – अपने जीवन में गीता के संदेशों को अपनाने का संकल्प लें।

गीता जयंती पर भूलकर भी न करें ये काम

तामसिक भोजन से परहेज – मांस, मदिरा या अस्वस्थ भोजन न करें।

नकारात्मक विचारों से दूर रहें – मन में अशुभ या नकारात्मक विचार न लाएं।

अशुद्ध मन या बिना स्नान के पाठ न करें – गंदे हाथों या अशांत मन से गीता का पाठ न करें।

अधूरा पाठ न छोड़ें – यदि गीता पढ़ना शुरू किया है, तो पूरा अध्याय पढ़कर ही उठें।

तुलसी का असभ्य व्यवहार न करें – एकादशी के दिन तुलसी में जल अर्पित न करें और पत्ते न उतारें।

सारांश

गीता जयंती के दिन अपने घर और मन को पवित्र रखें। सात्विक भोजन, दान-पुण्य और गीता के उपदेशों का पालन करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, शांति और समृद्धि आती है।