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July 16 2026 04:46 am

Gangaur 2026 : आज मनाया जा रहा है आस्था का महापर्व गणगौर, अखंड सौभाग्य के लिए अपनी राशि के अनुसार जपें ये 'जादुई' मंत्र...

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India News Live,Digital Desk : चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि यानी आज 21 मार्च को देशभर में गणगौर का पावन पर्व बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। विशेष रूप से राजस्थान और उत्तर भारत के कई हिस्सों में सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और अविवाहित कन्याएं मनचाहा वर पाने के लिए मां गौरी और भगवान शिव (ईसर जी) की श्रद्धापूर्वक पूजा कर रही हैं। ज्योतिषियों के अनुसार, इस वर्ष गणगौर पर कई शुभ संयोग बन रहे हैं, जिसमें राशि अनुसार मंत्रों का जाप करना आपके जीवन में खुशहाली और सौभाग्य के द्वार खोल सकता है।

गणगौर पूजा का महत्व और शुभ मुहूर्त

शास्त्रों में गणगौर का अर्थ 'गण' यानी शिव और 'गौर' यानी माता पार्वती से है। मान्यता है कि आज के दिन माता पार्वती अपनी सखियों के साथ गणगौर के रूप में मायके आती हैं। सुहागिनें 16 दिनों तक चलने वाले इस कठिन व्रत का समापन आज विशेष श्रृंगार और उद्यापन के साथ कर रही हैं। आज पूजा का शुभ समय सुबह से ही शुरू हो गया है, जिसमें मिट्टी के ईसर और गौरी की प्रतिमाओं को सजाकर कहानी सुनी जाती है और चूरमे का भोग लगाया जाता है।

अपनी राशि के अनुसार करें इन मंत्रों का जाप

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यदि आज महिलाएं अपनी राशि के स्वामी ग्रह को ध्यान में रखकर विशेष मंत्रों का जाप करती हैं, तो माता गौरी की असीम कृपा प्राप्त होती है। मेष और वृश्चिक राशि की महिलाओं को 'ओम गौरीशंकराय नमः' का जाप करना चाहिए, जबकि वृषभ और तुला राशि वालों के लिए 'ओम उमामहेश्वराभ्यां नमः' अत्यंत फलदायी है। मिथुन और कन्या राशि की जातक 'ओम नमः शिवाय' और धनु व मीन राशि की महिलाएं 'ओम पार्वत्यै नमः' का जाप कर अपने दाम्पत्य जीवन में मधुरता ला सकती हैं। मकर और कुंभ राशि के लिए 'ओम शं शिवाय नमः' का जाप श्रेष्ठ बताया गया है।

सुख-समृद्धि के लिए करें ये विशेष उपाय

गणगौर के दिन केवल पूजा ही नहीं, बल्कि दान-पुण्य का भी विशेष महत्व है। यदि आपके वैवाहिक जीवन में तनाव चल रहा है, तो आज के दिन माता पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित करें और उसे बाद में किसी जरूरतमंद सुहागिन को दान कर दें। कुंवारी कन्याओं को आज चांदी का सिक्का या लाल वस्त्र दान करना चाहिए, जिससे विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं। शाम के समय तालाब या नदी किनारे गणगौर विसर्जन के दौरान घी का दीपक जलाना पूरे परिवार के लिए सुख-शांति का कारक बनता है।