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July 16 2026 07:22 am

Astro Tips: सोना-चांदी खरीदने से पहले जान लें ये जरूरी नियम, गलत मुहूर्त में गहने लाना पड़ सकता है भारी, जानें शास्त्रों की सलाह...

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India News Live,Digital Desk : भारतीय संस्कृति में आभूषण केवल सजने-संवरने का साधन नहीं, बल्कि संपन्नता और सौभाग्य का प्रतीक माने जाते हैं। अक्सर हम अपनी पसंद या बजट के अनुसार किसी भी दिन गहनों की खरीदारी कर लेते हैं, लेकिन ज्योतिष शास्त्र (Astrology) के अनुसार हर धातु का संबंध किसी न किसी ग्रह से होता है। शास्त्रों की मानें तो बिना शुभ मुहूर्त और सही दिन का विचार किए सोने-चांदी की खरीदारी करना शुभ फल के बजाय आर्थिक तंगी या अशुभता का कारण भी बन सकता है। आइए जानते हैं कि गहने खरीदने से पहले आपको किन खास ज्योतिषीय नियमों का पालन करना चाहिए।

सोना और चांदी: किस ग्रह का होता है प्रभाव?

ज्योतिष गणना के अनुसार, सोने (Gold) का संबंध देवगुरु बृहस्पति से है, जो सुख और समृद्धि के कारक हैं। वहीं, चांदी (Silver) का सीधा संबंध चंद्रमा और शुक्र से माना गया है, जो मन की शांति और विलासिता का प्रतीक हैं। यदि आप गुरु के प्रतिकूल दिन सोना खरीदते हैं, तो यह आपके संचित धन में कमी ला सकता है। इसी तरह, गलत नक्षत्र में चांदी की खरीदारी मानसिक तनाव का कारण बन सकती है। शास्त्रों में स्पष्ट उल्लेख है कि पुष्य नक्षत्र, गुरु पुष्य योग और रवि पुष्य योग आभूषणों की खरीदारी के लिए सर्वोत्तम समय होते हैं।

सप्ताह के इन दिनों में भूलकर भी न खरीदें आभूषण

अमर उजाला के ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार, शनिवार के दिन सोने की खरीदारी से बचना चाहिए, क्योंकि सोना सूर्य का कारक है और शनिवार शनि देव का दिन है। इन दोनों के बीच शत्रुता का भाव होने के कारण इस दिन खरीदा गया सोना परिवार में कलह ला सकता है। वहीं, मंगलवार को तांबा या मंगल से संबंधित धातुएं खरीदना तो ठीक है, लेकिन विलासिता के गहनों के लिए शुक्रवार का दिन सबसे उत्तम माना गया है। शुक्रवार मां लक्ष्मी का दिन है, इसलिए इस दिन हीरा, चांदी या सोने के गहने घर लाने से बरकत बनी रहती है।

खरीदारी के समय नक्षत्रों का रखें विशेष ध्यान

केवल दिन ही नहीं, बल्कि नक्षत्रों का भी अपना विशेष महत्व है। रोहिणी, मृगशिरा, हस्त और स्वाति जैसे शुभ नक्षत्रों में खरीदे गए गहने न केवल टिकते हैं, बल्कि उनमें समय के साथ वृद्धि भी होती है। यदि आप निवेश के उद्देश्य से सोना खरीद रहे हैं, तो अक्षय तृतीया, धनतेरस या दीपावली जैसे पर्वों के अलावा पंचक रहित शुभ चौघड़िया का विचार अवश्य करें। मान्यता है कि राहुकाल के दौरान की गई खरीदारी से गहनों के चोरी होने या खोने का भय बना रहता है।