बाढ़ पीड़ितों को फसल-मकान क्षति का मिलेगा मुआवजा: CM योगी ने अफसरों को सौंपा टास्क
उत्तर प्रदेश में भारी बारिश और नदियों के उफान के चलते आई बाढ़ की विभीषिका के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पीड़ितों को फौरी राहत पहुंचाने के लिए प्रशासनिक मशीनरी को पूरी तरह सक्रिय कर दिया है। बाढ़ एवं अतिवृष्टि से प्रभावित चित्रकूट जिले का स्थलीय और हवाई निरीक्षण कर लखनऊ लौटे मुख्यमंत्री ने रविवार को वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के साथ एक आपात समीक्षा बैठक की। बैठक में सीएम योगी ने अधिकारियों को दो टूक निर्देश देते हुए साफ कर दिया कि आपदा की इस घड़ी में सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ जनता के साथ खड़ी है और राहत कार्यों में किसी भी स्तर पर हीलाहवाली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने अफसरों को कई अहम टास्क सौंपते हुए फसल और मकान क्षति का तत्काल सर्वे कराकर पात्र परिवारों को नियमानुसार वित्तीय सहायता और मुआवजा जारी करने के आदेश दिए हैं।
फसलों का तत्काल सर्वे और क्षतिग्रस्त मकानों को मुख्यमंत्री आवास योजना
मुख्यमंत्री ने कृषि, राजस्व और जिला प्रशासन के अधिकारियों को निर्देश दिया कि बाढ़ के पानी में डूबी फसलों के नुकसान का युद्धस्तर पर सर्वे पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि अन्नदाता किसानों की मेहनत का नुकसान सरकार नहीं होने देगी; पात्र किसानों की पहचान कर नियमों के मुताबिक त्वरित गति से मुआवजा राशि सीधे उनके खातों में भेजी जाए।
इसके साथ ही, आशियाना गंवा चुके परिवारों के लिए मुख्यमंत्री ने बड़ा ऐलान किया:
पूरी तरह ध्वस्त मकान: जिन परिवारों के मकान बाढ़ के तेज बहाव में पूरी तरह ढह गए हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान उपलब्ध कराया जाएगा।
आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकान: जिन घरों की दीवारें, छतें या हिस्से आंशिक रूप से टूटे हैं, उनकी त्वरित मरम्मत के लिए प्रभावित परिवारों को तत्काल आर्थिक सहायता दी जाएगी।
व्यापारियों और मठ-मंदिरों के नुकसान का भी होगा आंकलन
सीएम योगी ने पहली बार बाढ़ से प्रभावित स्थानीय दुकानदारों, छोटे व्यापारियों और धार्मिक स्थलों के नुकसान की भरपाई के लिए भी स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं। चित्रकूट धाम सहित अन्य प्रभावित इलाकों में आई बाढ़ के चलते दुकानों, गोदामों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को हुए नुकसान का सर्वे करने के लिए विशेष व्यवस्था बनाने को कहा गया है।
इसके अतिरिक्त, बाढ़ के पानी से ऐतिहासिक मठ-मंदिरों को पहुंची क्षति का भी तकनीकी सर्वे कराया जाएगा और उनके जीर्णोद्धार व मरम्मत का काम तत्काल शुरू कराया जाएगा। सीएम ने दोहराया कि राज्य सरकार इन सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहरों के संरक्षण में पूरा सहयोग देगी।
48 घंटे के भीतर बंटे राहत किट, स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट रहने के आदेश
राहत वितरण की रफ्तार की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कड़ा निर्देश दिया कि शेष बची सभी खाद्य व राहत किट का वितरण अगले 48 घंटे के भीतर हर हाल में पूरा कर लिया जाए। अधिकारियों को वातानुकूलित दफ्तरों से निकलकर जमीनी स्तर पर पीड़ितों के बीच मौजूद रहने की सख्त हिदायत दी गई।
बाढ़ का पानी उतरने के बाद पैदा होने वाले संक्रामक रोगों (Infectious Diseases) के खतरे पर सीएम ने स्वास्थ्य विभाग को हाई-अलर्ट पर रखा है:
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) के नेतृत्व में मेडिकल टीमें प्रभावित बस्तियों में 24 घंटे सक्रिय रहेंगी।
शुद्ध पेयजल, क्लोरीन की गोलियां, ब्लीचिंग पाउडर और ओआरएस के पैकेट घर-घर वितरित किए जाएंगे।
पशुधन की सुरक्षा के लिए गोशालाओं का निरीक्षण, चारे की उपलब्धता और पशुओं को 'लंपी वायरस' जैसी बीमारियों से बचाने के लिए टीकाकरण अभियान चलाने को कहा गया है।
मंदाकिनी के कैचमेंट एरिया से हटेगा अतिक्रमण, बनेगी दीर्घकालिक योजना
बाढ़ की स्थायी रोकथाम के लिए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दीर्घकालिक नीति (Long-Term Action Plan) तैयार करने का जिम्मा सौंपा। उन्होंने मंदाकिनी नदी के कैचमेंट एरिया (जलग्रहण क्षेत्र) में अवैध रूप से बने कब्जों और अतिक्रमणों को चिह्नित कर नियमानुसार तत्काल बुलडोजर कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
साथ ही यह सुनिश्चित करने को कहा कि चित्रकूट की आस्था से जुड़ी पवित्र मंदाकिनी नदी में किसी भी दशा में शहर के सीवर या गंदे नालों का पानी न गिरे। इसके लिए नगर विकास, पर्यटन और सिंचाई विभाग को मिलकर कार्ययोजना लागू करने को कहा गया है। नदी पर बने फुट ओवरब्रिज का पीडब्ल्यूडी द्वारा सेफ्टी ऑडिट कराने और एयरपोर्ट मार्ग का निर्माण कार्य विजयादशमी से पहले पूरा करने की अंतिम समयसीमा भी तय कर दी गई है।