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October 05 2026 06:42 pm

रूस में 'ब्लैक डेथ' प्लेग का खौफ: लैब में बैक्टीरिया वाला टेस्ट ट्यूब फूटा, 200 लोग क्वारंटीन; मचा हड़कंप

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रूस से एक बेहद सनसनीखेज और चिंताजनक खबर सामने आ रही है, जिसने वहां के स्वास्थ्य तंत्र और सुरक्षा एजेंसियों के होश उड़ा दिए हैं। भारत के पुराने रणनीतिक साझेदार रूस के एक शोध संस्थान (बायो-रिसर्च लैब) में घातक संक्रामक बीमारी प्लेग (Plague) से जुड़ा एक टेस्ट ट्यूब दुर्घटनावश फर्श पर गिरकर फूट गया। ट्यूब के टूटते ही लैब के भीतर और आसपास के इलाके में भारी अफरा-तफरी मच गई। संक्रमण के खतरे को भांपते हुए रूसी स्वास्थ्य अधिकारियों ने तुरंत हाई-लेवल इमरजेंसी प्रोटोकॉल एक्टिवेट किया और करीब 200 लोगों को आनन-फानन में आइसोलेशन (क्वारंटीन) में भेज दिया है।

लैब में कैसे फूटा बैक्टीरिया से भरा टेस्ट ट्यूब?

प्राथमिक रिपोर्टों के अनुसार, यह घटना एक उच्च-सुरक्षा वाली जैविक अनुसंधान सुविधा (Bio-Safety Lab) में नियमित सैंपलिंग और एनालिसिस के दौरान हुई।

लापरवाही या तकनीकी चूक: लैब में वैज्ञानिकों की एक टीम घातक जीवाणुओं के कल्चर पर काम कर रही थी। उसी दौरान हैंडलिंग में हुई एक चूक के चलते येर्सिनिया पेस्टिस (Yersinia pestis) बैक्टीरिया से भरा वाइल/टेस्ट ट्यूब हाथ से छूटकर कंक्रीट के फर्श पर गिर गया और चकनाचूर हो गया।

तुरंत लॉकडाउन: ट्यूब टूटने के तुरंत बाद प्रयोगशाला में एयर-सर्कुलेशन को काट दिया गया और इमरजेंसी सायरन बजाकर पूरे परिसर को सील कर दिया गया। घटना के वक्त वहां मौजूद शोधकर्ताओं, तकनीकी कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों को तुरंत बाहर निकलने से रोककर डीकंटेमिनेशन जोन में ले जाया गया।

200 लोग क्वारंटीन, पूरे इलाके में कड़ा मेडिकल पहरा

रूसी उपभोक्ता स्वास्थ्य निगरानी संस्था (Rospotrebnadzor) और आपातकालीन मंत्रालय ने संयुक्त रूप से मोर्चा संभाल लिया है:

सघन कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग: लैब में मौजूद कर्मियों के अलावा, उस इमारत में आने-जाने वाले सभी लोगों और उनके संपर्क में आए परिजनों सहित 200 से अधिक लोगों को चिह्नित कर निगरानी केंद्रों में क्वारंटीन किया गया है।

दवाओं का प्री-एक्सपोजर डोज: क्वारंटीन किए गए सभी लोगों को एहतियातन शक्तिशाली एंटीबायोटिक्स की डोज दी जा रही है ताकि यदि बैक्टीरिया के एयरोसोल कण किसी के संपर्क में आए भी हों, तो संक्रमण फैलने से पहले ही बेअसर हो जाए।

सख्त निगरानी: पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी गई है और विशेष रासायनिक छिड़काव दल पूरी इमारत को सैनिटाइज करने में जुटा है।

इतिहास में करोड़ों जानें ले चुका है यह बैक्टीरिया

प्लेग को इतिहास में 'ब्लैक डेथ' (Black Death) के नाम से जाना जाता है, जिसने मध्यकाल में यूरोप और एशिया की एक बड़ी आबादी को खत्म कर दिया था।

संक्रमण का प्रकार: यह येर्सिनिया पेस्टिस नामक बैक्टीरिया के कारण होता है।

घातक रूप: आमतौर पर यह चूहों और पिस्सुओं (Fleas) के जरिए फैलता है और ब्यूदोनिक प्लेग का रूप लेता है। लेकिन लैब में एयरोसोल रूप में इसके फैलने पर यह 'न्यूमोनिक प्लेग' (फेफड़ों का प्लेग) बन सकता है, जो हवा के जरिए एक इंसान से दूसरे इंसान में बेहद तेजी से फैलता है और समय पर इलाज न मिलने पर 24 से 48 घंटे के भीतर जानलेवा साबित हो सकता है।

सरकार ने कहा- स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में

रूस के स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य मंत्रालय ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और पैनिक न फैलाएं। अधिकारियों का दावा है कि आधुनिक एंटीबायोटिक दवाओं और समय पर लागू किए गए क्वारंटीन प्रोटोकॉल की वजह से संक्रमण के लैब की चारदीवारी से बाहर आम आबादी तक पहुंचने का खतरा न के बराबर है। फिर भी, सुरक्षा एजेंसियां इस बात की विस्तृत जांच कर रही हैं कि हाई-लेवल बायो-सेफ्टी लैब में इतना बड़ा लैप्स आखिर कैसे हुआ।