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October 06 2026 09:31 pm

'वंदे मातरम कहने से मेरा धर्म खतरे में नहीं पड़ता, लेकिन...': जावेद अख्तर ने देशभक्ति और जबरन नारों पर कही दो-टूक बात

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मशहूर गीतकार, शायर और पूर्व राज्यसभा सांसद जावेद अख्तर अपने बेबाक और स्पष्ट विचारों के लिए जाने जाते हैं। चाहे सामाजिक मुद्दे हों, धर्मनिरपेक्षता हो या राष्ट्रवाद, वह हमेशा अपनी राय बिना लाग-लपेट के रखते हैं। हाल ही में एक सार्वजनिक मंच पर बातचीत के दौरान जावेद अख्तर ने देश में अक्सर छिड़ने वाले 'वंदे मातरम' और राष्ट्रभक्ति के विवाद पर दो-टूक बयान दिया है।

उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वंदे मातरम गाने या बोलने से किसी का ईमान या धर्म खतरे में नहीं पड़ता, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने इसे किसी पर जबरन थोपने और देशभक्ति साबित करने की अनिवार्य शर्त बनाने वालों को भी कड़ा आईना दिखाया।

'वंदे मातरम मेरी मातृभूमि का नमन है': जावेद अख्तर

जावेद अख्तर ने चर्चा के दौरान अपनी भावनाएं साझा करते हुए कहा कि उनके लिए अपने देश और मिट्टी के प्रति सम्मान सबसे ऊपर है:

मातृभूमि के प्रति सम्मान: अख्तर ने कहा, "मैं एक हिंदुस्तानी हूं और इस मिट्टी से मेरा गहरा जुड़ाव है। 'वंदे मातरम' का सीधा अर्थ है—'मां, मैं तुझे नमन करता हूं'। मुझे अपनी मातृभूमि को नमन करने या उसका गुणगान करने में कोई झिझक या संकोच नहीं है। ऐसा करने से न तो मेरी आस्था कम होती है और न ही मेरा धर्म खतरे में पड़ता है।"

धार्मिक कट्टरता पर सवाल: उन्होंने उन रूढ़िवादी और कट्टरपंथी तत्वों की भी आलोचना की जो इस नारे को केवल किसी खास धर्म से जोड़कर इसका विरोध करते हैं और समाज में बेवजह की बहस खड़ी करते हैं।

'लेकिन इसे जबरन थोपना और देशभक्ति का पैमाना बनाना गलत है'

अख्तर ने जहां एक तरफ वंदे मातरम का सम्मान किया, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने उन लोगों पर भी सीधा प्रहार किया जो इसे आक्रामकता और दबाव का हथियार बनाते हैं:

जबरदस्ती का विरोध: अख्तर ने कहा कि राष्ट्रप्रेम दिल से आता है, किसी के दबाव या डंडे के जोर पर नहीं। "समस्या तब शुरू होती है जब किसी को सड़क पर घेरकर या संसद में खड़े होकर यह साबित करने के लिए मजबूर किया जाता है कि तुम पहले यह नारा लगाओ, तभी तुम्हें सच्चा देशभक्त माना जाएगा।"

सर्टिफिकेट बांटने की राजनीति: उन्होंने दो-टूक अंदाज में कहा कि किसी भी नागरिक को अपनी वफादारी का प्रमाणपत्र जेब में लेकर घूमने की जरूरत नहीं होनी चाहिए। अगर कोई व्यक्ति शांतिपूर्ण ढंग से देश के संविधान और कानूनों का सम्मान कर रहा है, तो किसी को यह अधिकार नहीं है कि वह उससे जबरन कोई खास नारा लगवाए।

देशप्रेम बनाम दिखावा: अख्तर का स्पष्ट संदेश

जावेद अख्तर ने अपने वक्तव्य में राष्ट्रवाद और आडंबर के बीच के फर्क को रेखांकित किया:

सच्ची देशभक्ति क्या है?: अख्तर के अनुसार, असली राष्ट्रभक्ति समाज के कमजोर वर्ग की भलाई, देश के संविधान की रक्षा और आपसी भाईचारे को बनाए रखने में है, न कि केवल लाउडस्पीकर पर नारे लगाकर दूसरों को डराने में।

संविधान की भावना: उन्होंने याद दिलाया कि भारत का संविधान हर नागरिक को अपनी व्यक्तिगत आस्था और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है। किसी भी लोकतांत्रिक देश में आदर भाव से प्रेरित आचरण स्वाभाविक होना चाहिए, अनिवार्य या डराने वाला नहीं।

जावेद अख्तर का यह संतुलित और मुखर बयान सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है, जहां एक बड़ा वर्ग उनके इस व्यावहारिक और तर्कसंगत नजरिए की सराहना कर रहा है।