घर के लिए खरीदने जा रहे हैं इलेक्ट्रिक चिमनी? शोर, साइज और सक्शन पावर सहित इन 5 जरूरी बातों का रखें ध्यान
भारतीय खानपान में तड़का, डीप फ्राइंग और तरह-तरह के मसालों का भरपूर इस्तेमाल होता है। ऐसे में किचन की दीवारों, टाइल्स और छत पर चिपचिपा तेल-धुआं जमना बेहद आम बात है। इस धुएं और दुर्गंध से छुटकारा पाने के लिए मॉड्यूलर किचन में इलेक्ट्रिक चिमनी (Kitchen Chimney) एक अनिवार्य गैजेट बन चुकी है। बाजार में कई तरह के डिजाइन और फीचर्स मौजूद हैं, जिससे सही विकल्प चुनना अक्सर भ्रमित करने वाला हो जाता है।
अगर आप भी अपने घर के लिए नई चिमनी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो बिलिंग काउंटर पर जाने से पहले इन 5 अहम तकनीकी बिंदुओं को जरूर परख लें।
1. सक्शन कैपेसिटी (Suction Capacity): भारतीय किचन के लिए कितनी हो पावर?
चिमनी की कार्यक्षमता उसकी सक्शन पावर यानी हवा खींचने की क्षमता पर निर्भर करती है, जिसे क्यूबिक मीटर प्रति घंटा ($m^3/hr$) में मापा जाता है:
सामान्य या कम कुकिंग: यदि घर में हल्का खाना बनता है और तेल-मसालों का कम प्रयोग होता है, तो 800 से 1000 $m^3/hr$ सक्शन वाली चिमनी पर्याप्त मानी जाती है।
हेवी फ्राइंग और तड़का (भारतीय खाना): नियमित रूप से पराठे, पूड़ी और नॉन-वेज जैसी चीजें बनने वाले किचन के लिए कम से कम 1200 से 1500 $m^3/hr$ सक्शन पावर वाली चिमनी ही चुनें। यह किचन के कोने-कोने से धुआं खींचकर बाहर निकालने में सक्षम होती है।
2. चिमनी का साइज: गैस स्टोव के बर्नर से करें मिलान
चिमनी का आकार आपके गैस चूल्हे के आकार से मेल खाना चाहिए ताकि धुआं बाहर न फैले:
60 सेंटीमीटर (60 cm): यदि आपके पास 2 से 3 बर्नर वाला सामान्य गैस चूल्हा है, तो 60 सेमी की चिमनी सबसे मुफीद बैठती है।
90 सेंटीमीटर (90 cm): यदि आपका गैस स्टोव 3 से अधिक बर्नर या 4-5 बर्नर वाला बड़ा हॉब है, तो आपको 90 सेमी की चिमनी ही चुननी चाहिए ताकि पूरे बर्नर एरिया को कवर किया जा सके।
3. सही फिल्टर का चुनाव: बैफल फिल्टर है सबसे बेस्ट
चिमनी में फिल्टर का प्रकार मेंटेनेंस और परफॉर्मेंस दोनों को प्रभावित करता है:
बैफल फिल्टर (Baffle Filter): भारतीय घरों के लिए यह सबसे बेहतरीन विकल्प है। इसका कर्व्ड (मुड़ा हुआ) पैनल तेल और ग्रीस को अंदर ही जमा कर लेता है और गर्म हवा को बाहर फेंक देता है। इसे महीने-दो महीने में एक बार साफ करना पड़ता है।
फिल्टरलेस टेक्नोलॉजी (Filterless Technology): आजकल मोटर के सीधे संपर्क वाली फिल्टरलेस चिमनियां काफी लोकप्रिय हैं। इनमें कोई फिल्टर नहीं होता, जिससे चोक होने का झंझट खत्म हो जाता है और मेंटेनेंस बहुत आसान हो जाता है।
मेश / कैसेट फिल्टर: इसमें एल्युमिनियम की पतली जाली होती है जो भारतीय मसालों और तेल से बहुत जल्दी जाम हो जाती है, इसलिए इसे लेने से बचें।
4. ऑटो-क्लीन (Auto-Clean) और मोशन सेंसर फीचर्स
थर्मल / ड्राई ऑटो-क्लीन: इस फीचर के जरिए एक बटन दबाते ही चिमनी की मोटर हल्की गर्म होती है और जमा हुआ सारा तेल पिघलकर नीचे लगे ऑयल कलेक्टर कप (Oil Collector Cup) में आ जाता है। आपको सिर्फ उस कप को निकालकर साफ करना होता है।
मोशन सेंसर (Motion Sensor / Gesture Control): खाना बनाते समय हाथ अक्सर तेल या आटे से सने होते हैं। मोशन सेंसर वाली चिमनी में सिर्फ हाथ हिलाकर (Wave करके) चिमनी को ऑन/ऑफ या स्पीड कंट्रोल किया जा सकता है।
5. डक्टेड बनाम डक्टलेस और नॉइज लेवल (Noise Level)
डक्टेड चिमनी (Ducted): इसमें पाइप के जरिए धुआं सीधे घर के बाहर निकलता है। यह सबसे ज्यादा असरदार और टिकाऊ होती है।
डक्टलेस चिमनी (Ductless): यदि किचन में दीवार तोड़कर बाहर पाइप निकालने की जगह नहीं है, तो कार्बन फिल्टर वाली डक्टलेस चिमनी का इस्तेमाल किया जाता है, जो हवा को रीसायकल करती है। हालांकि, इसमें बार-बार फिल्टर बदलने का खर्च आता है।
आवाज का स्तर (Noise Level): चिमनी खरीदते समय उसका डेसिबल (dB) लेवल जरूर चेक करें। 50 से 58 dB तक का नॉइज लेवल सामान्य और शांत माना जाता है, जबकि इससे ज्यादा शोर कुकिंग के दौरान सिरदर्द बन सकता है।