Air India Turbulence Incident: फुकेट से दिल्ली आ रही फ्लाइट में हुआ था बड़ा तकनीकी संकट
हाल ही में फुकेट से नई दिल्ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट (AI2379) के दौरान हवा में हुए झटकों यानी टर्बुलेंस का मामला सामान्य नहीं था। इस घटना को लेकर विमान निर्माता कंपनी एयरबस की शुरुआती इंजीनियरिंग रिपोर्ट में एक बेहद चौंकाने वाला और गंभीर खुलासा सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, उड़ान के दौरान विमान के तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम एक के बाद एक फेल हो गए थे, जिसके कारण करीब चार सेकंड तक विमान की मुख्य कंट्रोल सतहों ने काम करना पूरी तरह बंद कर दिया था। इसी तकनीकी संकट के बीच विमान अचानक 300 फीट नीचे आ गया था और उसमें सवार कई यात्री घायल हो गए थे।
क्या कहती है एयरबस की शुरुआती इंजीनियरिंग रिपोर्ट?
घटना के बाद एयर इंडिया ने विमान निर्माता कंपनी एयरबस से इस तकनीकी खामी को लेकर कई सवाल पूछे थे। एयरबस की इंजीनियरिंग टीम ने ब्लैक बॉक्स यानी फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर के डेटा को डिकोड करने के बाद यह शुरुआती आकलन तैयार किया है। हालांकि, कंपनी ने इसे अंतिम निष्कर्ष नहीं माना है। रिपोर्ट में यह भी दर्ज है कि यह विमान एयरबस A320neo था, जो फुकेट के VTSP एयरपोर्ट से उड़ान भरकर दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर आ रहा था।
सिर्फ 7 सेकंड के भीतर हुआ पूरा घटनाक्रम
इस रिपोर्ट में सेकंड-दर-सेकंड पूरी घटना का ब्योरा दर्ज है और यह सारा घटनाक्रम महज सात सेकंड के भीतर का है। इन सात सेकंड में विमान के भीतर जो हुआ उसने सभी को हैरान कर दिया:
सबसे पहले विमान के तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम फेल हुए।
इसके तुरंत बाद विमान की नाक अचानक ऊपर की तरफ उठ गई।
विमान का ऑटोपायलट मोड अपने आप कट गया।
कॉकपिट में बैठे पायलट के सारे कमांड पूरी तरह बेअसर साबित हुए।
इसके बाद सिस्टम अपने आप दोबारा वापस आ गए।
हाइड्रोलिक सिस्टम का फेल होना और तकनीकी पेचीदगियां
हवाई जहाज के पंखों और पूंछ पर कुछ विशेष सतहें होती हैं, जिन्हें हिलाने के लिए हाइड्रोलिक दबाव की जरूरत होती है। एयरबस A320 जैसे विमानों में तीन अलग-अलग हाइड्रोलिक सिस्टम (ग्रीन, ब्लू और येलो) दिए जाते हैं ताकि सुरक्षा के लिहाज से यदि एक फेल हो तो बाकी दो के जरिए विमान सुरक्षित रहे। लेकिन इस उड़ान में पहले ग्रीन सिस्टम और उसके अगले ही सेकंड ब्लू और येलो सिस्टम भी फेल हो गए। दबाव खत्म होने के कारण कंट्रोल सतहें हवा के बहाव पर आ गईं और लगभग चार सेकंड तक पायलट के किसी भी कमांड ने काम नहीं किया। हालांकि, कुछ सेकंड बाद ये सिस्टम अपने आप ठीक हो गए और पायलट ने स्थिति को संभाल लिया।
आगे की जांच और AAIB की भूमिका
एयरबस ने एयर इंडिया को इस मामले में तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम के कड़े ऑपरेशनल टेस्ट कराने, प्रेशर स्विच और ऑटोमैटिक फ्लाइट सिस्टम के डेटा की जांच करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा विमान के ढांचे यानी एयरफ्रेम की विशेष स्ट्रक्चरल जांच भी करने को कहा गया है। हालांकि, इस घटना की असली और आधिकारिक वजह तय करने का अधिकार भारत की विमान दुर्घटना जांच एजेंसी (AAIB) के पास है, जिसकी विस्तृत जांच अभी भी जारी है।